# सलकनपुर देवी लोक में 97 करोड़ का भ्रष्टाचार? पहली बारिश में टपकी छतें, 80 प्रतिशत पौधे सूखे

> मध्य प्रदेश के सलकनपुर में महाकाल लोक की तर्ज पर 97 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे देवी लोक की गुणवत्ता पहली ही बारिश में उजागर हो गई है, जहां पिलरों से पानी रिसने और भारी जलभराव की समस्या सामने आई है।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/salkanpur-devi-lok-men-97-karora-ka-bhrashtachara-pahali-barisha-men-tapaki-chhaten-80-pratishata-paudhe-sukhe-9325 · **Language:** Hindi
**Tags:** सलकनपुर देवी लोक, मध्य प्रदेश न्यूज़, महाकाल लोक तर्ज, निर्माण में लापरवाही, सलकनपुर मंदिर

मध्य प्रदेश के आस्था के बड़े केंद्र सलकनपुर देवी धाम को एक भव्य आध्यात्मिक कॉरिडोर में बदलने का सपना पहली ही मानसूनी बारिश में बहता नजर आ रहा है। उज्जैन के प्रतिष्ठित महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जा रहे 'देवी लोक' प्रोजेक्ट को विश्वस्तरीय बनाने के लिए लगभग 97 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया गया था। लेकिन, एक पवित्र और सुसज्जित धार्मिक स्थल के बजाय, यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत अब टपकती छतों, दीवारों की दरारों और जगह-जगह भरे हुए बारिश के पानी से हो रहा है। करोड़ों रुपये के विशाल निवेश और जमीनी स्तर पर जर्जर होते निर्माण के बीच का यह भारी अंतर, सीधे तौर पर निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली, नैतिकता और गुणवत्ता नियंत्रण पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

## 64 योगिनी मंदिरों के निर्माण में बड़ी खामियां

इस पूरी परियोजना के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कुल बजट में से करीब 90.35 करोड़ रुपये की विशाल राशि सिर्फ परिसर के सिविल निर्माण कार्यों के लिए आवंटित की गई थी। इस भव्य वास्तुकला के मुख्य आकर्षण के रूप में 64 योगिनी मंदिरों का निर्माण किया गया है। लेकिन बेहद हैरानी की बात यह है कि बारिश की पहली ही बौछार ने इन स्ट्रक्चर्स की पोल खोल दी है। इन मंदिरों के पिलरों के किनारों से साफ तौर पर पानी रिसता हुआ नजर आ रहा है। अभी यह परियोजना पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई है और इसके ढांचे का यह हाल देखकर श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश पनप रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े बजट के बाद भी काम की गुणवत्ता इतनी खराब कैसे हो सकती है, जिससे भविष्य में बड़े हादसों का डर बना हुआ है।

## हरियाली के नाम पर दिखावा, सूख गए महंगे पौधे

कंक्रीट के निर्माण के अलावा, इस महात्वाकांक्षी परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी बहुत जोर दिया गया था। परिसर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के उद्देश्य से यहां 444 पौधे लगाए गए थे, जिनकी सुरक्षा के लिए विशेष ट्री-गार्ड भी लगाए गए। बताया गया है कि हर एक पौधे और उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 1,800 रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन, रखरखाव और नियमित पानी के घोर अभाव में इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पौधे पूरी तरह से सूख कर नष्ट हो चुके हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण के दावों की हवा निकालता है, बल्कि जनता के पैसों की घोर बर्बादी और संबंधित विभाग की लापरवाही को भी साफ तौर पर दर्शाता है।

## मणिदीप में जलभराव से श्रद्धालुओं के फिसलने का खतरा

देवी लोक परिसर के मणिदीप क्षेत्र के हालात भी उतने ही चिंताजनक हैं। यह वह हिस्सा है जहां श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। यहां के पैदल रास्तों को आकर्षक बनाने के लिए महंगे बंसी पहाड़पुर पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, लेवलिंग में हुई भारी चूक और जल निकासी (ड्रेनेज) की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण पहली ही बारिश का पानी इन पत्थरों पर बुरी तरह जमा हो गया है। इस जलभराव की वजह से यहां चलने वाले श्रद्धालुओं के फिसलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अगर ड्रेनेज सिस्टम को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो रोजाना यहां आने वाले हजारों भक्तों के साथ कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

## अधूरी प्रतिमा स्थापना और अव्यवस्था का अंबार

इस पूरी निराशा में एक और बड़ा कारण आदिशक्ति पेडस्टल का अधूरा होना है, जिसे पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र बिंदु माना जा रहा था। इस स्थान पर अब तक देवी प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकी है। निर्माण कार्य देखने वाली एजेंसी ने साफ तौर पर यह आश्वासन दिया था कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रतिमा की स्थापना का काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन अब तक जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है। इसके अलावा, अनुबंध के अनुसार निर्माण पूरा होने के बाद अगले तीन वर्षों तक पूरे परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी भी इसी एजेंसी की है। इसके बावजूद धर्मशाला, मुख्य मार्केट और मेला ग्राउंड जैसे अहम क्षेत्रों में सिर्फ कीचड़, कचरा और घोर अव्यवस्था नजर आ रही है। सुरक्षा के लिए लगाई गईं कई हाईमास्ट लाइटें भी पूरी तरह बंद पड़ी हैं, और कुछ तो हवा में खतरनाक तरीके से झूल रही हैं।

## भक्तों की निराशा और अधिकारियों का आश्वासन

इन बदतर हालातों ने नियमित रूप से दर्शन करने आने वाले भक्तों को बेहद निराश किया है। रायसेन जिले के उदयपुरा से आए एक श्रद्धालु रमेश कुमार धाकड़ ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि वे अक्सर यहां भंडारा आयोजित कराने आते हैं, लेकिन करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद परिसर में न तो पर्याप्त रोशनी है और न ही कोई बेहतर व्यवस्था। इन तमाम शिकायतों के सार्वजनिक होने के बाद, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि उन्हें पिलरों से पानी टपकने और पौधों के सूखने की आधिकारिक जानकारी मिल गई है। उन्होंने लोगों को यह आश्वासन दिया है कि जल्द ही पूरी टीम के साथ स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और जो भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाएगा। फिलहाल, पहली ही बारिश में उजागर हुई इन खामियों ने 97 करोड़ रुपये के इस महाप्रोजेक्ट की ईमानदारी और भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

## इसका आप पर असर
- **पूरे भारत में:** धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर होने वाले करोड़ों के सरकारी प्रोजेक्ट्स में भ्रष्टाचार और खराब निर्माण आम जनता के टैक्स के पैसों की भारी बर्बादी है।
- **मध्य प्रदेश में:** जो श्रद्धालु दर्शन के लिए सलकनपुर मंदिर जा रहे हैं, उन्हें जलभराव और फिसलन वाले रास्तों से विशेष सावधान रहना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सलकनपुर देवी लोक परियोजना की कुल लागत कितनी है?
इस महात्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग 97 करोड़ रुपये है, जिसमें से 90.35 करोड़ रुपये सिविल निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए हैं।

### 2. देवी लोक को किस प्रोजेक्ट की तर्ज पर बनाया जा रहा है?
इसे उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक की तर्ज पर एक बड़े आध्यात्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

### 3. पहली बारिश के बाद परिसर में क्या प्रमुख समस्याएं सामने आई हैं?
बारिश के बाद 64 योगिनी मंदिरों के पिलरों से पानी रिसने लगा है, और मणिदीप क्षेत्र में भारी जलभराव के कारण फिसलने का खतरा पैदा हो गया है।

### 4. परिसर में लगाए गए पौधों का क्या हाल है?
परिसर में 1,800 रुपये प्रति पौधे की लागत से 444 पौधे लगाए गए थे, लेकिन उचित देखभाल न होने के कारण लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं।

### 5. अधिकारियों ने इस लापरवाही पर क्या कहा है?
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती ने कहा है कि जल्द ही स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और सभी कमियों को प्राथमिकता से दूर किया जाएगा।

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