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  "title": "भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में एल नीनो के मजबूत होने से भारत में बढ़ा सूखे का खतरा",
  "summary": "भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो के तेजी से मजबूत होने के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश प्रभावित हो रही है। मौसम एजेंसी स्काइमेट ने कुल बारिश का अनुमान घटाकर सामान्य का 85 प्रतिशत कर दिया है, जिससे देश में सूखे की संभावना 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है।",
  "content": "भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो के दोबारा सक्रिय और मजबूत होने से भारतीय उपमहाद्वीप पर मॉनसून का संकट गहराने लगा है। जुलाई और अगस्त के दौरान मॉनसून की बारिश से मिली अस्थायी राहत के बाद अब इस जलवायु पैटर्न के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में सूखे और कम बारिश की स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। मौसमी गतिविधियों में आ रहे इस बदलाव के कारण कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा है।\n\nदक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पूर्वानुमान में भारी कटौती\nनिजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट वेदर ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश को लेकर अपने आंकड़े जारी किए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक इस पूरे मॉनसून सीजन में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत की केवल 85 प्रतिशत ही रहने की संभावना जताई गई है। अगस्त का आधा महीना और पूरा सितंबर बाकी रहते हुए एल नीनो के बढ़ते असर के चलते देश में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।\n\nइससे पहले अप्रैल महीने में जारी किए गए शुरुआती अनुमान में स्काइमेट ने चार महीनों के पूरे मॉनसूनी सीजन के दौरान औसत बारिश 94 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। हालांकि हालिया वैश्विक समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। एल नीनो की वापसी और उसके लगातार ताकतवर होने से बारिश के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।\n\nअगस्त और सितंबर में बारिश की भारी कमी का अंदेशा\nस्काइमेट के हालिया आकलन के अनुसार अगस्त का महीना सामान्य औसत से लगभग 16 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त होने का अनुमान है। इसके अलावा सितंबर महीने में भी स्थिति में सुधार की उम्मीद बेहद कम है। मजबूत होते एल नीनो और हिंद महासागर डिपोल के कमजोर पड़ने के कारण सितंबर में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इन दोनों मौसमी कारकों के एक साथ प्रभावी होने से देश के विस्तृत क्षेत्रों में पानी की किल्लत और सूखे की नौबत आ सकती है।\n\nमौसम विभाग के पिछले अनुमान और मौजूदा मैदानी आंकड़े\nसरकारी मौसम एजेंसी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल अप्रैल में मॉनसून बारिश सामान्य औसत का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। बाद में जून महीने में इस आंकड़े को संशोधित कर 90 प्रतिशत कर दिया गया था और मॉनसून में कमी रहने की संभावना 60 प्रतिशत बताई गई थी। जून के बाद से भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से पूरे सीजन का कोई नया संशोधित पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है।\n\nमैदानी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 17 अगस्त के दौरान पूरे देश में कुल 518.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि के दौरान 596.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस प्रकार देश भर में औसतन 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अगस्त महीने के दौरान यह कमी 11 से 13 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि जून के अंत में यह बारिश घाटा 40 प्रतिशत तक पहुंच गया था जो जुलाई में अच्छी बारिश के कारण सुधरकर 13 प्रतिशत पर आ गया था। परंतु अगस्त के दूसरे पखवाड़े में मॉनसून एक बार फिर सुस्त पड़ गया है। हालांकि कुछ नदियों में जलस्तर बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात बने हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्र वर्षा की कमी से प्रभावित हैं।\n\nसमुद्री धाराएं और एल नीनो का बढ़ता प्रभाव\nस्काइमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने बताया कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में वायुमंडलीय और समुद्री धाराओं के बीच मजबूत जुड़ाव देखा जा रहा है। यही वजह है कि एक ताकतवर एल नीनो के विकसित होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उनके अनुसार यह समुद्री मौसमी तंत्र सितंबर की शुरुआत में मजबूत श्रेणी से बढ़कर बेहद मजबूत श्रेणी में प्रवेश कर सकता है जिससे आने वाले दिनों में देश के मौसम पर इसका विपरीत असर और तीखा हो जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: कम बारिश और सूखे की बढ़ती संभावना से धान, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।\n\nग्रामीण एवं कृषि क्षेत्रों में: सिंचाई के लिए भूजल और जलाशयों के जलस्तर में गिरावट आने से किसानों की लागत बढ़ेगी और रबी सीजन की बुआई के लिए पानी का संकट पैदा हो सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. स्काइमेट ने मॉनसून की बारिश का नया अनुमान क्या जताया है?\nस्काइमेट ने पूरे मॉनसून सीजन में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत का केवल 85 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।\n\n2. भारत में सूखे की कितनी संभावना जताई गई है?\nएल नीनो के मजबूत होने के चलते स्काइमेट ने देश के कई हिस्सों में सूखे की संभावना 70 प्रतिशत तक जताई है।\n\n3. 1 जून से 17 अगस्त तक देश में कितनी बारिश हुई है?\n1 जून से 17 अगस्त तक देश में 518.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत 596.2 मिलीमीटर से 13 प्रतिशत कम है।\n\n4. अगस्त और सितंबर के महीनों में बारिश की कितनी कमी हो सकती है?\nस्काइमेट के अनुसार अगस्त में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम और सितंबर में सामान्य से 20 प्रतिशत कम रहने की आशंका है।\n\n5. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का आखिरी अनुमान क्या था?\nआईएमडी ने जून में पूरे सीजन की बारिश सामान्य का 90 प्रतिशत रहने और मॉनसून में 60 प्रतिशत कमी की संभावना जताई थी।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-18",
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    "मॉनसून 2024",
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