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  "type": "article",
  "title": "प्रशांत में अल नीनो का कहर बढ़ा, भारी तबाही के बाद अब भारत के 43 फीसदी हिस्से में सूखे का संकट",
  "summary": "प्रशांत महासागर में अल नीनो के मजबूत होने से दर्जनों भीषण चक्रवाती तूफानों ने भारी तबाही मचाई है, जबकि इसका विपरीत असर भारत में कम मानसूनी बारिश और सूखे के खतरे के रूप में दिख रहा है।",
  "content": "प्रशांत महासागर की सतह पर तापमान में आ रही लगातार वृद्धि ने दुनिया भर के मौसम तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की इस घटना, जिसे अल नीनो कहा जाता है, ने प्रशांत क्षेत्र में तूफानी गतिविधियों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का आकलन है कि जून के महीने में सक्रिय होने के बाद से यह मौसमी तंत्र लगातार तीव्र होता चला गया है। इसका सीधा नतीजा यह निकला है कि इस पूरे समुद्री क्षेत्र में अब तक कम से कम 17 चक्रवाती तूफान दस्तक दे चुके हैं, जिनमें से कई तूफानों ने प्रचंड हरिकेन और टाइफून का रूप लेकर तटीय देशों में भारी तबाही मचाई है। प्रशांत क्षेत्र में जहां मूसलाधार बारिश और तूफानों की झड़ी लगी है, वहीं भारत में इसका बिल्कुल उल्टा असर देखने को मिल रहा है, जहां मानसूनी हवाओं की गति कमजोर पड़ने से देश के बड़े भूभाग पर सूखे का साया गहराने लगा है।\n\nप्रशांत महासागर में तूफानों का असामान्य दौर और भारी आर्थिक नुकसान\nप्रशांत महासागर के गर्म पानी ने उष्णकटिबंधीय तूफानों के लिए मुफीद माहौल तैयार कर दिया है। इसके असर से उठे शक्तिशाली चक्रवातों ने न केवल भारी जनहानि पहुंचाई है बल्कि बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार को भी गंभीर चोट पहुंचाई है। अप्रैल के महीने से अब तक प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय हुए तूफानों की चपेट में आने से 230 से ज्यादा नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। तेज हवाओं और समुद्री हलचल के चलते अरबों डॉलर का वित्तीय नुकसान हो चुका है। हाल ही में एक नया तूफान जापान के समुद्री तटों के बेहद करीब पहुंच गया, जबकि मौसम विज्ञानियों का अंदेशा है कि आने वाले नवंबर महीने तक इस क्षेत्र में और भी तीव्र तूफान आकार ले सकते हैं।\n\nचीन में भी प्राकृतिक आपदाओं का भीषण रूप देखा गया है, जहां अकेले जुलाई महीने के भीतर लगातार तीन विशाल तूफानों ने भयंकर तबाही दर्ज की। अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ जुलाई के दौरान ही चीन में इन आपदाओं से हुआ प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान लगभग 8.5 अरब डॉलर यानी करीब ₹81409 करोड़ तक पहुंच गया है। तूफानों के कारण पैदा हुए इन हालातों ने केवल स्थानीय जमीन पर ही तबाही नहीं मचाई, बल्कि दुनिया भर की सप्लाई चेन और जहाजरानी उद्योग को भी गहरे संकट में डाल दिया है।\n\nवैश्विक बंदरगाहों पर दबाव और मालवाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित\nलगातार उठ रहे तूफानों के कारण एशिया-प्रशांत समुद्री गलियारों में व्यापारिक परिवहन बुरी तरह बाधित हुआ है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंटेनर शिपिंग कंपनी मार्स्क द्वारा जारी की गई आधिकारिक सलाह में बताया गया है कि बैक-टू-बैक आए गंभीर टाइफूनों की वजह से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई व्यस्त और अहम बंदरगाहों पर जहाजों का भारी जमावड़ा लग गया है। इस भीड़भाड़ के चलते कंटेनर जहाजों के अपने गंतव्य पर तय समय पर पहुंचने की दर में भारी गिरावट आई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई की लागत और आपूर्ति पर पड़ रहा है।\n\nदिलचस्प बात यह है कि प्रशांत महासागर में जारी इस अभूतपूर्व उथल-पुथल के मुकाबले अटलांटिक महासागर में स्थिति बेहद शांत बनी हुई है। मौसम संबंधी ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, अटलांटिक महासागर में तूफान के मौसम की शुरुआत 1941 के बाद की सबसे शांत शुरुआतों में गिनी जा रही है, जो दोनों महासागरों के बीच के वायुमंडलीय अंतर को साफ उजागर करती है।\n\nसमुद्र की गर्मी और अगस्त में 63 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त\nवैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में प्रशांत महासागर में तूफानी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समुद्री तापमान के दो अलग-अलग स्रोत मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें मुख्य कारक अल नीनो ही है, जिसके तहत महासागर की ऊपरी सतह सामान्य औसत से कहीं अधिक गर्म हो जाती है। यह अत्यधिक गर्म समुद्री जल चक्रवातों को भारी ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे हवा की गति और बादलों का घनत्व बहुत तेजी से बढ़ता है। इसी मौसमी तंत्र का नतीजा रहा कि अकेले अगस्त महीने में प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के दायरे में कुल 12 चक्रवाती तूफान विकसित हुए।\n\nहांगकांग के मौसम विज्ञानियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में दर्ज किए गए 12 चक्रवात किसी भी एक महीने में बनने वाले तूफानों की अब तक की सबसे बड़ी तादाद है। वर्ष 1961 के बाद से मौसम के इतिहास में यह आंकड़ा सबसे अधिक है, जो प्रशांत क्षेत्र में चक्रवाती गतिविधियों की असाधारण और विनाशकारी तीव्रता को प्रमाणित करता है। मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में भी यह सक्रियता उतनी ही उग्र रही है, जहां कम से कम 17 प्रणालियां पूर्ण तूफान की ताकत में तब्दील हुईं। इनमें से 6 तूफान सीधे हरिकेन बने, जबकि 4 को प्रमुख हरिकेन की श्रेणी में रखा गया, जहां हवाओं की गति 179 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे भी ज्यादा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की लगातार बनी गर्मी जापान और अन्य एशियाई देशों में बंदरगाहों और जनजीवन पर लंबे समय तक खतरा बनाए रखेगी।\n\nभारतीय मानसून पर अल नीनो की मार और सूखे की आहट\nप्रशांत क्षेत्र में अति-सक्रियता पैदा करने वाले इस अल नीनो तंत्र ने भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम मानसून को बुरी तरह शिथिल कर दिया है। 1 जून 2026 से लेकर 18 सितंबर तक के मानसून सीजन के आधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश में बारिश का वितरण बेहद असंतुलित और चिंताजनक रहा है। पूरे भारत में केवल ऐसे चुनिंदा राज्य हैं जहां बहुत ज्यादा या अत्यधिक बारिश दर्ज हुई है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का महज 2 फीसदी हिस्सा है।\n\nइसके विपरीत, 18 राज्य ऐसे हैं जो देश के 55 फीसदी क्षेत्रफल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां बारिश सामान्य के दायरे में रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति देश के उन 16 राज्यों में बनी हुई है जो मानसूनी बारिश की गंभीर कमी और अत्यधिक सूखे से जूझ रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत का 43 फीसदी भूभाग वर्तमान में गंभीर बारिश की कमी और संभावित सूखे के संकट का सामना कर रहा है। राज्यों के स्तर पर देखें तो बिहार में औसत से तकरीबन 37 फीसदी कम वर्षा हुई है, जबकि राजस्थान में सामान्य से 20 फीसदी से कम बारिश दर्ज की गई है। इस बड़े पैमाने पर हुई बारिश की कमी से आने वाले समय में फसलों की बुवाई, सिंचाई और कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा और गंभीर नकारात्मक असर पड़ना तय माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nमानसून की भारी कमी से देश के लगभग आधे हिस्से में खरीफ फसलों की पैदावार और जल आपूर्ति पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।\n\n• भारत में: देश के 16 राज्यों और 43 फीसदी हिस्से में बारिश की भारी कमी से भूजल स्तर गिरेगा और जलाशयों में पानी का भंडारण घटेगा। इससे आने वाले महीनों में खाद्यान्न उत्पादन घटने के साथ-साथ दालों और अनाजों की कीमतों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।\n• बिहार और राजस्थान में: बिहार में 37 फीसदी और राजस्थान में 20 फीसदी से कम बारिश होने से किसानों की धान व बाजरा जैसी मुख्य फसलों को भारी नुकसान होने का खतरा है। स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए भूजल या महंगे डीजल पंपों पर निर्भर होना पड़ेगा जिससे कृषि लागत में काफी बढ़ोतरी होगी।\n• ग्लोबल ट्रेड और आयात: प्रशांत क्षेत्र में बंदरगाहों पर जहाजों के जाम से एशिया से भारत आने वाले औद्योगिक कच्चे माल और इलेक्ट्रॉनिक्स की डिलीवरी में देरी हो सकती है। आयातित उत्पादों पर लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।\n• आगामी रबी सीजन: सितंबर तक सामान्य से कम मानसूनी बारिश के कारण मिट्टी में नमी की भारी कमी रहेगी। इससे अक्टूबर-नवंबर में गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को पानी की कमी की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nप्रशांत महासागर की सतह पर तापमान का असामान्य रूप से बढ़ना इस वैश्विक मौसमी असंतुलन का मुख्य कारण है। इस तंत्र ने प्रशांत क्षेत्र में तूफानों को ऊर्जा दी और भारतीय मानसूनी हवाओं की सामान्य गति को रोक दिया।\n\n• अल नीनो का प्रभाव: जून के महीने में सक्रिय होने के बाद प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो गया। इस बढ़ी हुई समुद्री गर्मी ने वायुमंडल में नमी और ऊर्जा का ऐसा संचयन किया जिससे उष्णकटिबंधीय तूफानों के बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हुईं।\n• दोहरे उष्मा स्रोत: वैज्ञानिकों के अनुसार महासागर में समुद्र की गर्मी के दो अलग-अलग स्रोतों ने एक साथ मिलकर काम किया। इस संयुक्त प्रभाव ने अगस्त में अकेले 12 चक्रवाती तूफान खड़े कर दिए, जो 1961 के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।\n• भारतीय मानसूनी प्रवाह में बाधा: अल नीनो के कारण प्रशांत बेसिन में वायुमंडलीय दबाव और हवा के संचलन में बड़ा बदलाव आ जाता है। यह तंत्र सामान्यतः हिंद महासागर से भारत की तरफ बढ़ने वाली मानसूनी बादलों की नमी को खींचकर बाधित कर देता है, जिससे देश के 16 राज्यों में बारिश का सूखा दौर शुरू हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में कुल कितने तूफान दर्ज किए गए हैं?\nप्रशांत महासागर क्षेत्र में अब तक कम से कम 17 चक्रवाती तूफान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से कई तूफानों ने भीषण हरिकेन और टाइफून का रूप लिया।\n\n2. प्रशांत क्षेत्र में आए तूफानों से अब तक कितना नुकसान और जनहानि हुई है?\nअप्रैल से अब तक इन तूफानों के कारण 230 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अकेले चीन में जुलाई के दौरान 8.5 अरब डॉलर (लगभग ₹81409 करोड़) का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ।\n\n3. अगस्त के महीने में तूफानों को लेकर क्या नया रिकॉर्ड बना है?\nअगस्त में प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर में कुल 12 चक्रवात बने, जो 1961 के बाद से किसी एक महीने में बनने वाले तूफानों की सर्वाधिक संख्या है।\n\n4. इस मानसूनी सीजन में भारत के कितने हिस्से पर सूखे का संकट मंडरा रहा है?\n1 जून 2026 से 18 सितंबर तक देश के 16 राज्यों में बारिश की भारी कमी रही है, जिससे भारत का 43 प्रतिशत भूभाग सूखे के संकट से जूझ रहा है।\n\n5. बिहार और राजस्थान में बारिश के आंकड़े क्या रहे हैं?\nमौजूदा मानसून में बिहार में सामान्य से लगभग 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि राजस्थान में सामान्य के मुकाबले 20 प्रतिशत से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।\n\n6. प्रशांत के मुकाबले अटलांटिक महासागर में तूफानों की स्थिति कैसी रही है?\nप्रशांत महासागर की तीव्र तूफानी गतिविधियों के विपरीत, अटलांटिक महासागर में इस वर्ष 1941 के बाद से सबसे शांत शुरुआत वाला तूफानी मौसम देखा गया है।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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