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  "type": "article",
  "title": "पेपर लीक की मार: NEET री-एग्जाम में गंवाए 70 अंक, बालाघाट के होनहार छात्र योग का एम्स में पढ़ने का सपना टूटा",
  "summary": "नीट परीक्षा के पर्चा लीक और दोबारा हुई परीक्षा के कारण मध्य प्रदेश के बालाघाट निवासी योग राहंगडाले का स्कोर 690 से घटकर 610 रह गया, जिससे उनका एम्स में प्रवेश पाने का सपना टूट गया है।",
  "content": "देश की शिक्षा व्यवस्था में परीक्षाओं की शुचिता एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। जब भी किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में धांधली की खबरें आती हैं, तो उसका असर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लाखों परिवारों के सपने बिखर जाते हैं। हाल ही में NEET परीक्षा के पर्चा लीक मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राजनीतिक मोर्चे पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कॉकरोच जनता पार्टी के लगातार 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद केंद्र सरकार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने इस घटनाक्रम के बाद घोषणा की कि सरकार ने उनकी सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया और सभी से शांतिपूर्वक अपने घरों को लौटने की अपील की।\n\nपर्चा लीक का गहरा दर्द और छात्रों का मानसिक दबाव\nइस पूरे विवाद की जड़ में NEET परीक्षा का पर्चा लीक होना था, जिसने न केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए बल्कि कई मासूम जिंदगियों को भी निगल लिया। बताया जा रहा है कि इस बड़ी गड़बड़ी के कारण मानसिक तनाव में आकर कथित तौर पर 21 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। यह आंकड़ा बेहद डरावना है और सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है। हालांकि, जो छात्र इस विकट परिस्थिति से जूझते हुए आगे बढ़ रहे हैं, उनके जीवन पर भी इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। इस प्रशासनिक विफलता की वजह से छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया। ऐसे ही एक होनहार छात्र की आपबीती इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक प्रशासनिक चूक किसी छात्र की काबिलियत पर भारी पड़ जाती है। इस प्रतिभावान छात्र को परीक्षा के पहले प्रयास में जहां शानदार अंक मिले थे, वहीं दोबारा हुई परीक्षा में अंकों में भारी गिरावट आई, जिससे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने का उनका सपना फिलहाल अधूरा रह गया।\n\nबालाघाट के योग राहंगडाले: तीन राज्यों के टॉपर की कहानी\nयह कहानी मध्य प्रदेश के बालाघाट के रहने वाले योग राहंगडाले की है। योग के पिता पेशे से एक शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने बेटे को हमेशा मेहनत और ईमानदारी की राह पर चलना सिखाया। योग बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के रहे हैं और पढ़ाई में उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने कक्षा पांचवीं तक की प्रारंभिक शिक्षा बालाघाट के केंद्रीय विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उनका चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ, जहां उन्होंने अपनी कक्षा 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। योग की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कक्षा 12वीं की परीक्षा में उन्होंने 98 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। गौरतलब है कि नवोदय विद्यालय संगठन का क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में स्थित है, जिसके अंतर्गत ये तीनों ही राज्य आते हैं और योग इन सभी क्षेत्रों में अव्वल रहे थे।\n\nकरियर का चुनाव: जेईई एडवांस की सफलता को छोड़ चुना मेडिकल क्षेत्र\nअपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद योग अपनी तैयारियों को नया आयाम देने के लिए इंदौर आ गए। यहां उन्होंने एक निजी कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया और दिन-रात एक करके पढ़ाई शुरू कर दी। योग न केवल जीव विज्ञान में माहिर थे, बल्कि गणित और विज्ञान के अन्य विषयों पर भी उनकी मजबूत पकड़ थी। यही वजह थी कि उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और शानदार अंक अर्जित किए। उनके पास इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक उज्जवल करियर बनाने का बेहतरीन विकल्प मौजूद था, जहां वे देश के किसी भी बड़े संस्थान में प्रवेश ले सकते थे। लेकिन योग के दिल में कुछ और ही था। उनकी असली दिलचस्पी हमेशा से मेडिकल क्षेत्र में थी और वे डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते थे। इसी दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने जेईई की सफलता को पीछे छोड़ते हुए पूरी तरह से NEET की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। वे हर दिन बिना थके 12 घंटे से भी अधिक समय तक लगातार पढ़ाई करते थे।\n\nपहले प्रयास में शानदार 690 अंक और फिर पेपर लीक का सदमा\nयोग को अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था। वे इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे कि वे न केवल NEET की परीक्षा पास करेंगे, बल्कि देश के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेज यानी एम्स में भी अपनी जगह पक्की करेंगे। इसी आत्मविश्वास के साथ वे 3 मई को परीक्षा हॉल में दाखिल हुए। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब उन्होंने अपने उत्तरों का मिलान किया, तो उन्हें 690 अंक प्राप्त हो रहे थे। यह एक ऐसा स्कोर था जो एम्स में दाखिले की पूरी गारंटी देता था। इस शानदार प्रदर्शन के बाद योग और उनका परिवार साल भर के कड़े तनाव और दबाव से मुक्त हो चुका था। उनके घर में खुशी का माहौल था और वे अपने नए सफर की तैयारी कर रहे थे। लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी। परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद जब नीट का पेपर लीक होने की खबरें देश भर में फैल गईं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।\n\nपरिवार का संबल और दोबारा परीक्षा की चुनौती\nजब पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि हुई और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला आया, तो योग मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे। एक साल की कड़ी तपस्या के बाद दोबारा उसी मानसिक तनाव से गुजरना किसी भी छात्र के लिए बेहद पीड़ादायक होता है। ऐसी कठिन परिस्थिति में उनके परिवार ने हिम्मत दिखाई। उनके माता-पिता और शिक्षकों ने उन्हें संभाला, ढांढस बंधाया और एक बार फिर से मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया। योग ने भी हार नहीं मानी और अपने आंसू पोंछकर फिर से किताबों की दुनिया में लौट आए। वे अगले एक महीने तक फिर से उसी कठोर दिनचर्या के साथ पढ़ाई में जुट गए। आखिरकार 20 जून को री-नीट की परीक्षा आयोजित की गई। इस दोबारा आयोजित हुई परीक्षा में योग ने भाग लिया, लेकिन इस बार परिणाम उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। उन्हें इस परीक्षा में 610 अंक प्राप्त हुए, जो उनके पहले प्रयास से पूरे 70 अंक कम थे।\n\nअंकों में गिरावट और एम्स का सपना टूटने का दर्द\nयोग का मानना है कि एक ही परीक्षा को बहुत कम अंतराल में दोबारा देना मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। जब आप एक बार अपनी चरम तैयारी के साथ परीक्षा दे चुके होते हैं, तो दोबारा उसी स्तर की एकाग्रता हासिल करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, दोबारा हुई परीक्षा का कठिनाई स्तर भी काफी अधिक था, जिसके कारण उनके अंकों में यह भारी गिरावट आई। योग अब इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि 610 अंकों के साथ उन्हें देश के किसी एम्स संस्थान में दाखिला मिलना लगभग असंभव है। उनका कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता निश्चित रूप से एम्स थी, लेकिन अब वे इस बात से विचलित नहीं हैं। उनका मानना है कि मेडिकल की पढ़ाई में कॉलेज से ज्यादा छात्र की खुद की मेहनत मायने रखती है। योग अब पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे की योजना बना रहे हैं। वे अब अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई एम्स से करने का लक्ष्य बना रहे हैं और इसके लिए वे और भी अधिक मेहनत करने के लिए तैयार हैं। उनका अंतिम सपना एक प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट बनने का है। वहीं दूसरी ओर, उनके घर में उनकी मां इस पूरे घटनाक्रम से बेहद दुखी हैं। उनका कहना है कि अगर व्यवस्था की खामियों के कारण पेपर लीक न हुआ होता, तो उनका बेटा आज निश्चित रूप से एम्स में पढ़ाई कर रहा होता। यह कहानी हमारे परीक्षा तंत्र की विफलता और उसके कारण देश के होनहार युवाओं को भुगतने पड़ने वाले नुकसान का एक जीवंत उदाहरण है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह घटना राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुदृढ़ता और पेपर लीक के कारण छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव के गंभीर मुद्दों को रेखांकित करती है।\n• बालाघाट में: बालाघाट जैसे जिलों की स्थानीय प्रतिभाएं सिस्टम की विफलता के कारण सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, जो राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कड़ी मेहनत का फल पाने से वंचित रह जाती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?\nकॉकरोच जनता पार्टी के 36 दिनों के लंबे विरोध प्रदर्शन और आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था।\n\n2. योग राहंगडाले के नीट परीक्षाओं में कितने-कितने अंक आए?\nयोग को पहले प्रयास (3 मई की परीक्षा) में 690 अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन पेपर लीक के बाद 20 जून को हुई दोबारा परीक्षा में उन्हें 610 अंक मिले।\n\n3. योग राहंगडाले ने अपनी स्कूली शिक्षा में क्या उपलब्धि हासिल की थी?\nयोग ने कक्षा 12वीं में 98 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे और नवोदय विद्यालय के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में प्रथम स्थान हासिल किया था।\n\n4. री-नीट (Re-NEET) परीक्षा में योग के अंकों में गिरावट क्यों आई?\nबहुत कम समय के भीतर दोबारा कठिन परीक्षा देने के मानसिक दबाव और परीक्षा के उच्च कठिनाई स्तर के कारण उनके अंकों में गिरावट आई।\n\n5. एम्स में प्रवेश न मिल पाने के बाद योग का आगे का क्या प्लान है?\nयोग ने हार नहीं मानी है। वे भविष्य में एक प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई एम्स से पूरी करने का लक्ष्य रख रहे हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• कठोर परिश्रम की आदत: योग ने अपनी तैयारी के दौरान प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक पढ़ाई करने की अटूट प्रतिबद्धता दिखाई।\n• बहुमुखी शैक्षणिक प्रतिभा: उन्होंने न केवल मेडिकल क्षेत्र बल्कि जेईई एडवांस जैसी कठिन इंजीनियरिंग परीक्षा में भी उच्च अंक हासिल कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की।\n• मानसिक दृढ़ता: विपरीत परिस्थितियों और पेपर लीक के बड़े झटके के बाद भी उन्होंने बिना हिम्मत हारे एक महीने में दोबारा परीक्षा की तैयारी की।\n• दीर्घकालिक दृष्टिकोण: स्नातक स्तर पर एम्स न मिल पाने के बावजूद, योग निराश नहीं हैं और उन्होंने भविष्य में एम्स से ही पोस्ट ग्रेजुएशन करने का अपना बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-26",
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