# उज्जैन पुलिस ने किया उस गिरोह का भंडाफोड़ जिसने इंस्टाग्राम पर हनीट्रैप के जरिए युवक को फंसाकर मांगी थी 50 लाख रुपये की फिरौती

> मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने सोशल मीडिया पर हनीट्रैप चलाकर अपहरण और जबरन वसूली करने वाले गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो आपत्तिजनक वीडियो के दम पर लोगों को ब्लैकमेल करते थे।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-07-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/ujjain-pulisa-ne-kiya-usa-giroha-ka-bhndaphora-jisane-instagram-para-hanitraipa-ke-jarie-yuvaka-ko-phnsakara-mangi-thi-50-lakha-ru-9843 · **Language:** Hindi
**Tags:** उज्जैन पुलिस, हनीट्रैप गिरोह, सोशल मीडिया फ्रॉड, किडनैपिंग केस, मध्य प्रदेश पुलिस

मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को शिकार बनाने वाले एक बड़े ब्लैकमेलिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अमीर लोगों को अपने जाल में फंसाता था और फिर उनका अपहरण कर भारी-भरकम फिरौती वसूलता था। हाल ही में इस गिरोह ने एक स्थानीय युवक का अपहरण कर उसके परिवार से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए नानाखेड़ा पुलिस ने मुख्य सरगना सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे इस खतरनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ है जो डिजिटल हेरफेर को शारीरिक हिंसा और जबरन वसूली के साथ जोड़कर अंजाम देता था।

 

## इंस्टाग्राम पर नौकरी के नाम पर बिछाया गया जाल

यह पूरी घटना 20 जुलाई 2026 को तब उजागर हुई, जब ग्राम नरवर के रहने वाले 29 वर्षीय हैदर पटेल ने नानाखेड़ा थाने में औपचारिक रूप से अपनी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत इंस्टाग्राम पर हुई थी, जहां अंजली ठाकुर नाम की एक महिला प्रोफाइल से उससे संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान उस महिला ने हैदर का विश्वास जीतने के लिए उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया। जब हैदर का भरोसा पूरी तरह जीत लिया गया, तो उसे मिलने के लिए एक निश्चित स्थान पर बुलाया गया। लेकिन जब पीड़ित वहां पहुंचा, तो वहां कोई नौकरी की बात नहीं हुई, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता लोकेश शर्मा और उसके साथी पहले से ही घात लगाए बैठे थे। इन लोगों ने मिलकर तुरंत हैदर का अपहरण कर लिया।

 

## शारीरिक हिंसा, आपत्तिजनक वीडियो और ब्लैकमेलिंग की साजिश

अपहरण करने के बाद आरोपी हैदर को एक सुनसान और गुप्त स्थान पर ले गए, जिससे वे उस पर पूरी तरह काबू पा सकें। वहां उन्होंने पीड़ित के साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित को डराने और उसे पुलिस के पास जाने से रोकने के लिए आरोपियों ने उसका एक आपत्तिजनक वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद उन्होंने इस वीडियो को ब्लैकमेलिंग के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। बदमाशों ने पीड़ित को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और कहा कि यदि उन्हें पैसे नहीं मिले, तो वे इस संवेदनशील वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल कर देंगे। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित को झूठे कानूनी मामलों में फंसाने की भी धमकी दी। इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का उद्देश्य पीड़ित परिवार को सामाजिक बदनामी के डर से उनकी मांगें मानने के लिए मजबूर करना था।

 

## लाखों रुपये की फिरौती और पुलिस तक पहुंचा मामला

युवक को अपने कब्जे में रखने के बाद, अपहरणकर्ताओं ने हैदर के पिता से संपर्क किया और उसकी सुरक्षित रिहाई के बदले 50 लाख रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगी। घबराए हुए परिवार और अपराधियों के बीच काफी मोलभाव हुआ, जिसके बाद यह सौदा आखिरकार 26 लाख रुपये में तय हुआ। अत्यधिक दबाव में आकर पीड़ित परिवार ने किसी तरह 10 लाख रुपये का इंतजाम किया और आरोपियों को सौंप दिया। इतनी रकम मिलने के बाद गिरोह ने हैदर को तो छोड़ दिया, लेकिन उनकी जबरन वसूली का सिलसिला यहीं नहीं थमा। आरोपी लगातार पीड़ित परिवार पर बाकी बचे 16 लाख रुपये देने के लिए मानसिक दबाव बना रहे थे और धमकियां दे रहे थे। इस लगातार प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित ने अंततः कानून की मदद लेने का फैसला किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

 

## पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की धरपकड़

इस संगठित अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। इस संवेदनशील अभियान का नेतृत्व नानाखेड़ा की CSP श्वेता गुप्ता और थाना प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र कुमार यादव कर रहे थे। पुलिस टीम ने साइबर सेल की तकनीकी मदद ली और अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी की और इस गिरोह के 10 सदस्यों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में मुख्य सरगना लोकेश शर्मा (निवासी उज्जैन) और राजपाल सिंह राठौड़ (निवासी इंगौरिया) शामिल हैं।

 

## भीतरी मुखबिर की संलिप्तता और फरार आरोपियों की तलाश

गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि यह गिरोह बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। वे केवल उन्हीं लोगों को निशाना बनाते थे जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी होती थी। इस मामले में सह-आरोपी इदरीश पटेल ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसने हैदर की अच्छी आर्थिक स्थिति और उसकी इंस्टाग्राम आईडी की पूरी जानकारी इस गिरोह को लीक की थी। इसी जानकारी के आधार पर अंजली ठाकुर ने हैदर को अपने जाल में फंसाया था। पुलिस ने बताया कि भोपाल की रहने वाली अंजली ठाकुर और एक अन्य आरोपी दीपक राजपूत फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस पकड़े गए आरोपियों के पुराने आपराधिक इतिहास और उनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि उनके पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह मामला दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर अजनबियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है; किसी भी नौकरी या मुलाकात के प्रस्ताव की पुष्टि पहले अवश्य कर लें।
- **उज्जैन और मध्य प्रदेश में:** स्थानीय पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट को कमजोर कर दिया है, जिससे नागरिकों को सुरक्षा का अहसास होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. उज्जैन में हैदर पटेल का अपहरण कैसे हुआ?
इंस्टाग्राम पर अंजली नामक युवती ने हैदर को नौकरी दिलाने का झांसा देकर मिलने बुलाया, जहां मुख्य आरोपी लोकेश शर्मा और उसके साथियों ने उसे अगवा कर लिया।

### 2. आरोपियों ने हैदर के परिवार से कितनी फिरौती मांगी थी?
आरोपियों ने शुरू में ₹50 लाख की मांग की थी, जिसे बातचीत के बाद ₹26 लाख तय किया गया। पीड़ित परिवार ने इसमें से ₹10 लाख का भुगतान किया था।

### 3. इस मामले में कौन से आरोपी फिलहाल फरार हैं?
इस गिरोह की महिला सदस्य अंजली ठाकुर (भोपाल) और एक अन्य आरोपी दीपक राजपूत अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

### 4. पुलिस ने इस कार्रवाई में कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने मुख्य आरोपी लोकेश शर्मा और सह-आरोपी इदरीश पटेल सहित गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._