# दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आमने-सामने, दिल्ली के तख्त और सूखे पर तीखा वार

> दशहरे के मौके पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने रैलियों के दौरान एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उद्धव ने जहां दिल्ली तक भगवा फहराने की हुंकार भरी और सूखे, कानून व्यवस्था व रिजीम चेंज पर सरकार को घेरा, वहीं शिंदे ने किसानों की मदद और अपनी पार्टी के विस्तार का जिक्र करते हुए पलटवार किया।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/dashahara-raili-men-uddhav-thackeray-aura-eknath-shinde-amane-samane-delhi-ke-takhta-aura-sukhe-para-tikha-vara-49857 · **Language:** Hindi
**Tags:** उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, दशहरा रैली, महाराष्ट्र राजनीति, सूखा संकट, शिवसेना, मुंबई समाचार

महाराष्ट्र की राजनीति में दशहरे का पर्व इस बार भी जुबानी जंग और बड़े राजनीतिक दावों का गवाह बना। मुंबई में आयोजित दशहरा रैलियों के दौरान शिवसेना यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने आगामी राजनीतिक दिशा, किसानों की समस्याओं, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस सियासी संग्राम में राज्य के मौजूदा हालात और भविष्य की रणनीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

 

## दिल्ली के तख्त पर भगवा फहराने का संकल्प
 दशहरे के पावन अवसर पर अपने संबोधन के दौरान शिवसेना यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे काफी आक्रामक मुद्रा में नजर आए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चारों तरफ भगवा माहौल बना हुआ है और इस भगवा को केवल महाराष्ट्र के विधान भवन तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे देश की राजधानी दिल्ली के तख्त पर भी लहराना है। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे पूरी तरह फायर मोड में दिखे, वहीं दूसरी मंच से एकनाथ शिंदे ने भी उनके बयानों का करारा जवाब दिया और सूखे समेत कई अन्य मुद्दों पर अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट की।

 

## सूखे के हालात और किसानों की बदहाली पर सवाल
 उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में गहरा रहे सूखे के संकट को लेकर राज्य की डबल इंजन सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूखे के हालात बेहद भयावह रूप लेते जा रहे हैं और सरकार केवल कागजी घोषणाएं करने में जुटी है। पिछले साल हुई मूसलाधार बारिश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान किसानों का भारी नुकसान हुआ था और सब कुछ पानी में बह गया था। उस वक्त मुख्यमंत्री ने इतिहास का सबसे बड़ा पैकेज देने की बात कही थी जो तीस या बत्तीस हजार करोड़ रुपये का था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितने किसानों को वह पैसा मिला और कितने लोगों को पीक बीमा का लाभ मिल पाया। पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे किसानों के साथ भद्दा मजाक करार दिया।

 

## कानून व्यवस्था और मुंबई में सुरक्षा पर प्रहार
 हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि टाइगर श्रॉफ पर कुछ दिन पहले हमला हुआ था और एकनाथ शिंदे तुरंत वहां चमकने के लिए पहुंच गए। यह गनीमत रही कि एक बच्चे को गोली लगी और वह बच गया, लेकिन इस तरह से सरकार चलाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस और अन्य सभी संस्थाओं को केवल नौकर बनाकर रख दिया गया है। नवरात्र के पावन दिनों में नाकाबंदी का औचित्य बताते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस को हथियार लेकर आने वाले ये गुंडे दिखाई नहीं दिए। ये लोग कैसे हथियार लेकर मुंबई में घुसने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के बाद अपनी पीठ थपथपलाई है, लेकिन वे हथियार लेकर शहर के भीतर दाखिल कैसे हुए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

 

## शहरी नक्सलवाद और साबरमती जेल पर बयान
 उद्धव ठाकरे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इसी महीने के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा देकर दावा किया था कि महाराष्ट्र अब शहरी नक्सलियों का केंद्र बन चुका है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर महाराष्ट्र के किस शहर में शहरी नक्सलवाद है। जो गुंडे मुंबई आए थे, वे उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों से आए थे। उन्हें जाते वक्त जरूर पकड़ा गया, लेकिन क्या वे आते वक्त पकड़े गए थे। उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र करते हुए कहा कि वह साबरमती जेल में बैठकर आराम से ढोकला और फाफड़ा खा रहा है और उसके गुंडे यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास सत्तर हजार शूटर हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी हिम्मत है तो वे साबरमती जाएं और वहां बैठे अपने आकाओं के सामने उस बिश्नोई को खींचकर लाएं, तब हमारे सामने आकर बड़ी बातें करें। उन्होंने कहा कि आज किसी का खून नहीं खौल रहा है और मेरे महाराष्ट्र को शहरी नक्सलवाद का गढ़ कहा जा रहा है।

 

## रिजीम चेंज और ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप
 सीमा पर तैनात सैनिकों के नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर ऐसा किया जाएगा तो रिजीम चेंज क्यों नहीं करेंगे, हम बिल्कुल रिजीम चेंज करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेरह करोड़ लोगों के नाम इसलिए काट दिए गए क्योंकि वे वंदे मातरम् नहीं बोलते। उन्होंने अपनी मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि कामकाज पूरी तरह तानाशाही तरीके से चलाया जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिए जाने का हवाला देते हुए उन्होंने विवेक भीमनवर एमपीसी को छुट्टी पर भेजने की बात कही, लेकिन साथ ही सवाल किया कि अभी तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है। रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उसके दस सिर थे और एक कटने पर दूसरा आ जाता था, तब विभीषण ने बताया था कि उसकी जान उसकी नाभि में है। ठीक उसी तरह, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नाभि ज्ञानेश कुमार हैं, इसलिए उन्हें बचाया जा रहा है।

 

## बच्चों के आंदोलन और भाषा विवाद पर टिप्पणी
 माता-पिता द्वारा छोटे-छोटे बच्चों को लेकर आंदोलन में उतरने का जिक्र करते हुए उद्धव ने कहा कि बच्चों को कमजोर समझने की भूल न करें। अगर वे मर भी जाएं, तब भी अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। आंदोलन करने वाले ये लोग असल मायने में क्रांतिकारी हैं। महाराष्ट्र की भाषा को लेकर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी बना दी गई है जैसे महाराष्ट्र की भाषा गुजराती हो गई है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हमारे दाढ़ी वाले नेता बैठे-बैठे खुजली कर रहे थे और वे हमें हिंदुत्व सिखाने चले हैं, जिनकी अपनी हालत दुम हिलाने जैसी हो गई है। उन्होंने अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु में लोग कहते हैं कि उन्हें तमिल नहीं आती, लेकिन महाराष्ट्र राज्य लाचार लोगों का राज्य कतई नहीं है।

 

## एकनाथ शिंदे का पलटवार और किसानों के लिए मदद
 उद्धव ठाकरे के बयानों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य का किसान सूखे की वजह से गहरी परेशानी में है। शिवसैनिक कभी भी खाली हाथ नहीं बैठता और जब भी वह किसानों के बीच जाएगा, उनके लिए कुछ न कुछ लेकर जाएगा। इसी प्रतिबद्धता के तहत आज सौ ट्रक भरकर राहत सामग्री रवाना की गई है और इसके बाद मदद का दूसरा चरण भी भेजा जाएगा। खुद को एक किसान का बेटा बताते हुए उन्होंने कहा कि वे किसानों को दुखी नहीं देख सकते। त्योहारों को बाद में रखने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि पहले किसानों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना जरूरी है। लोग उन्हें रोज सुबह उठकर गालियां देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सरकार किसानों को राशन मुहैया करा रही है और उनके आंसू पोछने का काम कर रही है।

 

## पीछे के दरवाजे की राजनीति पर जुबानी जंग
 एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कौन सा चुनाव लड़ा था और वे सीधे पिछले दरवाजे से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए थे। शिंदे ने कहा कि जनता सब जानती है और मौका आने पर इसका हिसाब भी देती है।

 

## पाकिस्तान, आतंकवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां
 राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बोलते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले इस देश ने कई बड़े बम धमाके और मुंबई पर हुआ कसाब का हमला झेला है। पहले आतंकवादी हमलों के बाद केवल कड़े पत्र लिखे जाते थे, लेकिन अब आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर सबक सिखाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की ऐसी मजबूत स्थिति बना दी है कि आज पाकिस्तान दुनिया के सामने भीख मांगने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को इस उपलब्धि पर गर्व होना चाहिए। बालासाहेब ठाकरे के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तब पाकिस्तान केवल एक ही व्यक्ति से थर-थर डरता था। पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के समय मदद के लिए वे सबसे आगे रहे हैं और उनकी पार्टी भागने वालों में नहीं, बल्कि दूसरों की जान बचाने वालों में से एक है।

 

## संकट के समय शिवसेना की भूमिका और विस्तार
 इजरायल और नेपाल से फंसे हुए लोगों को सकुशल वापस लाने के अपने अभियानों का हवाला देते हुए शिंदे ने कहा कि जहां भी संकट होता है, वहां शिवसेना पहुंचती है और जहां आपदा आती है, वहां एकनाथ शिंदे खुद मौजूद रहते हैं। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि आज शिवसेना के पास 15 सांसद, 74 विधायक और एक हजार से अधिक नगरसेवक हैं, जो बालासाहेब ठाकरे के आशीर्वाद और पार्टी की असली ताकत को दर्शाता है।

 

## ऑपरेशन और पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं पर बयान
 विपक्ष द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देते हुए शिंदे ने कहा कि पत्रकार उनसे अक्सर पूछते हैं कि ऑपरेशन 1 और 2 हो चुके हैं, अब ऑपरेशन 3.0 कब अंजाम दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि वे कभी भी ऑपरेशन की तारीख पहले से उजागर करके काम नहीं करते। डॉक्टर भले ही इलाज की तारीख तय करते हों, लेकिन वे सीधे बड़ा ऑपरेशन करने में विश्वास रखते हैं। अपने बेटे श्रीकांत शिंदे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह भी वहीं बैठे हैं और हालांकि वे खुद डॉक्टर नहीं हैं, लेकिन बड़े-बड़े राजनीतिक ऑपरेशन करना अच्छी तरह जानते हैं। लगातार नेताओं के पार्टी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाना आखिर लोग इतनी भारी संख्या में शिवसेना का दामन क्यों थाम रहे हैं। आज पार्टी में शामिल होने के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं और यहां तक कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने भी रिटायरमेंट के बाद शिवसेना में प्रवेश किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे किसी भी तरह की कानूनी लड़ाई की चिंता न करें और उसे पूरी तरह उन पर छोड़ दें।

## इसका आप पर असर
महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों की रैलियों और बयानों का सीधा असर राज्य की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और आम जनता के मुद्दों पर पड़ता है।

  - **महाराष्ट्र में:** किसानों के लिए राहत सामग्री भेजने और सूखे के मुद्दों पर चल रही बयानबाजी से राज्य सरकार पर कृषि राहत कार्यों को तेजी से लागू करने का दबाव बढ़ गया है।

  - **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और शक्ति प्रदर्शन का यह दौर आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

  - **आम जनता के लिए:** नेताओं के इन बयानों से नीतिगत बहसों में तेजी आती है, जिससे स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था से जुड़ी उम्मीदें बढ़ जाती हैं।

  - **किसानों के लिए:** सूखे और राहत पैकेज के दावों के बीच किसानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और बीमा दावों के क्रियान्वयन पर पैनी नजर बनी हुई है।

  - **राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए:** दोनों धड़ों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाती है लेकिन राज्य के राजनीतिक माहौल में तनाव भी पैदा करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
दशहरे के पावन पर्व पर महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं द्वारा दिए गए तीखे बयान और राजनीतिक टकराव राज्य की मौजूदा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और आगामी राजनीतिक समीकरणों का परिणाम हैं।

  - **सूखा और कृषि संकट:** महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे के आसन्न खतरे और पिछले वर्ष हुई भारी बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान ने राजनीतिक दलों को सरकार को घेरने का मुख्य मुद्दा दे दिया है।

  - **कानून व्यवस्था की घटनाएं:** मुंबई में हालिया सुरक्षा चूक और आपराधिक गतिविधियों ने विपक्षी दलों को पुलिस प्रशासन और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का अवसर प्रदान किया है।

  - **दशहरा रैलियों की परंपरा:** शिवसेना की पारंपरिक दशहरा रैली महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा मंच रही है, जहां दोनों धड़े अपनी राजनीतिक वैधता साबित करने के लिए आक्रामक रुख अपनाते हैं।

  - **दलबदल और सांगठनिक विस्तार:** पार्टी के विभाजन के बाद दोनों गुटों द्वारा लगातार अपने जनाधार को मजबूत करने और नेताओं व कार्यकर्ताओं को अपने पाले में लाने की होड़ मची हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. दशहरे के मौके पर उद्धव ठाकरे ने क्या मुख्य बयान दिया?
उद्धव ठाकरे ने कहा कि भगवा माहौल सिर्फ महाराष्ट्र के विधान भवन में नहीं बल्कि दिल्ली के तख्त पर भी लहराना चाहिए।

### 2. एकनाथ शिंदे ने किसानों की मदद के लिए क्या कदम उठाया?
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सूखे से पीड़ित किसानों के लिए सौ ट्रक भरकर राहत सामग्री भेजी है और आगे भी मदद भेजने की बात कही है।

### 3. उद्धव ठाकरे ने सरकार पर सूखे को लेकर क्या आरोप लगाया?
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़ी घोषणाएं कर रही है और किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता या पीक बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है।

### 4. एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर क्या तंज कसा?
शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने कभी कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा और पीछे के दरवाजे से मुख्यमंत्री बने थे।

### 5. कानून व्यवस्था को लेकर उद्धव ठाकरे ने क्या चिंता जताई?
उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि नाकाबंदी के बावजूद हथियार लेकर गुंडे मुंबई में कैसे घुस आए और पुलिस तंत्र को केवल नौकर बनाकर रखा गया है।

### 6. शिवसेना की ताकत का जिक्र करते हुए शिंदे ने क्या आंकड़े दिए?
एकनाथ शिंदे ने बताया कि आज शिवसेना के पास 15 सांसद, 74 विधायक और एक हजार से अधिक नगरसेवक हैं।

### 7. राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान को लेकर शिंदे ने क्या कहा?
शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के कारण आज पाकिस्तान दुनिया के सामने भीख मांगने को मजबूर है।

### 8. रिजीम चेंज के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने क्या रुख अपनाया?
उद्धव ठाकरे ने समर्थकों के सामने स्पष्ट किया कि यदि सैनिकों के नाम काटे जाएंगे तो वे निश्चित रूप से सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज करेंगे।

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