सिंगरौली के गांवों में भैंस चोरों का आतंक, एक साल में सौ से अधिक मवेशी गायब, रोते हुए किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट सिंगरौली जिले में बीते एक साल में सौ से ज्यादा भैंसें चोरी हो चुकी हैं और अब तक कोई सुराग नहीं मिला, जिससे पीड़ित किसान जनसुनवाई में रो पड़े और प्रशासन से जवाब मांगा। सिंगरौली जिले के गांवों में भैंस चोरों ने पशुपालकों की नींद उड़ा रखी है। पिछले करीब एक साल के भीतर इलाके से सौ से ज्यादा भैंसें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन आज तक चोरों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि किसान रात में सोने से पहले भी बार-बार अपने बाड़ों का चक्कर लगाकर भैंसों की सुरक्षा जांचते हैं, फिर भी डर उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। कलेक्ट्रेट में फूटा किसानों का दर्द सोमवार को बरदघटा टोला भलछेरा गांव के एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर सिंगरौली कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उस दिन जनसुनवाई चल रही थी। इनमें शामिल किसान हरेराम गुर्जर अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते रो पड़े। उन्होंने बताया कि उनकी 12 भैंसें चोरी हो चुकी हैं और यह नुकसान केवल पशुओं का नहीं है, बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई का सहारा छिन जाने जैसा है। हरेराम के साथ पहुंचे बाकी ग्रामीणों की भी यही पीड़ा थी, हर किसी के पास चोरी की अपनी अलग कहानी थी, लेकिन दर्द एक जैसा था। कई किसानों ने बताया कि भैंस पालना ही उनकी आमदनी का मुख्य जरिया था और अब दूध बेचकर घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। संगठित गिरोह की आशंका, तीन राज्यों तक तार उर्ती ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि अशोक कुमार जायसवाल, जो गुलाबी चेक शर्ट पहने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, और पीड़ित ग्रामीण दगा प्रसाद, जो नीले रंग की कुर्ती में मौजूद थे, ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि इन चोरियों के पीछे कोई छोटा-मोटा हाथ नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है, जिसके तार उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक फैले हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का खुफिया तंत्र इस गिरोह के आगे बेअसर साबित हो रहा है और किसान महीनों से सिर्फ कागजी आश्वासनों के भरोसे जी रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि जब तक इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ा नहीं जाता, तब तक चोरी की घटनाएं थमने वाली नहीं हैं। पुलिस का दावा, जांच के लिए बनी विशेष टीम इस पूरे मामले पर सिंगरौली के पुलिस अधीक्षक शिजाज केएम का कहना है कि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और कुछ संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है। एसपी ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश कर चोरी की गई भैंसें बरामद कर ली जाएंगी। किसानों के अनसुलझे सवाल पुलिस भले ही कार्रवाई का दावा कर रही हो, लेकिन आंसू बहा चुके किसानों के सवाल अब भी जस के तस बने हुए हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस इतनी सतर्क है, तो एक साल में सौ से ज्यादा भैंसें चोरी होने के बावजूद अब तक एक भी चोर पकड़ में क्यों नहीं आया। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि उनकी छिनी हुई रोजी-रोटी उन्हें आखिर कब और किस तरह वापस मिलेगी। फिलहाल सिंगरौली के पशुपालक भारी अनिश्चितता और आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं, और उनकी निगाहें अब पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर पशुपालक किसानों की आर्थिकी से जुड़ी है। • भारत में: ग्रामीण इलाकों में मवेशी चोरी की बढ़ती घटनाएं छोटे किसानों की आजीविका और स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करती हैं। • सिंगरौली में: यहां के पशुपालकों के लिए भैंस ही आय और बच्चों की पढ़ाई का मुख्य सहारा है, ऐसे में लगातार चोरी से कई परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। सवाल-जवाब 1. सिंगरौली में कितनी भैंसें चोरी हुई हैं? बीते करीब एक साल में सिंगरौली जिले से सौ से ज्यादा भैंसें चोरी हो चुकी हैं। 2. किसान कलेक्ट्रेट क्यों पहुंचे? सोमवार को चल रही जनसुनवाई में बरदघटा टोला भलछेरा के किसान अपनी शिकायत दर्ज कराने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। 3. हरेराम गुर्जर की कितनी भैंसें चोरी हुईं? हरेराम गुर्जर की 12 भैंसें चोरी हो चुकी हैं, जिनके गम में वे जनसुनवाई के दौरान रो पड़े। 4. ग्रामीणों का चोरी को लेकर क्या आरोप है? ग्रामीणों का आरोप है कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है जिसके तार उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक जुड़े हैं। 5. पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं? एसपी शिजाज केएम के अनुसार जांच के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं और कुछ संदिग्धों की पहचान भी हो चुकी है। 6. क्या चोरी हुई भैंसें अब तक बरामद हुई हैं? नहीं, अब तक भैंसों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, हालांकि पुलिस ने जल्द बरामदगी का भरोसा दिलाया है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/singrauli-ke-ganvon-men-bhainsa-choron-ka-atnka-eka-sala-men-sau-se-adhika-maveshi-gayaba-rote-hue-kisana-pahunche-kalektreta-7688 TrendKia — Har trend, sabse pehle.