सड़क हादसों में जान बचाने के लिए उज्जैन में शुरू हुआ जन प्रहरी अभियान, मददगारों को मिलेगा नकद इनाम मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान कीमती जान बचाने के लिए 'जन प्रहरी' अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत हाईवे के दुकानदारों और ग्रामीणों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जा रही है, और घायलों की मदद करने वालों को राहवीर योजना के तहत कानूनी सुरक्षा और नकद इनाम मिलेगा। हर साल भारत की सड़कों पर अनगिनत भीषण हादसे होते हैं, जिनमें कई लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है क्योंकि उन्हें समय पर शुरुआती इलाज नहीं मिल पाता। घायल सड़क पर तड़पते रहते हैं और वहां से गुजरने वाले राहगीर अक्सर पुलिस पूछताछ या कोर्ट कचहरी के लंबे चक्करों में फंसने के डर से मदद के लिए आगे नहीं आते। लोगों की इसी पुरानी सोच को बदलने और कीमती जानों को बचाने के मकसद से मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद सकारात्मक और नई पहल की शुरुआत हुई है। इस महत्वपूर्ण मुहिम का नाम ‘जन प्रहरी’ अभियान रखा गया है। इस पूरी योजना का मुख्य लक्ष्य दुर्घटना के तुरंत बाद के उस बेहद अहम समय (गोल्डन ऑवर) का सही इस्तेमाल करना है, जब घटनास्थल पर एंबुलेंस या पुलिस की टीम को पहुंचने में थोड़ा वक्त लगता है। इस दौरान स्थानीय लोग ही फरिश्ता बनकर घायलों को प्राथमिक सहायता दे सकते हैं। इस अभियान के तहत हाईवे के किनारे रहने और काम करने वाले आम लोगों को ही मुख्य जीवन रक्षक के रूप में तैयार किया जा रहा है। अक्सर दुर्घटना के वक्त सबसे पहले मौके पर वही लोग पहुंचते हैं जिनकी वहां छोटी मोटी दुकानें या कामकाज होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने चाय और नाश्ते की गुमटी चलाने वाले छोटे व्यापारियों, पंक्चर बनाने वाले मैकेनिकों, ढाबा या होटल का संचालन करने वालों, पेट्रोल पंप के कर्मचारियों और आसपास के ग्रामीणों को विशेष ट्रेनिंग देने का बीड़ा उठाया है। इन सभी आम नागरिकों को बाकायदा प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) देने के सही तरीके सिखाए जा रहे हैं ताकि वे एंबुलेंस के आने से पहले किसी भी घायल की स्थिति को बिगड़ने से रोक सकें। स्वयंसेवकों का मजबूत नेटवर्क ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार ने इस पूरी योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हाईवे पर होने वाले हादसों में लोगों की त्वरित मदद के लिए एक बहुत ही समर्पित स्वयंसेवी नेटवर्क खड़ा किया गया है। इसमें उज्जैन पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और जिला पंचायत एक साथ मिलकर मोर्चे पर काम कर रहे हैं। ये सभी सरकारी विभाग हाईवे के आसपास रहने वाले लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने और किसी भी दुर्घटना के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली जरूरी बचाव प्रक्रियाओं का कड़ा प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशासन की इस अपील का बड़ा असर हुआ है और अब तक पंद्रह सौ से भी ज्यादा लोग स्वेच्छा से इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं। इन सभी स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाने और उन्हें साधन संपन्न बनाने के लिए मेडिकल किट बांटी जा रही हैं। साथ ही, उन्हें विभिन्न संबंधित विभागों के व्हाट्सएप ग्रुप में भी शामिल किया जा रहा है ताकि आपात स्थिति के समय वे सीधे अधिकारियों से संपर्क साध सकें। मददगारों के लिए राहवीर योजना के फायदे इस पूरी सरकारी कवायद का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू मददगार लोगों के मन से कानूनी पचड़ों का खौफ निकालना है। प्रशासन ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी गंभीर रूप से घायल मरीज को बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत अस्पताल पहुंचाता है, तो पुलिस प्रशासन उससे कोई भी फालतू या परेशान करने वाली पूछताछ नहीं करेगा। ऐसे मददगार नागरिक (गुड समैरिटन) को किसी भी तरह से अदालती कार्यवाही का हिस्सा बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, ऐसे नेक काम करने वालों को मध्य प्रदेश सरकार की ‘राहवीर योजना’ के अंतर्गत पच्चीस हजार रुपये तक की नकद प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा। दूसरी तरफ, घायल व्यक्ति को भी बड़ी आर्थिक राहत देते हुए डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज एकदम मुफ्त मुहैया कराया जाएगा। खतरनाक ब्लैक स्पॉट की पहचान फिलहाल इस जीवन रक्षक योजना को पूरी तरह से जमीन पर उतारने के लिए उज्जैन और इंदौर हाईवे पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार के मुताबिक, पहले चरण के अंतर्गत इस व्यस्त मार्ग पर बीस सबसे खतरनाक जगहों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान की गई है, जहां सबसे ज्यादा और जानलेवा एक्सीडेंट होते हैं। इन चुनिंदा जगहों पर जन प्रहरी अभियान के तहत लोगों को रेस्क्यू करने की कड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है। शुरुआती सफलता मिलने के बाद इस पूरे मॉडल का दायरा बढ़ाया जाएगा और इसे जिले के बाकी सभी राष्ट्रीय राजमार्गों तथा ग्रामीण इलाकों की अंदरूनी सड़कों तक भी फैलाया जाएगा। अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी बड़े हादसे के ठीक बाद का शुरुआती समय पीड़ित की जान बचाने के लिहाज से सबसे क्रिटिकल होता है और उसमें दी गई छोटी सी मदद बड़ा बदलाव ला सकती है। इस शानदार मुहिम के शुरुआती और उत्साहजनक नतीजे भी अब दिखने लगे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आलोक शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते एक वर्ष के दौरान छह आम लोगों ने सड़क हादसों में घायलों की निस्वार्थ मदद करके राहवीर की बेहतरीन भूमिका निभाई है। इन लोगों ने समय पर कदम उठाकर जिंदगियां बचाई हैं। प्रशासन फिलहाल इन सभी मददगारों के साहसिक कार्यों का सत्यापन कर रहा है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, उन्हें राहवीर योजना के नियमों के अनुसार उचित इनाम और सम्मान दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। मुहिम से जुड़ने का आसान तरीका प्रशासन ने समाज के हर जिम्मेदार नागरिक और तबके से इस अभियान में बढ़कर जुड़ने की अपील की है। चाय और नाश्ता बेचने वालों और ढाबा संचालकों के साथ ही पंचायत के सचिव, सरपंच, ग्राम व नगर रक्षा समिति के सदस्य और हाईवे के पास रहने वाले या नियमित तौर पर वहां काम करने वाले सभी लोग इस जनभागीदारी का एक अहम हिस्सा बन सकते हैं। जो भी व्यक्ति राहवीर योजना का लाभ लेना चाहता है या इस जीवन रक्षक मुहिम से सीधे तौर पर जुड़ना चाहता है, वह आधिकारिक वेबसाइट www.jansewaprahari.in पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर सकता है। इसके अलावा किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में तुरंत मदद मांगने के लिए हेल्पलाइन नंबर 108, 112 और 100 जारी किए गए हैं। नागरिक सीधे jansewaprahari@gmail.com पर ईमेल भेजकर भी प्रशासन से संपर्क स्थापित कर सकते हैं और जरूरी जानकारी या सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: देश भर के यात्रियों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है कि दुर्घटना के समय आम लोग कानूनी डर के बिना उनकी मदद के लिए आगे आ सकेंगे। • मध्य प्रदेश में: उज्जैन और इंदौर के बीच सफर करने वाले लोगों को ब्लैक स्पॉट पर त्वरित चिकित्सा सहायता मिलेगी, जिससे आपात स्थिति में जान बचने की संभावना बढ़ जाएगी। सवाल-जवाब 1. जन प्रहरी अभियान क्या है? यह उज्जैन में शुरू की गई एक मुहिम है जिसमें हाईवे के आसपास काम करने वाले लोगों को सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को प्राथमिक चिकित्सा देने की ट्रेनिंग दी जा रही है। 2. राहवीर योजना के तहत कितनी पुरस्कार राशि दी जाती है? सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिक को राहवीर योजना के तहत पच्चीस हजार रुपये तक का नकद इनाम दिया जाता है। 3. क्या पुलिस घायलों की मदद करने वालों से पूछताछ करेगी? नहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों से पुलिस कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं करेगी और उन्हें कोर्ट कचहरी नहीं जाना पड़ेगा। 4. इस अभियान में आम नागरिक कैसे शामिल हो सकते हैं? कोई भी इच्छुक व्यक्ति जन सेवा प्रहरी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकता है और इस जीवन रक्षक मुहिम का हिस्सा बन सकता है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/saraka-hadason-men-jana-bachane-ke-lie-ujjain-men-shuru-hua-jan-prahari-abhiyana-madadagaron-ko-milega-nakada-inama-9427 TrendKia — Har trend, sabse pehle.