विदिशा में किसान ने अपनी पालतू बकरी के लिए आयोजित की भव्य तेरहवीं, प्रयागराज में किया अस्थि विसर्जन विदिशा जिले के सिरोंज में किसान नवल सिंह मालवीय ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी 'कटोरी उर्फ चमेली' के निधन पर सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार संपन्न किया। प्रयागराज में गंगा विसर्जन के पश्चात 15 अगस्त को 500 लोगों के लिए तेरहवीं का भोज भी आयोजित किया गया। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले अंतर्गत सिरोंज क्षेत्र से इंसान और मूक पशु के बीच आत्मीय रिश्ते की एक बेहद भावुक मिसाल सामने आई है। यहां के भवानी नगर मोहल्ले में रहने वाले एक किसान परिवार ने अपनी पालतू बकरी के निधन के उपरांत पारंपरिक विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार संपन्न कराया। इतना ही नहीं, परिवार ने बकरी की अस्थियों को पवित्र गंगा नदी में विसर्जित किया और शोक पत्रिका छपवाकर गांव तथा रिश्तेदारों को एकत्रित कर तेरहवीं का विशाल भोज भी आयोजित किया। इस अनूठे आयोजन की पूरे इलाके में व्यापक चर्चा हो रही है। 20 वर्षों का अटूट रिश्ता और पारिवारिक सदस्य जैसा दर्जा सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय ने एक बकरी पाल रखी थी, जिसका नाम उन्होंने 'कटोरी उर्फ चमेली' रखा था। नवल सिंह ने इस बकरी को लगातार 20 वर्षों तक अपने घर में रखा। उनका कहना है कि उन्होंने बकरी को कभी केवल एक जानवर नहीं समझा, बल्कि अपने बच्चे की तरह उसका पालन-पोषण किया। वह घर के भीतर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के साथ घुला-मिला करती थी। जब बीते 3 अगस्त को इस बकरी की मृत्यु हुई, तो पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया। किसान के अनुसार, उसके जाने से ऐसा महसूस हुआ जैसे परिवार का ही कोई अभिन्न सदस्य उन्हें छोड़कर चला गया हो। प्रशासनिक अनुमति से दाह संस्कार और प्रयागराज में गंगा विसर्जन बकरी के निधन के पश्चात नवल सिंह मालवीय ने स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त की और उसके शव का बाकायदा दाह संस्कार किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान ने उसकी अस्थियों को सहेजा। इसके बाद वे स्वयं अस्थि कलश लेकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ अस्थियों को गंगा नदी में विसर्जित किया। इंसान की भांति किसी पालतू जानवर के लिए इन सभी पारंपरिक उत्तर-कार्यों का निर्वहन करना स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय बन गया। शोक पत्रिका का वितरण और 500 अतिथियों के लिए तेरहवीं का भोज गंगा जी में अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न करने के बाद मालवीय परिवार ने 15 अगस्त को बकरी की तेरहवीं का कार्यक्रम तय किया। इसके लिए परिवार ने बाकायदा एक औपचारिक शोक संदेश पत्रिका मुद्रित करवाई। यह कार्ड आसपास के पड़ोसियों, परिचितों तथा दूर-दराज रहने वाले रिश्तेदारों को भेजकर आमंत्रित किया गया। तेरहवीं के दिन आयोजित इस विशेष भोज में लगभग 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, जहां पधारे लोगों ने सामूहिक रूप से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मानवीय संवेदना और पशु प्रेम की अनोखी मिसाल आज के दौर में जब कई बार वृद्ध परिजनों को भी उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, ऐसे समय में एक किसान द्वारा अपनी पालतू बकरी के लिए प्रकट किया गया यह अगाध प्रेम समाज को गहराई से प्रभावित कर रहा है। नवल सिंह मालवीय द्वारा अपनी बेजुबान साथी को दी गई यह सम्मानजनक विदाई लोगों के बीच कौतूहल के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। इसका आप पर असर पाठकों पर प्रभाव: • भारत में: यह घटना पालतू पशुओं के प्रति आत्मीयता, जीव दया और पशु कल्याण से जुड़ी मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती है। • विदिशा (मध्य प्रदेश) में: सिरोंज के भवानी नगर में हुए इस आयोजन ने स्थानीय समुदाय में बेजुबान जीवों के प्रति दयालुता और जिम्मेदारी का सकारात्मक संदेश दिया है। सवाल-जवाब 1. नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी का नाम क्या था? किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी का नाम 'कटोरी उर्फ चमेली' था। 2. नवल सिंह ने अपनी पालतू बकरी को कितने समय तक पाला था? उन्होंने अपनी पालतू बकरी को 20 वर्षों तक अपने घर में बेटी की तरह पाला था। 3. बकरी का निधन कब हुआ था? बकरी का निधन 3 अगस्त को हुआ था। 4. अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों का विसर्जन कहां किया गया? प्रशासनिक अनुमति से दाह संस्कार के पश्चात बकरी की अस्थियों को प्रयागराज ले जाकर गंगा नदी में विसर्जित किया गया। 5. तेरहवीं का आयोजन कब हुआ और इसमें कितने लोग शामिल हुए? बकरी की तेरहवीं 15 अगस्त को आयोजित की गई, जिसके लिए औपचारिक शोक संदेश कार्ड बांटकर लगभग 500 लोगों को भोजन कराया गया। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • बेजुबान जीवों के प्रति निष्छल प्रेम: पालतू जानवरों को केवल संपत्ति न मानकर परिवार के सदस्य का दर्जा देना मानवीय मूल्यों को गहराई प्रदान करता है। • पूर्ण दायित्व का निर्वहन: किसी पशु को जीवन भर संरक्षण देने के साथ-साथ उसे सम्मानजनक विदाई देना सच्ची प्रतिबद्धता को दर्शाता है। • सामाजिक संवेदनशीलता: स्वार्थ से परे हटकर किया गया यह कार्य समाज में करुणा, दया और आपसी आत्मीयता की भावना को सुदृढ़ करता है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/vidisha-men-kisana-ne-apani-palatu-bakari-ke-lie-ayojita-ki-bhavya-terahavin-prayagraj-men-kiya-asthi-visarjana-17139 TrendKia — Har trend, sabse pehle.