# उज्जैन के होटल श्री गंगा में अपशिष्ट कक्ष की सफाई के दौरान चार कर्मियों की मौत

> उज्जैन के देवास रोड स्थित होटल श्री गंगा में शनिवार रात कन्फेक्शनरी और डेयरी कचरे के चैंबर की सफाई करने उतरे चार कर्मचारियों की जहरीली गैस और दम घुटने से मौत हो गई।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/ujjain-ke-hotel-shri-ganga-men-apashishta-kaksha-ki-saphai-ke-daurana-chara-karmiyon-ki-mauta-54196 · **Language:** Hindi
**Tags:** उज्जैन, होटल श्री गंगा, हादसा, श्रमिक मौत, देवास रोड, प्रदीप शर्मा, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन में देवास रोड पर स्थित होटल श्री गंगा में शनिवार की रात एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई। होटल परिसर के दाईं ओर निर्मित अपशिष्ट शोधन कक्ष की सफाई करने उतरे चार कर्मचारियों की दम घुटने और जहरीली गैस की चपेट में आने से जान चली गई। शनिवार रात लगभग 10:30 बजे घटित इस दर्दनाक घटनाक्रम में चैंबर के भीतर अत्यधिक फिसलन, गहराई और रासायनिक गैसों के जमाव के कारण सफाईकर्मी अंदर ही बेसुध होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के प्रयास में उतरे अन्य सहकर्मी भी इन जहरीली वाष्पों के संपर्क में आकर गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए, जिन्हें तुरंत चिकित्सकीय देखरेख में पहुंचाया गया।

## कन्फेक्शनरी कचरे के चैंबर में जमा जहरीली गैस बनी काल
होटल के दाहिने हिस्से में स्थित यह वेस्टेज चैंबर मुख्य रूप से मिष्ठान, बेकरी और डेयरी निर्माण इकाई से निकलने वाले अवशिष्टों को एकत्रित करने के लिए बनाया गया था। इस भूमिगत कक्ष में निर्माण प्रक्रिया से निकला मैला पानी, चाशनी, घी, तेल और अन्य जैविक अवशिष्ट बहकर आते हैं, जो धीरे-धीरे नालियों की ओर प्रवाहित होते हैं। लंबे समय तक जैविक पदार्थों के जमाव और बहाव अवरुद्ध होने से ऐसे बंद कक्षों में अत्यंत विषैली गैसें एकत्र हो जाती हैं। नियमित सफाई अभियान के तहत कर्मचारी जब इस गहरे कक्ष में उतरे, तब वहां ऑक्सीजन की भारी कमी और विषैले धुएं के कारण वे तुरंत अचेत हो गए तथा बाहर निकलने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं पा सके।

भीतर फंसे कर्मियों की चीख-पुकार और हलचल बंद होने पर होटल के अन्य कर्मचारियों ने तत्काल बचाव की कोशिश की। राहत पहुंचाने उतरे दो कर्मचारी भी चैंबर के अंदर व्याप्त सघन गैस के असर से अचेत होने लगे, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इन प्रभावित सहकर्मियों को भी बाद में गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

## डेढ़ घंटे चला जटिल बचाव अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, स्थानीय पुलिस बल, एम्बुलेंस और नागरिक सुरक्षा दल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। बंद और संकरे चैंबर की सामान्य सीढ़ियों अथवा संकीर्ण मुख से अचेत पड़े कर्मियों को खींच पाना पूरी तरह असंभव था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसपी प्रदीप शर्मा के सीधे निर्देशन में आपातकालीन तकनीकी दल ने मोर्चा संभाला। बचाव दल ने भारी इलेक्ट्रिक कटर मशीनों का सहारा लेकर चैंबर के बाहरी कंक्रीट हिस्से को काटकर बड़ा निकास द्वार तैयार किया।

लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस सघन बचाव अभियान के बाद चारों श्रमिकों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आपातकालीन प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को सीपीआर देकर सांसें लौटाने का प्रयास किया और उन्हें अविलंब निकटवर्ती चिकित्सालय पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच के उपरांत चारों कर्मियों को मृत घोषित कर दिया। बचाव कार्य के दौरान विषाक्त वातावरण और मलबे से जूझते हुए एक पुलिस उपनिरीक्षक भी घायल हुए हैं।

## हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों का विवरण
इस दुखद दुर्घटना में जान गंवाने वाले चारों व्यक्तियों की पहचान प्रशासनिक स्तर पर स्थापित की गई है, जिनमें स्थानीय और अंतरराज्यीय श्रमिक शामिल हैं

- **कमलेश:** सोहनलाल के पुत्र, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन
- **नितिन:** ताराचन्द के पुत्र, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन
- **वाहिद:** निवासी सोमवारिया, उज्जैन
- **मनोज मीणा:** निवासी झालावाड़, राजस्थान

## सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन की गहन जांच
उज्जैन पुलिस ने होटल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर संपूर्ण प्रकरण की वैधानिक जांच प्रारंभ कर दी है। प्रशासनिक अधिकारी इस बात की विस्तृत छानबीन कर रहे हैं कि क्या कर्मचारियों को इतने जोखिम भरे और जहरीले कक्ष में उतारने से पूर्व अनिवार्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, हार्नेस बेल्ट या गैस डिटेक्टर उपलब्ध कराए गए थे। चैंबर में गैस रिसाव अथवा निर्माण के तकनीकी कारणों की पड़ताल के साथ ही होटल संचालन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

## इसका आप पर असर
यह घटना वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में भूमिगत अपशिष्ट टैंकों की असुरक्षित सफाई से जुड़े जानलेवा खतरों और श्रम सुरक्षा कानूनों की अनिवार्य पालना को रेखांकित करती है।

- **भारत में:** होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य निर्माण इकाइयों को सेप्टिक व वेस्टेज टैंक की सफाई के लिए अनिवार्य रूप से मशीनीकृत उपकरणों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। बिना गैस मास्क, हार्नेस और ऑक्सीजन किट के श्रमिकों को गहरे चैंबरों में उतारने पर नियोक्ताओं के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या जैसी गंभीर कानूनी धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
- **उज्जैन में:** स्थानीय प्रशासन और नगर निगम देवास रोड सहित जिले के सभी बड़े होटलों और धर्मशालाओं के ड्रेनेज टैंकों की सुरक्षा जांच तेज करेगा। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के संचालकों को अपने अपशिष्ट संयंत्रों की तकनीकी स्थिति और स्वच्छता कर्मचारियों के सुरक्षा इंतजामों का अनिवार्य ब्योरा श्रम विभाग को देना पड़ सकता है।
- **सफाई कर्मियों और श्रमिकों के लिए:** किसी भी बंद गड्ढे, सीवर लाइन या कन्फेक्शनरी वेस्ट चैंबर में बिना गैस परीक्षण और सुरक्षा गियर के प्रवेश करने से स्पष्ट इनकार करना चाहिए। जहरीली गैसों का जमाव कुछ ही सेकंड में अचेत कर सकता है, इसलिए श्रमिकों को आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल और हेल्पलाइन के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है।
- **आपातकालीन बचाव के संदर्भ में:** किसी सहकर्मी के चैंबर में फंसने पर बिना सुरक्षा साधनों के सीधे गड्ढे में कूदने के बजाय तत्काल अग्निशमन दल और पुलिस को सूचित करना चाहिए। प्राथमिक स्तर पर सही उपकरणों की अनुपस्थिति में बचाव दल के सदस्य भी जहरीली गैस की चपेट में आकर हताहत हो जाते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह हादसा कन्फेक्शनरी अवशिष्ट चैंबर में जैविक कचरे के सड़ने से बनी अत्यधिक विषैली गैसों और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के कर्मचारियों को गहरे कक्ष में उतारने के कारण हुआ।

- **सीधा कारण:** मिठाई और डेयरी अपशिष्ट से निकलने वाले चाशनी, दूध, घी और पानी के अवशेष लंबे समय तक बंद चैंबर में सड़ने से वहां मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी प्राणघातक गैसें एकत्र हो गई थीं। सफाईकर्मी जैसे ही कक्ष में उतरे, ऑक्सीजन की अचानक कमी और गैस के प्रभाव से वे बेहोश होकर गिर पड़े।
- **बचाव में जटिलता और फिसलन:** चैंबर की अत्यधिक गहराई और चिकनाई भरी सतह के कारण कर्मचारी अंदर गिरकर फिसल गए और बाहर निकलने की स्थिति में नहीं रहे। संकरा मुहाना होने की वजह से सहकर्मी उन्हें बाहर नहीं खींच पाए और अंदर जाने वाले अन्य लोग भी अचेत होने लगे।
- **सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभाव:** होटल प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को सफाई से पूर्व गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क अथवा सुरक्षा रस्सी जैसे अनिवार्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। प्रशासन इस बिंदु की विस्तृत पड़ताल कर रहा है कि क्या सफाई कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन किया गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. उज्जैन के होटल श्री गंगा में यह हादसा किस समय और कहां हुआ?
यह हादसा शनिवार रात करीब 10:30 बजे देवास रोड स्थित होटल श्री गंगा के दाईं ओर बने वेस्टेज चैंबर में हुआ।

### 2. हादसे में जान गंवाने वाले चार कर्मचारियों के नाम क्या हैं?
मृतकों की पहचान कमलेश (वाल्मीकि नगर), नितिन (वाल्मीकि नगर), वाहिद (सोमवारिया) और मनोज मीणा (झालावाड़, राजस्थान) के रूप में हुई है।

### 3. कर्मचारियों की मौत का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
अधिकारियों के अनुसार चैंबर की गहराई, अत्यधिक फिसलन और कन्फेक्शनरी कचरे से जमा हुई जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से उनकी मौत हुई।

### 4. बचाव दल ने अंदर फंसे कर्मचारियों को बाहर कैसे निकाला?
एसपी प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में बचाव दल ने इलेक्ट्रिक कटर से चैंबर के एक हिस्से को काटकर खोला और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद कर्मियों को बाहर निकाला।

### 5. क्या इस घटना में अन्य लोग भी घायल हुए हैं?
हां, बचाव की कोशिश करने वाले दो होटल कर्मचारी जहरीली गैस से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं, और एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी घायल हुए हैं।

### 6. पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और यह जांच की जा रही है कि सफाई के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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