मध्य पूर्व संघर्ष में 45 अमेरिकी रीपर ड्रोन गिरने के बाद भारत के 25000 करोड़ रुपये के सौदे पर उठे सवाल मध्य पूर्व के संघर्ष में अमेरिकी रीपर ड्रोन्स के भारी नुकसान के बाद भारत के 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने की योजना पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर और सीमाओं पर निगरानी के लिए यह प्रणाली अब भी बेहद उपयोगी है। पश्चिम एशिया में हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान अमेरिकी लड़ाकू ड्रोन्स की भारी तबाही ने रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। ईरान और उससे जुड़े गुटों द्वारा अमेरिका के कम से कम 45 MQ-9 रीपर ड्रोन्स मार गिराए जाने के बाद इस तकनीक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह नुकसान अमेरिकी ड्रोन बेड़े की कुल क्षमता का लगभग एक तिहाई हिस्सा माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने भारतीय रक्षा गलियारों में भी नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि भारत अपनी तीनों सेनाओं के लिए लगभग 25,000 करोड़ रुपये (करीब 3 अरब डॉलर) की लागत से 31 MQ-9B रीपर ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह महंगा सौदा भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत के लिए प्रभावकारी साबित होगा। मध्य पूर्व के युद्ध में क्यों असफल हुए अमेरिकी ड्रोन पिछले दो दशकों से MQ-9 रीपर अमेरिकी वायुसेना की निगरानी और सटीक निशाना साधने वाली कार्रवाइयों की मुख्य रीढ़ रहा है। अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे क्षेत्रों में जहां दुश्मनों के पास आधुनिक रक्षा प्रणाली नहीं थी, वहां आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों में इस ड्रोन ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। हालांकि ईरान के साथ हुए सीधे टकराव में स्थितियां पूरी तरह बदल गईं। रीपर ड्रोन की गति काफी धीमी होती है और यह एक निश्चित ऊंचाई पर उड़ान भरता है। आधुनिक रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसका धीमा और अनुमानित मार्ग एक आसान लक्ष्य बन जाता है। इसके अतिरिक्त, कई ड्रोन सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सिग्नल जैमिंग के कारण नियंत्रण खोकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा चिंताएं भारतीय सीमाओं पर मौजूद सुरक्षा चुनौतियां मध्य पूर्व के आतंकवाद रोधी अभियानों से बिल्कुल अलग हैं। भारत के मुख्य पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान अत्याधुनिक एयर डिफेंस तथा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणालियों से लैस हैं। चीन के पास HQ-9 और पाकिस्तान के पास HQ-16FE जैसे शक्तिशाली मिसाइल रक्षा तंत्र मौजूद हैं, जो धीमी गति से उड़ने वाले हवाई उपकरणों को बहुत दूर से ही ट्रैक करके नष्ट कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में 25,000 करोड़ रुपये का यह विशाल रक्षा सौदा किसी तीव्र युद्ध की स्थिति में कितना कारगर रहेगा, इसे लेकर संशय पैदा होना लाजिमी है। हथियार क्षमता और तकनीक का संतुलन MQ-9B रीपर केवल एक टोही विमान नहीं है, बल्कि यह घातक हथियारों से लैस होने में सक्षम है। इसमें हेलफायर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम और स्टिंगर मिसाइल जैसे उन्नत हथियार लगाए जा सकते हैं। लेकिन मध्य पूर्व में मिली असफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के सामने यह अपराजेय नहीं है। इसके बावजूद इसे सीधे युद्ध अभियानों में भेजने के बजाय रणनीतिक टोही भूमिकाओं में उपयोग किया जा सकता है। भारतीय सेनाओं के लिए आज भी क्यों अहम है रीपर ड्रोन हालिया नुकसान के बावजूद MQ-9B रीपर को पूरी तरह अनुपयोगी मानना जल्दबाजी होगी। यह ड्रोन दो प्रमुख मोर्चों पर भारतीय सशस्त्र बलों को बेजोड़ बढ़त प्रदान करता है। पहला, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना के लिए यह 40 घंटे से अधिक समय तक लगातार उड़ान भरकर चीनी पनडुब्बियों और युद्धपोतों पर निगरानी रखने का सबसे प्रभावी जरिया है। दूसरा, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बिना किसी सीधे युद्ध की स्थिति के लगातार इंटेलिजेंस, निगरानी और टोही (ISR) डेटा एकत्र करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म साबित होता है। संतुलित रणनीति और भावी दृष्टिकोण मध्य पूर्व के संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि चीन जैसी महाशक्ति के खिलाफ अग्रिम वायु रक्षा घेरे में रीपर ड्रोन कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, शांतिकाल में सीमा सुरक्षा बनाए रखने और व्यापक समुद्री निगरानी के लिए आज भी इसके पास अद्वितीय क्षमताएं मौजूद हैं। भारत को इस रक्षा सौदे का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इन ड्रोन्स का इस्तेमाल अत्यंत सोच समझकर और सही रणनीतिक योजना के तहत करना होगा। इसका आप पर असर भारत में: 25,000 करोड़ रुपये के इस सौदे का सैन्य तैयारियों पर सीधा असर पड़ता है, जिससे देश की समुद्री और सीमा सुरक्षा मजबूत होगी। हिंद महासागर और सीमावर्ती क्षेत्रों में: चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं तथा समुद्री रास्तों पर बेहतर निगरानी से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। सवाल-जवाब 1. भारत कितने MQ-9B रीपर ड्रोन खरीद रहा है? भारत अपनी तीनों सेनाओं के लिए कुल 31 MQ-9B रीपर ड्रोन खरीद रहा है। 2. इस ड्रोन सौदे की कुल लागत कितनी है? इस सौदे की कुल अनुमानित लागत लगभग 25,000 करोड़ रुपये या 3 अरब डॉलर है। 3. मध्य पूर्व के संघर्ष में कितने रीपर ड्रोन गिराए गए? ईरान और उसके समर्थित गुटों ने अमेरिका के कम से कम 45 रीपर ड्रोन गिराए हैं। 4. रीपर ड्रोन की मुख्य सीमाएं क्या हैं? धीमी गति, निश्चित उड़ान ऊंचाई और सैटेलाइट सिग्नल जैमिंग के प्रति संवेदनशीलता इसकी मुख्य कमियां हैं। 5. भारतीय नौसेना के लिए यह ड्रोन क्यों उपयोगी है? 40 घंटे से अधिक की सहनशीलता के कारण यह हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों और जहाजों की निगरानी के लिए बेहद उपयोगी है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/madhya-purva-sngharsha-men-45-us-reaper-drone-girane-ke-bada-india-ke-25000-karora-rupaye-ke-saude-para-uthe-savala-18187 TrendKia — Har trend, sabse pehle.