# चुनाव आयोग के खिलाफ साथ आए ठाकरे भाई, संजय राउत ने नए सिरे से मतदान कराने की मांग उठाई

> महाराष्ट्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एक साथ विरोध मार्च निकालने जा रहे हैं, जिसे लेकर संजय राउत ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/election-commission-ke-khilapha-satha-ae-thackeray-bhai-sanjay-raut-ne-nae-sire-se-matadana-karane-ki-manga-uthai-42760 · **Language:** Hindi
**Tags:** उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, संजय राउत, ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग, एमपीएससी, महाराष्ट्र राजनीति

महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे अंतराल के बाद एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है, जहां राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने जा रहे हैं। विराट गर्जना मोर्चा के बैनर तले आयोजित होने वाले इस प्रदर्शन को महाविकास अघाड़ी का पूरा सहयोग मिला हुआ है। इस कदम के साथ ही दोनों भाई एक मंच पर आ रहे हैं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

## मतदान प्रक्रिया पर कड़े सवाल और पुनर्मतदान की मांग
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस मोर्चे को लेकर तीखे तेवर दिखाए हैं और मौजूदा हालात की तुलना ऐतिहासिक संघर्ष से की है। उन्होंने कहा, 
> “यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।”
 राउत का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में निष्पक्षता नहीं बची है और जनप्रतिनिधियों की निष्ठा बदली जा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया बयानों का हवाला देते हुए राउत ने मांग की है कि हाल में संपन्न हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के संचालन पर सवाल उठाते हुए वर्तमान सीईसी ज्ञानेश कुमार और पूर्व सीईसी राजीव कुमार दोनों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था में हेरफेर और अनियमितताएं हुई हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी चोट पहुंची है। राउत के अनुसार, मुंबई से शुरू हो रही यह हलचल पूरे देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले रही है।

## पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन और विपक्षी समर्थन
एक तरफ जहां चुनावी व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी चल रही है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का आक्रोश भी सामने आ रहा है। पुणे में एमपीएससी के छात्र पिछले तीन-चार दिनों से लगातार दिन-रात धरने पर डटे हुए हैं। छात्रों की मुख्य मांगों में भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, पर्चा लीक मामलों की पारदर्शी जांच और सरकारी महकमों में हजारों रिक्त पदों को अविलंब भरना शामिल है।

राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी और कहा कि रोहित पवार ने इस समस्या को प्रमुखता से सामने रखा है। राउत ने बताया कि प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन मिले हैं और छात्रों में अपने भविष्य को लेकर भारी बेचैनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को नोटिस थमाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। छात्र आंदोलन को सीधा समर्थन देने के लिए राउत ने शाम 6:30 बजे पुणे में धरना स्थल पर जाकर युवाओं से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।

## इसका आप पर असर
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और छात्र आंदोलन का सीधा प्रभाव राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और युवाओं की भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों से चुनावी सुधारों पर बहस तेज हो सकती है। आने वाले चुनावों में निष्पक्षता और निगरानी को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।
- **महाराष्ट्र में:** ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने से राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसका असर आगामी स्थानीय निकाय और अन्य राजनीतिक गतिविधियों पर साफ दिखाई देगा।
- **परीक्षार्थियों के लिए:** पुणे में चल रहे धरने और उसे मिल रहे राजनीतिक समर्थन के कारण सरकार पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने का दबाव बनेगा। हजारों खाली पदों को भरने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग पर प्रशासन को जल्द फैसला लेना पड़ सकता है।
- **आम जनता के लिए:** मुंबई और पुणे में होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों और मोर्चों के चलते यातायात और दैनिक आवाजाही प्रभावित हो सकती है। आम नागरिकों को प्रदर्शन वाले इलाकों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष के बढ़ते अविश्वास और प्रशासनिक देरी से उपजे असंतोष के कारण पैदा हुआ है।

- **चुनावी परिणाम और मिलीभगत के आरोप:** विपक्षी दलों ने हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी और हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का मानना है कि चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है, जिसने इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि तैयार की।
- **ठाकरे भाइयों का साझा मंच:** दोनों राजनीतिक दलों ने महसूस किया कि अलग-अलग लड़ने के बजाय एक संयुक्त मोर्चा बनाकर दबाव बनाना अधिक प्रभावी होगा। महाविकास अघाड़ी के समर्थन ने इस एकजुटता को और मजबूती दी है।
- **एमपीएससी अभ्यर्थियों की अनदेखी:** सरकारी नौकरियों में भर्ती में लगातार हो रही देरी और पेपर लीक के मामलों ने छात्रों में भारी असंतोष भर दिया है। सरकारी आश्वासनों के बावजूद ठोस कदम न उठाए जाने के कारण छात्र दिन-रात धरने पर बैठने को मजबूर हुए।

## सवाल-जवाब

### 1. विराट गर्जना मोर्चा का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस मोर्चे का नेतृत्व शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

### 2. यह विरोध प्रदर्शन किसके खिलाफ आयोजित किया गया है?
यह विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आयोजित किया गया है।

### 3. संजय राउत ने चुनावों को लेकर क्या मांग रखी है?
संजय राउत ने हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

### 4. पुणे में एमपीएससी के छात्र क्यों धरना दे रहे हैं?
छात्र पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, परीक्षा में सुधार और हजारों खाली सरकारी पदों पर तत्काल भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

### 5. संजय राउत छात्रों के प्रदर्शन स्थल पर कब जाने वाले हैं?
संजय राउत ने शाम 6:30 बजे पुणे में एमपीएससी छात्रों के धरना स्थल पर पहुंचने की घोषणा की है।

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