दिमागी नक्सल वाले बयान पर नसीरुद्दीन शाह के खिलाफ तीखा हमला, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने दी देश छोड़ने की सलाह अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा खुद को दिमागी नक्सल बताए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई हस्तियों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है। बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने हालिया बयानों के चलते एक नए राजनीतिक और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए कहा था कि उन्हें स्वयं के दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। इस वीडियो में उन्होंने शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और चेतावनी भरे लहजे में अपनी बात रखी थी। उनके इस सार्वजनिक रुख के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और अन्य प्रमुख हस्तियों ने उनके खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का तीखा पलटवार महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने नसीरुद्दीन शाह की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अपना सामान बांधकर पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू राष्ट्र में रहकर कमाई करते हैं, लेकिन उनकी निष्ठा सीमा पार की ताकतों के साथ जुड़ी रहती है। उनके अनुसार, पड़ोसी मुल्क में बैठे संचालक ऐसे तत्वों को स्क्रिप्ट मुहैया कराते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिनेता इसी देश में पले-बढ़े हैं और उनकी सिनेमाई पहचान भी यहीं की जनता की वजह से बनी है, क्योंकि उनकी फिल्में पाकिस्तान में नहीं चलती थीं। नितेश राणे ने आगे कहा कि यदि किसी को देश की व्यवस्था से इतनी शिकायत है और वह खुद को दिमागी नक्सल कहलाने में गर्व महसूस करता है, तो उसके लिए वहां जाना ही बेहतर है जहां इस तरह की सोच रखने वालों की बड़ी तादाद मौजूद है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की पहचान और स्वीकार्यता के बिना किसी भी कलाकार को यह मुकाम नहीं मिल सकता था। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी राय रखी। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह एक कलाकार के तौर पर नसीरुद्दीन शाह का आदर करते थे और उनके काम को पसंद करते थे, लेकिन उनका यह रूप लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है। उन्होंने अभिनेता की विचारधारा को खतरनाक अर्बन नक्सल सोच से जुड़ा हुआ करार दिया। वहीं, फिल्म जगत से जुड़े अभिनेता पुनीत इस्सर ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साथी कलाकार के रूप में वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा केवल एकतरफा, वामपंथी और नक्सल-समर्थक नजर आती है। पुनीत इस्सर ने सुझाव दिया कि यदि किसी को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई मौजूदा सत्ता व्यवस्था से असंतोष है, तो बयानबाजी करने के बजाय राजनीति के मैदान में उतरकर सीधे चुनाव लड़ना चाहिए। इसका आप पर असर इस विवाद का सीधा असर देश में अभिव्यक्ति की आजादी, सिनेमा और राजनीतिक संवाद के तौर-तरीकों पर पड़ता है। • कलाकारों के लिए सबक: राजनीतिक और वैचारिक बयानों पर सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं बेहद तीखी हो रही हैं। रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अब अपने बयानों के बाद व्यापक सामाजिक और राजनीतिक जांच का सामना करना पड़ता है। • राजनीतिक ध्रुवीकरण: फिल्म जगत की हस्तियों की टिप्पणियों पर राजनीतिक दलों के कड़े रुख से विमर्श और अधिक तीखा हो जाता है। इससे आम नागरिकों और समर्थकों के बीच वैचारिक विभाजन और गहरा होता है। • सोशल मीडिया संवाद: इंटरनेट पर सार्वजनिक संवाद का स्तर अधिक आक्रामक हो रहा है। आम उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन बहस में शामिल होते समय संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की जरूरत है। • नागरिक भागीदारी: असंतोष व्यक्त करने के लोकतांत्रिक तरीकों पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों को केवल बयानबाजी करने के बजाय चुनावी और संवैधानिक प्रक्रियाओं में भाग लेने की सलाह दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक हालिया वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने खुद को दिमागी नक्सल बताया था और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। • विवादित वीडियो बयान: अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्हें स्वयं के दिमागी नक्सल होने पर गर्व है और उन्होंने मौजूदा शासन पर कड़ी टिप्पणियां कीं। इसी बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया। • नेताओं की त्वरित प्रतिक्रिया: अभिनेता के इस रुख को सत्ताधारी दल के नेताओं ने राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध माना। नतीजतन, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खुलकर उनके खिलाफ बयान दिए। • सिनेमा बिरादरी से असंतोष: फिल्म उद्योग से जुड़े अभिनेता पुनीत इस्सर ने भी इस पर एतराज जताया और इसे एकतरफा विचारधारा करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक असहमति को चुनावी मैदान में साबित किया जाना चाहिए। सवाल-जवाब 1. नसीरुद्दीन शाह को लेकर नया विवाद क्यों खड़ा हुआ है? नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो साझा कर कहा था कि उन्हें खुद के दिमागी नक्सल होने पर गर्व है और उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए थे। 2. महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी? नितेश राणे ने अभिनेता पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें अपना सामान बांधकर पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी। 3. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह के बारे में क्या कहा? किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह अभिनेता का सम्मान करते थे, लेकिन उनका यह रुख भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है। 4. अभिनेता पुनीत इस्सर ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया? पुनीत इस्सर ने कहा कि अभिनेता की सोच एकतरफा और वामपंथी है, और अगर उन्हें सरकार पसंद नहीं है तो उन्हें राजनीति में आकर चुनाव लड़ना चाहिए। https://trendkia.com/maharashtra/dimagi-naksala-vale-bayana-para-naseeruddin-shah-ke-khilapha-tikha-hamala-maharashtra-ke-mntri-nitesh-rane-ne-di-desha-chhorane-ki-53088 TrendKia — Har trend, sabse pehle.