मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के नाम पर साढ़े नौ करोड़ की धोखाधड़ी, जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर किया गया बड़ा फर्जीवाड़ा मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर साढ़े नौ करोड़ रुपये हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है। सीआईडी ने इस संगठित गिरोह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं और 482 से अधिक बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना को निशाना बनाकर एक बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के दायरे में आने वाली इस ठगी में शातिर अपराधियों ने जीवित व्यक्तियों को कागजों में मृत बताकर बीमा कंपनियों से भारी-भरकम राशि क्लेम कर ली। इस सनसनीखेज खुलासे ने वित्तीय संस्थानों और स्थानीय प्रशासनिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह पूरा खेल अधिकारियों और बैंकों की नाक के नीचे लंबे समय तक चलता रहा। व्यापक स्तर पर फैला आपराधिक नेटवर्क जांच एजेंसियों के अनुसार यह संगठित सिंडिकेट केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका दायरा ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और राजस्थान की सीमाओं तक फैला हुआ था। गिरोह ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके पहचान दस्तावेज हासिल किए। इन दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में सैकड़ों संदिग्ध खाते खुलवाए गए और खाताधारकों की जानकारी के बिना ही विभिन्न बीमा कंपनियों से पॉलिसी खरीद ली गईं। शुरुआती एक या दो किश्तों का भुगतान खुद गिरोह ने किया ताकि योजना सक्रिय बनी रहे। इसके बाद स्थानीय नगरीय निकायों के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए गए और प्राकृतिक मौत का दावा पेश करके क्लेम की पूरी राशि अपने चहेते लोगों के खातों में ट्रांसफर करवा ली गई। असामान्य पैटर्न और तकनीकी सुराग इस पूरे घोटाले की परतें तब खुलीं जब पुलिस और सीआईडी ने दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू की। अधिकारियों के सामने कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य आए जिनसे इस सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हुआ। कई मामलों में एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों की मौत एक ही सप्ताह या एक महीने के भीतर दिखाई गई। इसके अलावा दस्तावेजों की तकनीकी जांच में गंभीर अनियमिताएं मिलीं। कई अलग-अलग खाताधारकों के केवाईसी फॉर्म और बीमा आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर और एक ही ई-मेल आईडी दर्ज पाई गई। उदाहरण के लिए, प्रीति शाक्य, पुष्पा, सावित्री वर्मा, गिरजा, उषा बाथम और रिंकू के खातों में एक ही ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह कई अन्य खातों में भी समान संपर्क सूत्र मिलने से एजेंसियों का शक पुख्ता हो गया कि इन सभी मामलों के तार आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें एक ही गिरोह द्वारा संचालित किया जा रहा था। फेडरल बैंक और दूसरे राज्यों तक पहुंची जांच कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए आरोपियों ने बेहद चालाकी से पैसों की निकासी की। बैंक खाते मध्य प्रदेश के चंबल संभाग और आसपास के जिलों में खुलवाए गए, लेकिन क्लेम का पैसा आते ही उसे तुरंत राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों जैसे रतलाम, सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर के एटीएम से नकद निकाल लिया जाता था। रतलाम स्थित फेडरल बैंक की शाखा के 62 खातों से ही करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। जांच का दायरा अब मध्य प्रदेश की सीमाओं को पार कर चुका है। सीआईडी ने इंदौर की पीपल्याहाना शाखा से दर्जनों खातों के दस्तावेज जब्त किए हैं, वहीं बेंगलुरु और छत्तीसगढ़ से जुड़े बीमा रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। अब तक 121 मामलों में सीधी ठगी की पुष्टि हो चुकी है और 482 से अधिक बैंक खातों की गहन छानबीन जारी है। इसका आप पर असर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़े इस बड़े फर्जीवाड़े का असर आम नागरिकों और वित्तीय सुरक्षा योजनाओं पर सीधा पड़ेगा। • भारत में: केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत क्लेम प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच अब देश भर में अधिक कठोर हो जाएगी। बीमा कंपनियों और बैंकों द्वारा केवाईसी और मृत्यु प्रमाण पत्रों के सत्यापन के नियमों को और सख्त किया जाएगा। • मध्य प्रदेश में: ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और आसपास के जिलों के खाताधारकों को अपनी बैंक प्रविष्टियों और दस्तावेजों की अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं में नाम जुड़वाने और क्लेम प्राप्त करने की प्रक्रियाओं में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी। ऐसा क्यों हुआ यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से कमजोर प्रशासनिक निगरानी और बैंकिंग तंत्र की कमियों का फायदा उठाकर किया गया। • आपराधिक साजिश: शातिर ठगों ने गरीबों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके बिना उनकी जानकारी के बीमा पॉलिसियां लीं और स्थानीय कर्मचारियों से मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए। • निगरानी में लापरवाही: बैंकों और बीमा कंपनियों द्वारा एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी वाले कई खातों पर शुरुआती स्तर पर ध्यान न दिए जाने के कारण यह घोटाला लंबे समय तक चलता रहा। • भौगोलिक सीमा का फायदा: आरोपियों ने मध्य प्रदेश में खाते खुलवाकर राजस्थान और राज्य के सीमावर्ती इलाकों के एटीएम से रकम निकाली ताकि पुलिस नेटवर्क को चकमा दिया जा सके। सवाल-जवाब 1. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना घोटाला मुख्य रूप से कहां सामने आया? यह घोटाला मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना और रतलाम सहित कई जिलों में सामने आया है। 2. इस फर्जीवाड़े में कुल कितने करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसी का खुलासा हुआ है? इस फर्जीवाड़े में साढ़े 9 करोड़ रुपए की बीमा पॉलिसी लेने का खुलासा हुआ है। 3. इस मामले में अब तक कितनी एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं? एमपी सीआईडी ने इस मामले में अब तक दो एफआईआर दर्ज की हैं। 4. जांच के दायरे में कितने बैंक खाते शामिल हैं? वर्तमान में 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में हैं और उनकी गहन छानबीन की जा रही है। 5. घोटालेबाज क्लेम की रकम कहां से निकालते थे? गिरोह के सदस्य मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों जैसे रतलाम, सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर के एटीएम से पैसे निकालते थे। https://trendkia.com/madhya-pradesh/madhya-pradesh-men-pradhan-mantri-jeevan-jyoti-bima-yojana-ke-nama-para-saade-nau-crore-ki-dhokhadhari-50265 TrendKia — Har trend, sabse pehle.