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  "type": "article",
  "title": "रतलाम की बालम ककड़ी और मालवी गराडू को मिला GI टैग, किसानों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान",
  "summary": "रतलाम जिले की दो प्रमुख कृषि उपजों, बालम ककड़ी और रतलामी गराडू, को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिल गया है। अब रतलामी गराडू को 'मालवी गराडू' के नाम से जाना जाएगा और इन उत्पादों के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम मिलने का रास्ता खुल गया है।",
  "content": "रतलाम के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय\nरतलाम जिले के किसानों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं। जिले की दो बेहद खास कृषि उपजों, बालम ककड़ी और रतलामी गराडू, को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग मिल गया है। इसके साथ ही रतलामी गराडू का नाम अब बदलकर 'मालवी गराडू' किया जाएगा। उद्यानिकी विभाग की लगातार कोशिशों और मेहनत का यह सुखद नतीजा है। यह वही जिला है जिसकी मशहूर 'रियावन लहसुन' को पहले ही GI टैग मिल चुका है। अब इन दो नए उत्पादों के जुड़ने के बाद रतलाम की कृषि विरासत वैश्विक मंच पर और मजबूती से खड़ी हो गई है।\n\nखेती का दायरा और किसानों को होने वाला सीधा फायदा\nरतलाम में इन दोनों फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में बालम ककड़ी करीब 100 हेक्टेयर जमीन पर उगाई जा रही है, जबकि गराडू की खेती लगभग 120 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है। GI टैग मिलने के बाद इन फसलों से जुड़े बड़ी संख्या में किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा। उनके उत्पाद को अब देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर कीमत और पहचान मिल सकेगी।\n\nसैलाना की केसरिया बालम ककड़ी: रंग भी अनोखा, स्वाद भी निराला\nरतलाम के सैलाना इलाके में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी की चर्चा पूरे देश में है। यह ककड़ी सिर्फ अपने रसीले और ताज़गी भरे स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने बेहद आकर्षक रंग के लिए भी जानी जाती है। यह पीले, हरे और केसरिया रंग में आती है और यही अनोखी पहचान इसे बाकी ककड़ियों से एकदम अलग करती है। इसी विशेषता की वजह से इसे 'केसरिया बालम ककड़ी' कहा जाता है।\n\nमालवी गराडू: बाहर से कुरकुरा, अंदर से मुलायम और सेहत का खजाना\nमालवी गराडू मालवा के खाने की पहचान का एक अहम हिस्सा है। इसे तलने के बाद जो बनावट बनती है, वह इसकी सबसे बड़ी खासियत है, बाहर से एकदम कुरकुरा और अंदर से पूरी तरह मुलायम। लेकिन यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं है, सेहत के लिहाज से भी यह जड़ वाली सब्जी बेहद फायदेमंद मानी जाती है।\n\n• यह विटामिन, खनिज और फाइबर का भरपूर स्रोत है।\n• इसमें पाए जाने वाले खास तत्व दिमाग की कार्यक्षमता को सुधारने और विकसित करने में मदद करते हैं।\n• इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।\n• शुगर यानी मधुमेह को काबू में रखने में भी इसे फायदेमंद माना जाता है।\n\nGI टैग से मिलेगी शुद्धता की गारंटी और वैश्विक नक्शे पर उभरेगा रतलाम\nGI टैग मिलना महज एक कागजी मान्यता नहीं है। इससे इन उत्पादों की शुद्धता और उनकी खास भौगोलिक विशेषता की आधिकारिक गारंटी मिल जाती है। देश हो या विदेश, कोई भी खरीदार अब यह भरोसे के साथ जान सकेगा कि वह असली रतलाम की उपज खरीद रहा है। इससे रतलाम का नाम भारत और दुनिया के कृषि मानचित्र पर और पुख्ता तरीके से दर्ज हो जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: GI टैग मिलने से बालम ककड़ी और मालवी गराडू को देश-विदेश के बाजारों में बेहतर कीमत और पहचान मिलेगी, जिससे इन्हें उगाने वाले किसानों की आमदनी बढ़ सकती है।\n• रतलाम में: जिले के वे किसान जो 100 हेक्टेयर में बालम ककड़ी और 120 हेक्टेयर में गराडू की खेती करते हैं, उनके उत्पाद की मांग और दाम दोनों बढ़ने की उम्मीद है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बालम ककड़ी और गराडू को GI टैग किसके प्रयासों से मिला?\nउद्यानिकी विभाग की लगातार कोशिशों और पहल की वजह से इन दोनों उत्पादों को GI टैग मिला है।\n\n2. रतलामी गराडू का नया आधिकारिक नाम क्या होगा?\nGI टैग मिलने के बाद रतलामी गराडू को अब 'मालवी गराडू' के नाम से जाना जाएगा।\n\n3. रतलाम में बालम ककड़ी और गराडू की खेती कितने हेक्टेयर में होती है?\nबालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर में और गराडू करीब 120 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है।\n\n4. बालम ककड़ी को 'केसरिया बालम ककड़ी' क्यों कहते हैं?\nइस ककड़ी का रंग पीला, हरा और केसरिया होता है, इसी विशेष रंग की वजह से इसे यह नाम दिया गया है।\n\n5. मालवी गराडू सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है?\nयह विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर है, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और यह मधुमेह को नियंत्रित रखने में भी सहायक माना जाता है।\n\n6. इससे पहले रतलाम के किस उत्पाद को GI टैग मिल चुका है?\nरतलाम की प्रसिद्ध 'रियावन लहसुन' को पहले ही GI टैग मिल चुका है।\n\n7. GI टैग मिलने से किसानों को क्या फायदा होगा?\nउनकी उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर दाम और पहचान मिलेगी।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-06-21",
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    "बालम ककड़ी",
    "मालवी गराडू",
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    "रतलाम कृषि",
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    "मालवा उत्पाद"
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