सतना में सांप के काटने से बचे आंचल और अनुराग का अस्पताल में कटा केक, डॉक्टरों ने मनाया पुनर्जन्म मध्य प्रदेश के सतना में जहरीले सांप के काटने के बाद कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने वाले दो मासूम बच्चों ने आखिरकार अपनी जान बचा ली। उनके पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने केक काटकर इस नई जिंदगी का भव्य जश्न मनाया। सोमवार को सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में खुशी और भावुकता का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब डॉक्टरों ने दो मासूम बच्चों की नई जिंदगी का भव्य स्वागत किया। एक जहरीले सांप के डसने के कारण जिंदगी और मौत की गंभीर कशमकश में फंसे ग्यारह वर्षीय आंचल और उसके आठ वर्षीय चचेरे भाई अनुराग ने 12 दिनों के लंबे और कठिन इलाज के बाद आखिरकार मौत को हरा दिया। करसरा गांव में आधी रात का खौफ यह खौफनाक घटना रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले करसरा गांव में घटी थी। दोनों छोटे चचेरे भाई-बहन अपने घर के भीतर गहरी नींद में सो रहे थे, तभी एक बेहद जहरीले सांप ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। सांप के खतरनाक जहर ने बच्चों के शरीर में बहुत तेजी से फैलना शुरू कर दिया, जिससे उनकी हालत पल-पल बिगड़ने लगी। खतरे की गंभीरता को भांपते हुए डरे हुए परिजनों ने बिना एक भी पल गंवाए बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया ताकि उन्हें जल्द से जल्द जरूरी इलाज मिल सके। वेंटिलेटर पर गुजरीं अनिश्चित रातें अस्पताल पहुंचने तक दोनों मासूमों की स्थिति बेहद नाजुक और चिंताजनक हो चुकी थी। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने तुरंत कमान संभाली और दोनों बच्चों को फौरन वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट कर दिया। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप द्विवेदी की अगुवाई में एक खास मेडिकल टीम ने इस जटिल मामले की जिम्मेदारी ली। करीब पांच दिनों तक आंचल और अनुराग की सांसें पूरी तरह से जीवन रक्षक मशीनों के सहारे ही चलती रहीं। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात बच्चों की कड़ी निगरानी की और उनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। नई जिंदगी का जश्न और केक कटिंग लगातार की गई इस मेडिकल मेहनत का शानदार असर दिखने लगा और बच्चों के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। पूरे 12 दिनों तक चले सघन और गहन उपचार के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह से खतरे से बाहर आ गए। सोमवार को जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही थी, तब वार्ड का माहौल किसी त्योहार से कम नहीं था। इस भावुक मौके पर डॉ. संजीव प्रजापति के साथ पूरी मेडिकल टीम ने बच्चों से केक कटवाया और उनकी सुरक्षित घर वापसी का जश्न मनाया। डॉक्टरों की टीम ने बच्चों के इस शानदार रिकवरी को एक पुनर्जन्म का नाम दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि परिजनों द्वारा सही समय पर अस्पताल पहुंचना ही दोनों मासूमों की जान बचाने का सबसे बड़ा कारण बना। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना एक महत्वपूर्ण सबक है कि जहरीले जीव के काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत मेडिकल सहायता लेने से ही जान बचाई जा सकती है। • सतना में: स्थानीय निवासियों के लिए जिला अस्पताल की आपातकालीन वेंटिलेटर सुविधाओं का सफल होना एक बड़ा और सकारात्मक संकेत है। सवाल-जवाब 1. सतना में किन बच्चों को सांप ने काटा था? करसरा गांव के रहने वाले 11 वर्षीय आंचल और उसके 8 वर्षीय चचेरे भाई अनुराग को घर में सोते समय सांप ने डस लिया था। 2. बच्चों का इलाज किस अस्पताल में हुआ? बच्चों का इलाज सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में किया गया। 3. बच्चों को कितने दिन वेंटिलेटर पर रखा गया? गंभीर स्थिति के कारण बच्चों को लगभग पांच दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 4. बच्चों के इलाज का नेतृत्व किस डॉक्टर ने किया? वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप द्विवेदी के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने बच्चों का उपचार किया। https://trendkia.com/madhya-pradesh/satna-men-sanpa-ke-katane-se-bache-aanchal-aura-anurag-ka-aspatala-men-kata-keka-doktaron-ne-manaya-punarjanma-9907 TrendKia — Har trend, sabse pehle.