मंडलेश्वर का नया सिविल अस्पताल: 10 करोड़ की इमारत, पर न पानी न बिजली — मोबाइल की टॉर्च में हो रहा मरीजों का इलाज खरगोन जिले के मंडलेश्वर में करीब 10 करोड़ रुपये से बना 50 बेड का सिविल अस्पताल शुरू तो हो गया, लेकिन दो हफ्ते बाद भी पानी, बिजली और जरूरी उपकरणों के अभाव में मरीज परेशान हैं। एक नया अस्पताल आमतौर पर राहत की उम्मीद लेकर आता है, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में हालात इसके उलट हैं। यहां करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बना 50 बेड वाला नया सिविल अस्पताल चालू तो हो गया है, मगर बुनियादी सुविधाओं की कमी ने इसे मुसीबत का घर बना दिया है। विशेषज्ञ डॉक्टर यहां तैनात हैं, पर जांच और इलाज के लिए जरूरी उपकरण व संसाधन अब तक नहीं पहुंचे। नतीजा यह कि मरीजों का इलाज फिलहाल सिर्फ दवाइयों के सहारे चल रहा है। क्यों बना यह अस्पताल मंडलेश्वर में पहले 30 बिस्तरों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चलता था। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के आगे यह केंद्र छोटा साबित हो रहा था और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए 50 से 70 किलोमीटर दूर खरगोन जिला अस्पताल भेजना पड़ता था। इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने इसे सिविल अस्पताल का दर्जा देकर नया भवन बनवाया। 1 जून 2026 को इसका शुभारंभ हुआ और सिर्फ दो दिन बाद यहां इलाज भी शुरू कर दिया गया। दो हफ्ते बाद भी पटरी पर नहीं व्यवस्था अस्पताल शुरू हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं, पर व्यवस्थाएं अब तक ढर्रे पर नहीं आ सकीं। हाल यह है कि भवन पर सिविल अस्पताल का बोर्ड तक नहीं लगा है। इसी वजह से इलाज कराने आने वाले लोग सीधे पुराने भवन में पहुंच जाते हैं और वहां सब खाली मिलने पर पूछताछ करते हुए नए भवन तक का रास्ता तय करते हैं। शिफ्टिंग से पहले मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम न होने की कीमत अब मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों और स्टाफ को भी चुकानी पड़ रही है। पानी की किल्लत: कूलर भी सिर्फ दिखावा पानी की समस्या यहां सबसे गंभीर है। पीने के लिए महज 20-20 लीटर के दो डिब्बे रखे जाते हैं, जो एक-दो घंटे में ही खाली हो जाते हैं। इसके बाद मरीज और उनके परिजन पूरे दिन पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं। शौचालयों में भी पानी नहीं आता, जिससे लोगों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है और पानी भरने के लिए पुराने भवन तक जाना पड़ता है। गर्मी से बचाव के लिए वार्डों में कूलर तो लगा दिए गए हैं, मगर पानी न होने की वजह से वे महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। बिजली गई तो अंधेरे में डूब जाता है अस्पताल मुश्किल सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। शहर की बिजली गुल होते ही पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है। जनरल वार्ड से लेकर डिलीवरी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर तक मरीजों को घंटों गर्मी और अंधेरे में रहना पड़ता है। इमरजेंसी में हालत यह है कि डॉक्टर और स्टाफ मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों को बॉटल चढ़ाने और घावों पर टांके लगाने को मजबूर हैं। अस्पताल में न इनवर्टर है, न कोई दूसरी इमरजेंसी बिजली व्यवस्था। जानकारी के मुताबिक नए अस्पताल को पुराने भवन में लगे सोलर पैनल और जेनरेटर के भरोसे चलाया जा रहा है, लेकिन पुराने सिस्टम की क्षमता नए भवन का पूरा लोड उठाने लायक नहीं है। यही वजह है कि बिजली की दिक्कत बार-बार सामने आ रही है। मरीजों के परिजनों की जुबानी ग्राम ठनगांव से आए पूनम वर्मा अपनी पत्नी को भर्ती कराने पहुंचे हैं। वे बताते हैं कि शौचालय में पानी न आने के कारण पानी साथ लेकर जाना पड़ता है, और कपड़े-बर्तन साफ करने तक की कोई सुविधा नहीं है। पीने के लिए सुबह-शाम एक डिब्बा रखा जाता है, जो थोड़ी ही देर में खत्म हो जाता है। एक अन्य व्यक्ति विकास यादव कहते हैं कि पानी के लिए या तो पुराने अस्पताल जाना पड़ता है या फिर बाजार से खरीदकर लाना पड़ता है। प्रशासन का क्या कहना है इन तमाम शिकायतों पर बीएमओ डॉ अतुल गौड का कहना है कि भवन पर जल्द ही बोर्ड लगवा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल की बोरिंग सूख जाने से पानी की दिक्कत आई थी, लेकिन अब नगर परिषद से नया कनेक्शन लेकर 24 घंटे पानी की लाइन शुरू कर दी गई है और पीने के पानी के लिए वॉटर कूलर भी लगाया गया है। बिजली के मसले पर उन्होंने माना कि पुराने अस्पताल का सोलर सिस्टम नए भवन की जरूरत के मुकाबले छोटा पड़ रहा है, इसलिए शासन को 10 किलोवाट के नए सोलर सिस्टम की मांग भेजी गई है। फिलहाल बैकअप के तौर पर जेनरेटर की लाइन जोड़ दी गई है, ताकि बिजली बंद होने पर सप्लाई बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की मांग भी शासन को भेज दी गई है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/mndaleshvara-ka-naya-sivila-aspatala-10-karora-ki-imarata-para-na-pani-na-bijali-889 TrendKia — Har trend, sabse pehle.