# मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी, डीजीपी कैलाश मकवाना ने जारी की आचार संहिता

> मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया आचरण नियमावली जारी कर दी है। डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देशानुसार ड्यूटी या वर्दी में रील बनाने, गोपनीय दस्तावेज शेयर करने और ऑनलाइन कमाई करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/madhya-pradesh-men-pulisakarmiyon-ke-soshala-midiya-istemala-para-sakhta-pabndi-dgp-kailash-makwana-ne-jari-ki-achara-snhita-36175 · **Language:** Hindi
**Tags:** मध्य प्रदेश पुलिस, कैलाश मकवाना, सोशल मीडिया गाइडलाइंस, भोपाल, पुलिस आचरण नियम, वर्दी रील बैन

मध्य प्रदेश में पुलिस बल के आचरण, अनुशासन और कार्यसंस्कृति को डिजिटल युग के अनुरूप मर्यादित रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने पूरे विभाग के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर विस्तृत और अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वर्दी पहनकर ऑनलाइन वीडियो या रील बनाने, संवेदनशील सूचनाएं सार्वजनिक करने अथवा डिजिटल मंचों का दुरुपयोग करने की बढ़ती प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह व्यापक आचार संहिता लागू की गई है। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

## वर्दी में रील, अनुचित पहनावे और अशोभनीय सामग्री पर रोक
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी परिपत्र में फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य तमाम सोशल नेटवर्किंग मंचों के संचालन को लेकर सख्त सीमाएं तय की गई हैं। पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया है कि वे कर्तव्य निर्वहन के दौरान अथवा कार्यमुक्ति के उपरांत भी वर्दी पहनकर या किसी अन्य अशोभनीय वेशभूषा में रील, तस्वीर, वीडियो या ऑडियो क्लिप बनाकर किसी भी डिजिटल मंच पर अपलोड न करें। पूर्व में अपलोड की जा चुकी ऐसी अनुचित सामग्रियों को तुरंत इंटरनेट मंचों से हटाने का आदेश दिया गया है। साथ ही यह हिदायत भी दी गई है कि भविष्य में इस व्यवस्था का पूरी कठोरता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

## गोपनीय फाइलों की सुरक्षा और एआई उपकरणों पर पाबंदी
सरकारी कामकाज में प्रयुक्त होने वाले दस्तावेजों की शुचिता और राज्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कार्यालयीन अभिलेखों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। किसी भी सरकारी दस्तावेज को स्कैन करके, उसका स्क्रीनशॉट लेकर अथवा किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी जानकारी साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा जो शासकीय नियमों के अंतर्गत गोपनीयता और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हो। इसके अतिरिक्त संवेदनशील शासकीय फाइलों, अभिलेखों अथवा आंकड़ों को चैटजीपीटी (ChatGPT) और जेमिनी (Gemini) जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) टूल्स पर अपलोड करने की सख्त मनाही की गई है।

## संवेदनशील कार्यस्थलों पर जियो टैगिंग और लोकेशन बंद रखने के आदेश
पुलिस बल के सामरिक और सुरक्षा अभियानों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष बंदोबस्त किए गए हैं। जब भी कोई पुलिसकर्मी किसी संवेदनशील कर्तव्य पर तैनात रहेगा, तो उसे सौंपे गए दायित्व, कार्य की वास्तविक प्रकृति और तैनाती के स्थान से जुड़ा कोई भी विवरण सोशल मीडिया पर उजागर नहीं किया जाएगा। ऐसे संवेदनशील कार्यस्थलों पर इंटरनेट अथवा सोशल मीडिया का उपयोग करते समय मोबाइल फोन में लोकेशन और जियो टैगिंग की प्रणाली को अनिवार्य रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर सामरिक जानकारी के दुरुपयोग की संभावना को खत्म किया जा सके।

## पेड प्रमोशन, अकाउंट मॉनेटाइजेशन और निजी आय पर रोक
विभाग ने वाणिज्यिक गतिविधियों और आर्थिक लेन-देन पर भी पूर्ण विराम लगाया है। शासन के पूर्व अनुमोदन के बिना स्वयं के नाम पर, अपने परिजनों या आश्रितों के नाम पर अथवा किसी छद्म नाम से सोशल प्रोफाइल तैयार कर सोशल मीडिया पर पेड प्रमोशन करना या अकाउंट को मॉनेटाइज कराना पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। शासकीय अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से किसी निजी व्यवसाय, वाणिज्यिक कंपनी, उत्पाद अथवा सेवा का प्रचार-प्रसार करना मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 16 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। दिशा-निर्देशों में आदेशित किया गया है कि यदि किसी पुलिसकर्मी अथवा उसके आश्रितों ने पूर्व में सोशल मीडिया मंचों के जरिए किसी भी प्रकार की आय अर्जित की है, तो परिपत्र जारी होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर उसका पूरा वित्तीय ब्योरा अनिवार्य रूप से विभाग को सौंपना होगा।

## विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा, हथियारों के प्रशिक्षण और अभियानों का प्रसारण वर्जित
वीआईपी और वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा महत्वपूर्ण स्थलों पर तस्वीरें खींचने अथवा सेल्फी लेकर पोस्ट करने पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है, जिससे सुरक्षा तंत्र में किसी भी प्रकार की सेंधमारी का खतरा न बने। इसके साथ ही हथियारों के संचालन, निशानेबाजी (चांदमारी), नियमित ड्रिल, पुलिस दबिश और अन्य किसी भी संवेदनशील कार्रवाई के फोटो या वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट करने अथवा उनका सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा किसी भी जांच अथवा विवेचना के दौरान जब्त किए गए सामान और हथियारों को बिना सीलबंद किए उनके फोटो या वीडियो सरकारी अथवा निजी मंचों पर नहीं डाले जा सकेंगे।

## पीड़ितों और गवाहों के निजता अधिकार की रक्षा
न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों के संरक्षण के तहत किसी भी शिकायत जांच, विवेचना अथवा जनसुनवाई के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, अनावेदक या आरोपी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना अथवा उनका सीधा प्रसारण करना निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना गया है। आवश्यकता पड़ने पर चेहरे को पूरी तरह ब्लर करके और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेकर ही कोई सामग्री जारी की जा सकेगी। किसी भी दुष्कर्म अथवा यौन हिंसा से पीड़ित महिला या बालिका, किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम के दायरे में आने वाले विधि से संघर्षरत बालकों तथा देखरेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों की पहचान से जुड़े फोटो, वीडियो अथवा ब्योरे को उजागर करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

## विभागीय उपलब्धियों और अनुशासन की गरिमा
दिशा-निर्देशों में साफ किया गया है कि पुलिस विभाग द्वारा अर्जित किसी भी सफलता को संपूर्ण पुलिस बल की सामूहिक उपलब्धि के रूप में जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि किसी एक अधिकारी के व्यक्तिगत प्रयासों या प्रचार के रूप में। सोशल मीडिया मंचों पर किसी भी प्रकार के सांकेतिक विरोध, असंतोष या राजनीतिक झुकाव के प्रदर्शन पर भी रोक है। किसी भी संगठन अथवा राजनीतिक दल के प्रतीक चिन्ह या लोगो को अपनी प्रोफाइल पिक्चर अथवा डीपी के रूप में लगाना वर्जित है। इसके अतिरिक्त शासकीय CUG सिम, कार्यालयीन इंटरनेट, वाईफाई, आईपी एड्रेस और आधिकारिक ईमेल पते का उपयोग व्यक्तिगत सोशल मीडिया खाते बनाने में नहीं किया जा सकेगा, न ही व्यक्तिगत मोबाइल पर शासकीय खाते लॉगिन किए जा सकेंगे। पुलिस बल के किसी भी सदस्य को अपनी सेवा संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने की अनुमति नहीं होगी; इसके लिए उन्हें विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष ही अपना पक्ष रखना होगा।

## इसका आप पर असर
मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जारी की गई नई सोशल मीडिया आचार संहिता से पुलिस बल की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों के निजता अधिकारों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **मध्य प्रदेश में:** राज्य भर के सभी पुलिसकर्मियों पर ड्यूटी या वर्दी में वीडियो और रील बनाने तथा ऑनलाइन प्रचार करने पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। ऐसा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी तथा पूर्व में कमाई गई राशि का ब्योरा 30 दिनों में देना अनिवार्य है।
- **नागरिकों की निजता:** थानों, जनसुनवाई और जांच के दौरान फरियादियों, गवाहों तथा पीड़ितों की तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी गई है। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल आम लोगों की गोपनीयता और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
- **आधिकारिक संसाधनों का उपयोग:** पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया खातों के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट अथवा आधिकारिक ईमेल का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इससे संवेदनशील शासकीय डेटा और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था अधिक सुरक्षित रहेगी।
- **विभागीय अनुशासन:** पुलिसकर्मी अपनी सेवा संबंधी समस्याओं या शिकायतों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे। सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए तय विभागीय प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों का ही सहारा लेना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पुलिस विभाग की गरिमा, संवेदनशील अभियानों की सुरक्षा और आम नागरिकों की निजता को बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के अनुचित व्यवहार और प्रचार के मामलों ने विभाग के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी कर दी थीं।

- **वर्दी की गरिमा में गिरावट:** पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर रील्स बनाने और आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने से विभाग की छवि धूमिल हो रही थी। इसे रोकने के लिए डीजीपी ने सेवा आचरण नियमावली के तहत स्पष्ट निर्देश लागू किए हैं।
- **संवेदनशील सूचनाओं का प्रकटीकरण:** वीआईपी सुरक्षा, हथियारों के प्रशिक्षण और छापेमारी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने से सुरक्षा जोखिम बढ़ रहा था। अभियानों और रणनीतियों की गोपनीयता सुरक्षित रखने के लिए यह रोक जरूरी हो गई थी।
- **वाणिज्यिक लाभ और अनाधिकृत प्रचार:** कुछ कर्मियों द्वारा फॉलोअर्स बढ़ाने और पेड प्रमोशन के जरिए आर्थिक लाभ अर्जित करने की प्रवृत्तियां सामने आ रही थीं। यह सिविल सेवा नियमों के विपरीत होने के कारण इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. मध्य प्रदेश पुलिस के लिए सोशल मीडिया निर्देश किसने जारी किए हैं?
मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

### 2. क्या पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर रील या वीडियो बना सकते हैं?
नहीं, ड्यूटी के दौरान अथवा इसके बाद भी वर्दी या अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो या वीडियो पोस्ट करने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

### 3. क्या सरकारी फाइलों को चैटजीपीटी या जेमिनी जैसे एआई टूल्स पर अपलोड किया जा सकता है?
नहीं, गोपनीय और संवेदनशील शासकीय दस्तावेजों को किसी भी एआई टूल अथवा सोशल मीडिया पर अपलोड करना पूरी तरह वर्जित है।

### 4. सोशल मीडिया से हुई आय का विवरण कब तक जमा करना होगा?
यदि किसी पुलिसकर्मी या उसके आश्रितों ने सोशल मीडिया से आय अर्जित की है, तो 30 दिनों के भीतर उसका पूरा ब्योरा विभाग को देना अनिवार्य है।

### 5. क्या पुलिसकर्मी व्यक्तिगत सोशल मीडिया के लिए सरकारी सीयूजी सिम का उपयोग कर सकते हैं?
नहीं, व्यक्तिगत खातों के लिए सरकारी CUG सिम, कार्यालयीन इंटरनेट, वाईफाई अथवा शासकीय ईमेल के इस्तेमाल पर रोक है।

### 6. क्या जांच और छापेमारी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जा सकती हैं?
नहीं, हथियारों के प्रशिक्षण, छापेमारी, दबिश और जब्त सामग्री के फोटो या वीडियो सार्वजनिक मंचों पर पोस्ट करना प्रतिबंधित है।

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