सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 8 जोन बनाकर तैनात होंगे 400 पुलिसकर्मी, ऑटो-रिक्शा पर भी लगी रोक सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में पुलिस ने यातायात व्यवस्था मजबूत करने के लिए शहर को 8 जोन में बांटकर करीब 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना बनाई है, साथ ही हरिफाटक टी पॉइंट से नीलकंठ द्वार तक ऑटो और ई-रिक्शा पर रोक लगाई गई है. धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं और इसका सीधा असर शहर की सड़कों पर दिखने वाला है. शहर में चल रहे विकास कार्यों के साथ अब पुलिस प्रशासन ने यातायात को सुरक्षित और अनुशासित बनाने के लिए बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है. शहर भर में करीब 400 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि रोजाना उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों को जाम और अव्यवस्था से राहत मिल सके. शहर को बांटा गया 8 जोन में अधिकारियों के मुताबिक सिंहस्थ की तैयारियों के तहत 250 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों का बल उपलब्ध कराया गया है, जो पहले से तैनात 150 जवानों के साथ मिलकर पूरे शहर में यातायात संचालन, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे. बेहतर और सुचारु व्यवस्था के लिए पूरे उज्जैन को 8 जोनों में बांटा गया है और हर जोन में पुलिस अधिकारियों व जवानों की अलग से तैनाती की गई है. प्रमुख चौराहों, व्यस्त मार्गों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहेगा, ताकि ट्रैफिक जाम या किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. बाहर से आए पुलिसकर्मियों की खास ट्रेनिंग सिंहस्थ प्रशिक्षण के तहत बाहर से बुलाए गए पुलिसकर्मियों को उज्जैन की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख मार्ग, डायवर्जन प्लान और ट्रैफिक प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है. इसके साथ ही उन्हें भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए जा रहे हैं, जिससे बाहर से आया पुलिस बल भी स्थानीय हालात को समझते हुए तुरंत कमान संभाल सके. हर चौराहे पर सख्ती, सिग्नल तोड़ा तो कार्रवाई तय बढ़ते श्रद्धालुओं और आने वाले सिंहस्थ को देखते हुए पुलिस अब ट्रैफिक नियमों को लेकर और सख्त रुख अपनाने जा रही है. शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा. जहां भी सिग्नल लगे हैं, वहां रेड लाइट पर रुकना और ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही आगे बढ़ना अनिवार्य होगा, और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई भी की जाएगी. महाकाल लोक बनने के बाद रोजाना लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं, जिससे यातायात का दबाव लगातार बढ़ा है और यही चुनौती पुलिस की मौजूदा तैयारियों की सबसे बड़ी वजह है. एएसपी बोले, सड़क निर्माण से बढ़ा दबाव एएसपी आलोक शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. उनके मुताबिक शहर में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसी को देखते हुए हरिफाटक टी पॉइंट से नीलकंठ द्वार और यादव धर्मशाला तक ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया है, ताकि इस व्यस्त हिस्से में जाम की स्थिति न बने. ऑटो-रिक्शा संघ से चर्चा के बाद हुआ फैसला यह प्रतिबंध एकतरफा नहीं थोपा गया है. फैसला लेने से पहले प्रशासन ने ऑटो और ई-रिक्शा संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और उनसे सुझाव लिए. इस बैठक में सभी पक्षों ने शहरवासियों को जाम से राहत दिलाने के मकसद से इस निर्णय का समर्थन किया, जिसके बाद प्रशासन ने इसे लागू करने का रास्ता साफ कर लिया. इसका आप पर असर • भारत में: उज्जैन में अपनाया जा रहा 8 जोन वाला भीड़ प्रबंधन मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य शहरों में बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान ट्रैफिक संभालने के लिए एक उदाहरण बन सकता है. • उज्जैन में: शहर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को अब चौराहों पर सख्त सिग्नल नियम, नई पुलिस तैनाती और हरिफाटक टी पॉइंट से नीलकंठ द्वार व यादव धर्मशाला तक ऑटो-ई-रिक्शा पर रोक का सामना करना पड़ेगा, इसलिए दर्शन के लिए निकलने से पहले रूट प्लान करना बेहतर रहेगा. सवाल-जवाब 1. सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में कितने पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे? शहर भर में करीब 400 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जिसमें 250 नए जवान और पहले से मौजूद 150 जवान शामिल हैं. 2. उज्जैन शहर को यातायात प्रबंधन के लिए कितने हिस्सों में बांटा गया है? पूरे शहर को 8 जोनों में बांटा गया है और हर जोन में अलग से पुलिस अधिकारी व जवान तैनात रहेंगे. 3. बाहर से आए पुलिसकर्मियों को क्या सिखाया जा रहा है? उन्हें उज्जैन की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख मार्ग, डायवर्जन प्लान, ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के व्यावहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं. 4. ऑटो और ई-रिक्शा पर कहां प्रतिबंध लगाया गया है? हरिफाटक टी पॉइंट से नीलकंठ द्वार और यादव धर्मशाला तक ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई गई है. 5. यह फैसला कैसे लिया गया? प्रशासन ने ऑटो और ई-रिक्शा संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सुझाव लिए, जिसके बाद सभी पक्षों की सहमति से यह फैसला लिया गया. 6. उज्जैन में यातायात का दबाव क्यों बढ़ा है? महाकाल लोक बनने के बाद रोजाना लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं और साथ ही शहर में सड़क निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिससे दबाव बढ़ा है. https://trendkia.com/madhya-pradesh/simhastha-se-pahale-ujjain-men-8-jona-banakara-tainata-honge-400-pulisakarmi-to-riksha-para-bhi-lagi-roka-5448 TrendKia — Har trend, sabse pehle.