सीधी में बारिश से बचने के लिए पुरानी इमारत में घुसे चार लोग, छत गिरने से दो की दर्दनाक मौत मध्य प्रदेश के सीधी जिले स्थित रामपुर नैकिन न्यायालय परिसर में एक बड़ा हादसा हो गया। यहां बारिश से बचने के लिए एक पुरानी सरकारी इमारत में घुसे चार लोग मलबे में दब गए, जिनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हैं। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सोमवार को एक बेहद खौफनाक और दर्दनाक हादसा हो गया, जब तेज मूसलाधार बारिश से बचने के लिए एक पुरानी और खस्ताहाल इमारत का आसरा लेना चार बेगुनाह लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ। रामपुर नैकिन न्यायालय परिसर के भीतर स्थित एक जर्जर सरकारी इमारत अचानक भरभरा कर मलबे के बड़े ढेर में तब्दील हो गई। इस भयानक हादसे में इमारत के भारी मलबे के नीचे दबकर दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में जीवन और मौत से जूझना पड़ रहा है। बारिश से बचने की कोशिश बनी मौत का कारण सोमवार की दोपहर में मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने काले बादल छा गए और बिजली की तेज गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया। इस भारी बारिश से खुद को भीगने से बचाने के लिए, न्यायालय परिसर के आसपास मौजूद चार लोगों ने पास ही में खड़ी एक पुरानी और जर्जर भवन की तरफ दौड़ लगाई। उनका मकसद सिर्फ बारिश से बचना था, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उस इमारत के अंदर साक्षात मौत उनका इंतजार कर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही वे चारों लोग उस खस्ताहाल ढांचे के अंदर दाखिल हुए, कुछ ही सेकंड के भीतर इमारत की कमजोर दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इससे पहले कि वे स्थिति को समझ पाते या बाहर निकलने की कोई कोशिश कर पाते, चारों लोग कंक्रीट और ईंटों के भारी मलबे के नीचे पूरी तरह से दब गए। चीख-पुकार, दहशत और रेस्क्यू ऑपरेशन इमारत के गिरने की तेज आवाज के साथ ही पूरे न्यायालय परिसर में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और मलबे के नीचे से लोगों की दर्दनाक चीख-पुकार सुनाई देने लगी। यह खौफनाक मंजर देखकर वहां मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और बिना कोई समय गंवाए रामपुर नैकिन थाना पुलिस को इस बड़े हादसे की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम भारी दलबल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस जवानों ने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशन) शुरू किया। काफी कड़ी मशक्कत और जद्दोजहद के बाद, मलबे और भारी पत्थरों को हटाया गया तथा उसमें दबे चारों लोगों को एक-एक करके बाहर निकाला गया। दो की दर्दनाक मौत, घायलों को किया गया रेफर बचाव कार्य के दौरान जब मलबे से चारों को बाहर निकाला गया, तब तक दो लोगों की सांसें हमेशा के लिए टूट चुकी थीं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था। बाकी बचे दो लोगों को बेहद गंभीर और लहूलुहान हालत में मलबे से निकाला गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने बिना कोई देरी किए दोनों घायलों को तुरंत इलाज के लिए पास के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद एक घायल की हालत को बेहद नाजुक और चिंताजनक बताया। गंभीर रूप से घायल उस व्यक्ति को बेहतर और उन्नत इलाज के लिए तुरंत रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने के प्रयास में जुटी है। वहीं, दूसरे घायल शख्स का इलाज स्थानीय अस्पताल में ही डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। बुलडोजर से गिराया गया भवन, मुआवजे का ऐलान इस दर्दनाक घटना की भनक लगते ही सीधी जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) भारी अमले के साथ तुरंत घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे। हादसे की गंभीरता और खतरे को देखते हुए, प्रशासन ने तुरंत एक बुलडोजर मंगवाया और उस जर्जर इमारत के बचे हुए खतरनाक हिस्से को भी पूरी तरह से जमींदोज कर दिया, ताकि आने वाले समय में ऐसा कोई और जानलेवा हादसा न हो। हालात का मुआयना करने और पीड़ितों के परिजनों की स्थिति देखने के बाद, सीधी कलेक्टर ने इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतकों के परिवारों को 20-20 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा, हादसे में घायल हुए दोनों लोगों को भी इलाज और सहायता के लिए 10-10 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। कलेक्टर ने इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के भी सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि हादसे के असली कारणों का पता चल सके। प्रशासन की लापरवाही और मॉनिटरिंग पर उठते गंभीर सवाल यह जानलेवा हादसा सरकारी न्यायालय परिसरों और अन्य कार्यालयों में मौजूद पुरानी, अनुपयोगी और खस्ताहाल इमारतों की देखभाल और मॉनिटरिंग सिस्टम पर कई गंभीर और बड़े सवाल खड़े करता है। अब प्रशासन और जांच समिति को इस बात की बारीकी से जांच करनी होगी कि जब इस सरकारी भवन की हालत इतनी ज्यादा खराब थी, तो फिर इसे सही समय पर गिराया या हटाया क्यों नहीं गया। क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? अगर संबंधित सरकारी विभाग ने समय रहते इस खतरे को भांप लिया होता और जरूरी सुरक्षा कदम उठाए होते, तो आज दो बेगुनाह लोगों की जान नहीं जाती। यह घटना प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि ऐसी पुरानी इमारतों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही आम नागरिकों पर कितनी भारी पड़ सकती है। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि बारिश और तूफान के समय कभी भी पुरानी, जर्जर या लावारिस इमारतों का सहारा नहीं लेना चाहिए, क्योंकि मौसम की मार से ये ढांचे अचानक गिर सकते हैं। • मध्य प्रदेश में: सीधी जिले और राज्य भर के लोगों के लिए, यह हादसा सरकारी परिसरों में बनी खस्ताहाल इमारतों की सुरक्षा और प्रशासन की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े करता है, जिससे आम नागरिकों की जान को सीधा खतरा है। सवाल-जवाब 1. सीधी में इमारत गिरने का हादसा कहां हुआ? यह हादसा सीधी जिले के रामपुर नैकिन न्यायालय परिसर में स्थित एक पुराने और जर्जर सरकारी भवन में हुआ। 2. इमारत गिरने का मुख्य कारण क्या था? इलाके में अचानक आई तेज बारिश और खराब मौसम के कारण सालों से खड़ा यह जर्जर भवन अचानक ढह गया। 3. हादसे के समय लोग उस इमारत में क्यों गए थे? अचानक आई तेज बारिश और बिजली से खुद को भीगने से बचाने के लिए चार लोगों ने उस पुरानी इमारत का सहारा लिया था। 4. घायलों को इलाज के लिए कहां भेजा गया है? एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जबकि दूसरे का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। 5. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए क्या घोषणा की है? सीधी कलेक्टर ने मृतकों के परिवारों को 20-20 हजार रुपये और घायलों को 10-10 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/sidhi-men-barisha-se-bachane-ke-lie-purani-imarata-men-ghuse-chara-loga-chhata-girane-se-do-ki-dardanaka-mauta-9195 TrendKia — Har trend, sabse pehle.