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  "type": "article",
  "title": "मंडला: जान जोखिम में डालकर 'मौत के कुएं' से पानी ला रहे ग्रामीण",
  "summary": "मध्य प्रदेश के मंडला जिले के चोबा गांव में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर कुओं से पानी निकालने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।",
  "content": "पानी के लिए जान का संघर्ष\n21वीं सदी में भारत की प्रगति के दावों के बीच, मंडला जिले के चोबा गांव से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां के निवासी, जिनमें महिलाएं और युवा शामिल हैं, पीने के कुछ लीटर पानी के लिए हर दिन अपनी जान को खतरे में डाल रहे हैं। उनका दिन सुबह की चाय से शुरू नहीं होता, बल्कि एक अंधेरे और खतरनाक कुएं में उतरकर पानी लाने से होता है। जरा सी चूक का मतलब है सीधा मौत।\n\nरात भर पानी की जद्दोजहद\nचोबा गांव के कोटवार और मुकदम टोला के लोग रात भर सो नहीं पाते, बल्कि पानी के लिए संघर्ष करते हैं। जब बाकी दुनिया सो रही होती है, तब यहां के बुजुर्ग और बच्चे कुएं के किनारे कतार में बैठ जाते हैं। मध्य रात्रि 2 या 3 बजे, बर्तनों की खनखनाहट और पानी के लिए छटपटाने की आवाजें सुनाई देती हैं। ग्रामीण पत्थर के दरारों से रिस रहे थोड़े से पानी का इंतजार करते हैं, जिसे वे छोटे डिब्बों में भरकर अपनी प्यास बुझाते हैं।\n\nसूखे हैंडपंप और प्रशासनिक उपेक्षा\nगांव में पानी की समस्या विकट है। कहने को तो गांव में आधा दर्जन कुएं और हैंडपंप हैं, लेकिन सभी सूखे पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनसुनवाई में अपनी समस्या दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह विडंबना है कि जिले में 'जल जीवन मिशन' के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए हैं। अधिकारी हर बार केवल 'प्रयास जारी हैं' का रटा-रटाया जवाब देते हैं। सवाल यह है कि प्रशासन की इस धीमी गति के बीच, यदि किसी ग्रामीण की जान चली गई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या किसी की मौत का इंतजार कर रहा है?\n\nचोबा गांव की यह हकीकत व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। ग्रामीण उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब उन्हें अपनी जान जोखिम में डाले बिना पीने का साफ पानी उपलब्ध हो सकेगा।\n\nइसका आप पर असर\n• पूरे भारत में: यह रिपोर्ट दिखाती है कि देश के कई हिस्सों में बुनियादी सुविधाएं, जैसे पीने का साफ पानी, आज भी एक बड़ी चुनौती है, जो सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर सवाल उठाती है।\n• मंडला जिले में: चोबा गांव और आसपास के इलाकों के निवासियों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चोबा गांव में पानी की मुख्य समस्या क्या है?\nचोबा गांव में पीने के पानी की भारी कमी है। गांव के सभी कुएं और हैंडपंप सूखे पड़े हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी लाना पड़ता है।\n\n2. ग्रामीण पानी कैसे प्राप्त करते हैं?\nग्रामीण रात के समय खतरनाक और अंधेरे कुओं में उतरकर पानी निकालते हैं। पानी पत्थरों के बीच से रिसकर आता है, जिसे वे छोटे डिब्बों में इकट्ठा करते हैं।\n\n3. क्या इस समस्या के समाधान के लिए कोई सरकारी प्रयास किए गए हैं?\nग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने कई बार जनसुनवाई में अपनी समस्या बताई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 'जल जीवन मिशन' के तहत करोड़ों खर्च होने के बावजूद स्थिति जस की तस है।\n\n4. प्रशासन इस स्थिति के लिए कितना जिम्मेदार है?\nरिपोर्ट प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाती है, क्योंकि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकाला गया है। अधिकारियों का 'प्रयास जारी है' वाला जवाब भी संतोषजनक नहीं है।",
  "url": "https://trendkia.com/madhya-pradesh/mndala-jana-jokhima-men-dalakara-mauta-ke-kuen-se-pani-la-rahe-gramina-1783",
  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-06-19",
  "tags": [
    "मंडला",
    "चोबा गांव",
    "जल संकट",
    "पेयजल समस्या",
    "ग्रामीण जीवन",
    "सरकारी योजना",
    "जल जीवन मिशन"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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