होटल में कॉकरोच मिलने पर लाइसेंस सस्पेंड करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, व्यावहारिक नजरिया अपनाएं बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए द्वारा एक के बाद एक होटलों के लाइसेंस सस्पेंड किए जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में ऐसे मामलों में व्यावहारिक नजरिया अपनाना जरूरी है, यह टिप्पणी नवी मुंबई के एक होटल की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। होटल में मक्खी या कॉकरोच दिखने पर लाइसेंस सीधे रद्द कर देना कितना सही है, इस सवाल पर बॉम्बे हाईकोर्ट की एक टिप्पणी हाल ही में चर्चा में है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए द्वारा एक के बाद एक होटलों के लाइसेंस सस्पेंड किए जाने के मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि भारत जैसे देश में इस तरह के मामलों को व्यावहारिक नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि सिर्फ किसी चेकलिस्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई कर दी जाए। बीते दिनों होटलों के लाइसेंस निलंबन का मामला पहले भी सुर्खियों में रहा था, इसलिए अदालत की इस टिप्पणी को अहम माना जा रहा है। मामला क्या है? यह पूरा विवाद पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ जब नवी मुंबई के एक फाइव स्टार होटल पार्क इन बाय रेडिसन नवी मुंबई ने एफडीए की कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। होटल प्रबंधन ने अपनी याचिका में एफडीए के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। गौरतलब है कि यह सुनवाई ऐसे समय पर हो रही है जब महाराष्ट्र में आयुक्त तुकाराम मुंढे की अगुवाई में एफडीए पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर निरीक्षण और कार्रवाई अभियान चला रहा है। इसी वजह से अदालत ने राज्यभर में अब तक की गई सभी निरीक्षण कार्रवाइयों का पूरा ब्योरा भी मांगा है, ताकि यह समझा जा सके कि आखिर किस आधार पर अलग अलग होटलों पर कार्रवाई की जा रही है और क्या हर जगह एक जैसा तरीका अपनाया जा रहा है। जज ने खुद सुनाया अपना अनुभव जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अखंड की बेंच ने सुनवाई के दौरान हल्के फुल्के अंदाज़ में यह सवाल उठाया कि आखिर ऐसे मामलों में कार्रवाई का मापदंड क्या होना चाहिए। जब बहस कीड़े मकोड़ों के मुद्दे तक पहुंची, तो बेंच ने खुद अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले हफ्ते उनकी अपनी मेज पर, ठीक सामने, एक बड़ा कीड़ा बैठा हुआ था, और उसी दौरान वहां एक मक्खी भी उड़ रही थी। बेंच ने कहा कि ऐसे हालात में भी कुछ खास नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह भारत है। इसी संदर्भ में बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "हम भारत में हैं; हमें व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना होगा।" होटल के वकील की दलील होटल की तरफ से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि असल मुद्दा किसी एक कॉकरोच या फिर दस कॉकरोच की मौजूदगी का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि सिर्फ एक चेकलिस्ट के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। वकील ने आगे यह भी दलील दी कि लाइसेंस सस्पेंड करने जैसा बड़ा कदम उठाने से पहले एफडीए ने अपने फैसले के समर्थन में लिखित रूप में पर्याप्त और ठोस वजहें दर्ज नहीं कीं, जबकि इस तरह की सख्त कार्रवाई के लिए ऐसा करना जरूरी माना जाता है। वकील की दलील का मकसद यह दिखाना था कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित वजहों का अभाव रहा। अगली सुनवाई और अन्य घटनाक्रम इस मामले में अगली सुनवाई आने वाले शुक्रवार को तय की गई है, जिसमें एफडीए को अपने निरीक्षण अभियान से जुड़ा ब्योरा अदालत के सामने पेश करना होगा। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार डांस बारों को लेकर भी सख्ती दिखा चुकी है, जिसके तहत अब होटल, बार और रेस्तरां कानून में मौजूद खामियों का फायदा नहीं उठा पाएंगे। इन दोनों घटनाक्रमों से साफ है कि राज्य में होटल और बार कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक निगरानी लगातार बढ़ रही है। इसका आप पर असर यह मामला सीधे तौर पर होटल कारोबार और आम ग्राहकों दोनों को प्रभावित करता है। • भारत में: यह टिप्पणी देशभर की खाद्य सुरक्षा एजेंसियों को याद दिलाती है कि लाइसेंस निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई से पहले ठोस और लिखित वजहें दर्ज करना जरूरी है, सिर्फ चेकलिस्ट काफी नहीं। • महाराष्ट्र में: नवी मुंबई और राज्यभर के होटल, बार व रेस्तरां संचालकों को एफडीए के चल रहे निरीक्षण अभियान में सख्ती का सामना करना पड़ सकता है, जबकि ग्राहकों के लिए स्वच्छता जांच का मुद्दा आगे भी सुर्खियों में बना रहेगा। सवाल-जवाब 1. यह विवाद किस होटल से जुड़ा है? यह मामला नवी मुंबई के फाइव स्टार होटल पार्क इन बाय रेडिसन नवी मुंबई से जुड़ा है, जिसने एफडीए की कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 2. बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की? अदालत ने कहा कि भारत में मक्खी या कीड़े जैसे मामलों में व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, न कि सिर्फ चेकलिस्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाए। 3. होटल के वकील की मुख्य दलील क्या थी? वकील ने कहा कि सिर्फ एक चेकलिस्ट के आधार पर लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता और एफडीए ने अपने फैसले के ठोस, लिखित कारण दर्ज नहीं किए। 4. इस मामले की सुनवाई किन जजों ने की? जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अखंड की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। 5. अगली सुनवाई कब होगी? इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले शुक्रवार को होगी, जिसमें एफडीए को निरीक्षण अभियान का ब्योरा पेश करना होगा। 6. एफडीए की राज्यव्यापी कार्रवाई का नेतृत्व कौन कर रहा है? महाराष्ट्र में आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए राज्यभर में निरीक्षण अभियान चला रहा है। https://trendkia.com/maharashtra/hotala-men-kokarocha-milane-para-laisensa-saspenda-karane-para-bombay-high-court-ne-kaha-vyavaharika-najariya-apanaen-11815 TrendKia — Har trend, sabse pehle.