# टीकमगढ़ में कलेक्टर के औचक निरीक्षण से खुली स्वास्थ्य सेवाओं की पोल, सीएचओ नहीं माप सकीं मरीज का ब्लड प्रेशर

> मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में एक उप स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतिय के सामने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर महिला मरीज का ब्लड प्रेशर नहीं माप पाईं। इसके बाद कलेक्टर ने खुद उन्हें बीपी चेक करने का तरीका सिखाया और डिग्री को लेकर सवाल उठाए।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-08-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/tikamagarha-men-kalektara-ke-auchaka-nirikshana-se-khuli-svasthya-sevaon-ki-pola-cho-nahin-mapa-sakin-marija-ka-blada-preshara-24572 · **Language:** Hindi
**Tags:** टीकमगढ़, मध्य प्रदेश, स्वास्थ्य व्यवस्था, कलेक्टर, सीएचओ, मेडिकल जांच

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के स्वास्थ्य महकमे की जमीनी हकीकत उस वक्त खुलकर सामने आ गई, जब जिला कलेक्टर मध्यप्रदेश के इस इलाके में व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र के औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक मुखिया को कुछ ऐसे हालात से दो-चार होना पड़ा, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद से स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सा कर्मियों की कार्यकुशलता और शैक्षणिक डिग्रियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

## महिला मरीज का बीपी नाप पाने में असमर्थ रहीं सीएचओ

निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतिय सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र के भीतर गए, तो वहां पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रितु अहिरवार एक महिला मरीज की स्वास्थ्य जांच कर रही थीं। स्थिति तब असहज हो गई जब सीएचओ रितु अहिरवार महिला मरीज के शरीर का ब्लड प्रेशर मापने की प्रक्रिया को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ नजर आईं। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी को जब इस बात का अहसास हुआ कि स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेदारी संभालने वाली कर्मचारी को सामान्य सी चिकित्सकीय जांच तक करनी नहीं आती, तो वे भी हैरान रह गए। इसके बाद कलेक्टर ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला और सीएचओ को बीपी नापने की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। उन्होंने मौके पर ही ब्लड प्रेशर जांचने के जरूरी चरणों को दोहराया और उन्हें प्रैक्टिकल करके दिखाया।

 

## योग्यता और शैक्षणिक डिग्रियों पर उठे तीखे सवाल

ब्लड प्रेशर मापने के दौरान सामने आई इस अयोग्यता के बाद कलेक्टर ने सीएचओ रितु अहिरवार से उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और डिग्रियों को लेकर भी कड़े सवाल किए। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि आखिर किस आधार पर उनकी नियुक्ति हुई है और उनके पास कौन-कौन सी शैक्षणिक डिग्रियां उपलब्ध हैं। अधिकारी का यह सवाल करना स्वाभाविक भी था कि यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी के पास विधिवत डिग्री या योग्यता है, तो उसे एक साधारण सा ब्लड प्रेशर जांचने में इतनी भारी दिक्कतों का सामना क्यों करना पड़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद निरीक्षण का पूरा फोकस न केवल केंद्र की भौतिक सुविधाओं पर था, बल्कि वहां तैनात कर्मियों के व्यावहारिक कौशल पर भी केंद्रित हो गया।

 

## ग्रामीणों ने खोली पोल, उप स्वास्थ्य केंद्र के अनियमित संचालन की शिकायत

कलेक्टर के इस दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखने का अवसर मिला और उन्होंने उप स्वास्थ्य केंद्र की कई और पोल खोल दीं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर शिकायत दर्ज कराई कि सापौन का यह उप स्वास्थ्य केंद्र अपने तय समय और नियमित दिनों पर खुलता ही नहीं है। इसके चलते इलाके के लोगों को छोटी-मोटी और सामान्य बीमारियों की जांच कराने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रकार की लचर कार्यप्रणाली का सीधा और नकारात्मक असर आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की कि केंद्र की व्यवस्थाओं को अविलंब दुरुस्त किया जाए और इसे पूरी नियमितता के साथ संचालित कराया जाए ताकि जरूरतमंदों को भटकना न पड़े।

 

## सुधार के कड़े निर्देश और प्रशासनिक सख्ती

ग्रामीणों की ओर से रखी गई इन तमाम शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतिय ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में तत्काल प्रभाव से सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उप स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं को हर हाल में नियमित और उच्च स्तर पर संचालित किया जाना चाहिए, ताकि आपातकाल या जरूरत के समय किसी भी मरीज को इलाज के अभाव में असुविधा न हो। जिला प्रशासन का यह दौरा इस लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि उप स्वास्थ्य केंद्रों की प्राथमिक जिम्मेदारी यही होती है कि वे ग्रामीण अंचल के मरीजों को शुरुआती स्तर की स्वास्थ्य और जांच सेवाएं बिना किसी बाधा के मुहैया करा सकें।

## इसका आप पर असर
यह घटना ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और सरकारी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

- **भारत में:** देश के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य उप केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की योग्यता और दक्षता की निगरानी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इससे उच्चाधिकारियों द्वारा इस तरह के औचक निरीक्षणों में तेजी आने की संभावना है।

- **टीकमगढ़ में:** स्थानीय निवासियों और मरीजों को अब सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र के नियमित रूप से खुलने और बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद बंध सकती है। प्रशासनिक सख्ती के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की सख्त निगरानी की जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना मध्य प्रदेश के किस जिले में हुई है?
यह घटना मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र पर हुई।

### 2. निरीक्षण के दौरान कौन अधिकारी वहां पहुंचे थे?
कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतिय सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।

### 3. सीएचओ कौन सा परीक्षण करने में असमर्थ रही थीं?
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रितु अहिरवार एक महिला मरीज का ब्लड प्रेशर नहीं माप पाई थीं।

### 4. ग्रामीणों ने उप स्वास्थ्य केंद्र को लेकर क्या शिकायत की थी?
ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि उप स्वास्थ्य केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलता है जिससे छोटी जांचों के लिए भी परेशानी होती है।

### 5. स्थिति देखने के बाद कलेक्टर ने क्या कदम उठाया?
कलेक्टर ने खुद हस्तक्षेप करते हुए सीएचओ को ब्लड प्रेशर जांचने की पूरी प्रक्रिया समझाई और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._