# आईआईटी बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का पुराना ईमेल सामने आया, कैंपस में भेदभाव रोकने की दी थी सीख

> आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच जारी है। इस बीच आरोपी बनाए गए प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का जुलाई 2024 का एक पुराना ईमेल सामने आया है, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को जाति और रैंक पूछने से मना किया था।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/iit-bombay-chhatra-khudakushi-mamale-men-prophesara-suryanarayana-dulla-ka-purana-imela-samane-aya-kainpasa-men-bhedabhava-rokane--36944 · **Language:** Hindi
**Tags:** आईआईटी बॉम्बे, साहिल वाकोडे, सूर्यनारायण दुल्ला, मुंबई क्राइम ब्रांच, कैंपस भेदभाव, एससी एसटी एक्ट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में पुलिस की पड़ताल लगातार आगे बढ़ रही है। इस घटना की तहकीकात कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने संस्थान के कई अन्य विद्यार्थियों से पूछताछ की है और उनके आधिकारिक बयान कलमबद्ध किए हैं। जांच अधिकारियों ने विशेष रूप से परीक्षा कक्ष में उपस्थित रहे सहपाठियों और साहिल के करीबी मित्रों से बातचीत करके उस समय के हालात को समझने का प्रयास किया है। साहिल के परिजनों ने इस दुखद कदम के लिए संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और प्रोफेसर को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है।

## जांच के बीच चर्चा का केंद्र बना जुलाई 2024 का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला द्वारा पूर्व में विद्यार्थियों को भेजा गया एक आधिकारिक ईमेल सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। यह संवाद 27 जुलाई 2024 की तारीख का है, जब प्रोफेसर दुल्ला संस्थान में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के प्रशासनिक पद पर सेवाएं दे रहे थे। उस समय उन्होंने पूरे छात्र समुदाय को संबोधित करते हुए एक विस्तृत परामर्श जारी किया था। इस संदेश का मुख्य उद्देश्य संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार के सामाजिक या व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले अनुचित व्यवहार पर रोक लगाना था।

## जाति, प्रवेश श्रेणी और परीक्षा रैंक पूछने पर लगाई थी रोक
उस ईमेल में प्रोफेसर दुल्ला ने विद्यार्थियों को सख्त परामर्श दिया था कि वे अपने किसी भी सहपाठी से उसकी जाति, जन्म स्थान, दाखिले की श्रेणी, जेईई एडवांस्ड की रैंक या गेट परीक्षा के अंकों के बारे में अनावश्यक पूछताछ न करें। प्रोफेसर का कहना था कि कई बार छात्र केवल साधारण उत्सुकता या बातचीत शुरू करने के इरादे से ऐसे सवाल पूछ लेते हैं, लेकिन यह जिज्ञासा अनजाने में ही साथी विद्यार्थी के प्रति पूर्वाग्रह, हीन भावना या भेदभावपूर्ण वातावरण को जन्म दे देती है। इसलिए संस्थान की अकादमिक व्यवस्था में इस तरह के व्यक्तिगत प्रश्नों से पूरी तरह बचना आवश्यक बताया गया था।

## संवेदनशील विषयों और डिजिटल सामग्री को लेकर दी थी चेतावनी
प्रोफेसर ने परिसर के भीतर आपसी बातचीत में गरिमा और संवेदनशीलता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने छात्रों को स्पष्ट रूप से सचेत किया था कि धर्म, लिंग, सामाजिक पहचान अथवा किसी व्यक्ति के लैंगिक रुझान को लेकर अनुचित टिप्पणियां बिल्कुल न की जाएं। इसके अलावा, विद्यार्थियों को जातिवादी, सांप्रदायिक, महिला विरोधी या किसी की सेक्शुअल ओरिएंटेशन का मजाक उड़ाने वाले संदेश, चुटकुले या अन्य आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को साझा या आगे भेजने से पूरी तरह दूर रहने का निर्देश दिया गया था। ईमेल में यह भी साफ किया गया था कि ऐसी गतिविधियां शैक्षणिक माहौल को विषाक्त बनाती हैं और ऐसा करने वालों के खिलाफ संस्थान कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है।

## मौजूदा आरोपों के बीच ईमेल के मायने
यह पुराना पत्राचार ऐसे दौर में फिर से सामने आया है जब प्रोफेसर दुल्ला स्वयं छात्र के माता-पिता की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों और आपराधिक जांच का सामना कर रहे हैं। उस दौर में डीन के रूप में उनका भेजा गया यह पत्र दर्शाता है कि संस्थान के स्तर पर जातिगत और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जबकि वर्तमान में उन पर लगे आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रही है।

## इसका आप पर असर
यह घटना उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत संवेदनशीलता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े नियमों की पड़ताल करती है।

- **भारत में:** देश भर के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्रों की पृष्ठभूमि और रैंक को लेकर होने वाली अनौपचारिक बातचीत पर संस्थान स्तर पर अधिक सतर्कता बरती जाएगी। इससे आने वाले समय में प्रवेश परीक्षाओं के स्कोर और श्रेणी पूछने की प्रवृत्ति पर सख्त आंतरिक निगरानी देखने को मिल सकती है।
- **मुंबई में:** आईआईटी बॉम्बे के भीतर चल रही पुलिस जांच के चलते हॉस्टल और विभाग के छात्रों से पूछताछ का दौर जारी रहेगा। संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों को पुलिस और आंतरिक कमेटियों के समक्ष अपने अनुभव साझा करने पड़ सकते हैं।
- **अभिभावकों के लिए:** बच्चों को दाखिला दिलाने वाले माता-पिता शैक्षणिक परिसरों में मौजूद सपोर्ट सिस्टम और फैकल्टी के व्यवहार को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं। वे संस्थानों से निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की मांग उठा सकते हैं।
- **संस्थान प्रबंधन के लिए:** प्रशासनिक पदों पर रहने वाले प्राध्यापकों और वार्डन के लिए जारी गाइडलाइंस के वास्तविक क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईमेल और नोटिस केवल कागजों तक सीमित न रहें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम और उसके बाद परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है।

- **तात्कालिक घटना:** संस्थान के छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद उनके परिजनों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया।
- **पुलिसिया कार्रवाई:** मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, जिसने परीक्षा कक्ष में मौजूद विद्यार्थियों और साहिल के दोस्तों के बयान लेने शुरू किए। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान प्रोफेसर का पिछला रिकॉर्ड और पुराने संदेश सामने आए।
- **पुराना पत्राचार:** जुलाई 2024 में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स पद पर रहते हुए प्रोफेसर दुल्ला ने खुद जातिगत व सामाजिक भेदभाव रोकने के लिए छात्रों को विस्तृत ईमेल लिखा था। वर्तमान में उन पर लगे आरोपों के विपरीत उस ईमेल में दर्ज सलाह के कारण वह संदेश चर्चा का विषय बन गया।

## सवाल-जवाब

### 1. साहिल वाकोडे मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच किन लोगों के बयान दर्ज कर रही है?
मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने परीक्षा कक्ष में मौजूद विद्यार्थियों और साहिल के दोस्तों के बयान दर्ज किए हैं।

### 2. आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
साहिल के माता-पिता के आरोपों के बाद उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया है और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है।

### 3. प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का पुराना ईमेल किस तारीख का है?
यह ईमेल 27 जुलाई 2024 को भेजा गया था, जब वे संस्थान में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के पद पर तैनात थे।

### 4. जुलाई 2024 के ईमेल में छात्रों को क्या न पूछने की हिदायत दी गई थी?
ईमेल में छात्रों को किसी साथी से उसकी जाति, जन्म श्रेणी, जेईई एडवांस्ड रैंक या गेट स्कोर पूछने से बचने की सलाह दी गई थी।

### 5. ईमेल में किस प्रकार के डिजिटल संदेशों पर रोक लगाने की बात कही गई थी?
ईमेल में जातिवादी, धार्मिक, महिला विरोधी और सेक्शुअल ओरिएंटेशन से जुड़े आपत्तिजनक चुटकुलों व संदेशों को शेयर करने पर मनाही की गई थी।

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