आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में माता-पिता ने मांगी पुलिस सुरक्षा, कमिश्नर को भेजा पत्र आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके माता-पिता ने सुरक्षा खतरे की आशंका जताते हुए मुंबई पुलिस से तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनके परिवार ने अपनी जान पर खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। छात्र के पिता रवींद्र वाकोडे और मां सोनाली वाकोडे की ओर से उनके कानूनी प्रतिनिधि एडवोकेट निखिल कांबले ने 29 सितंबर को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया। यह पत्र मुंबई पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ कानून एवं व्यवस्था विभाग के संयुक्त आयुक्त और अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त को भेजा गया है, जिसमें छात्र के माता-पिता को तुरंत चौबीसों घंटे सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया गया है। एफआईआर और कानूनी धाराओं का ब्योरा साहिल वाकोडे प्रतिष्ठित संस्थान में द्वितीय वर्ष के छात्र थे, जिनकी 18 सितंबर, 2026 को परिसर स्थित हॉस्टल में मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के संबंध में पवई पुलिस थाने में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट यानी एफआईआर संख्या 999/2026 दर्ज की गई है। इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 108 के अतिरिक्त अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और धारा 3(1)(s) के तहत गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं। वर्तमान समय में मामले की गहन छानबीन मुंबई अपराध शाखा की डिटेक्शन यूनिट-1 द्वारा की जा रही है। प्राथमिकी में दर्ज नाम और गिरफ्तारी पर सवाल प्रकरण में दर्ज शिकायत के अनुसार, आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर श्रीरेश बी., केदार और प्रोफेसर सूर्यनारायण डोला समेत कुछ अन्य लोगों के नाम आरोपी के तौर पर सामने आए हैं। उच्चाधिकारियों को भेजे गए पत्र में अधिवक्ता ने विशेष रूप से रेखांकित किया है कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बावजूद नामजद व्यक्तियों को अभी तक पुलिस हिरासत में नहीं लिया गया है। इस विफलता के कारण परिवार के भीतर असुरक्षा की भावना काफी गहरा गई है। सुरक्षा की मांग और कानूनी प्रावधान वकील की ओर से भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 23 सितंबर को कुछ टेलीविजन समाचार चैनलों पर छात्र की परीक्षा से संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्रसारित की गई थी। इस संवेदनशील फुटेज के सार्वजनिक होने के बाद से परिवार को धमकियों और अनुचित दबाव का अंदेशा सता रहा है। याचिका में मांग की गई है कि रवींद्र और सोनाली वाकोडे को उनके आवास पर नियमित सुरक्षा देने के साथ-साथ जांच एजेंसियों के समक्ष पेशी और अदालती सुनवाई के दौरान सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित कराया जाए। पत्र में यह भी स्मरण कराया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम की धारा 15A के तहत पीड़ितों, उनके आश्रितों और गवाहों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी अथवा हिंसा से बचाना सीधे तौर पर राज्य प्रशासन का दायित्व है। इसका आप पर असर छात्र की मौत के मामले में परिजनों द्वारा उठाई गई सुरक्षा मांग से आपराधिक मुकदमों में पीड़ित परिवारों के वैधानिक अधिकारों का विषय फिर से केंद्र में आ गया है। • भारत में: अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत दर्ज मामलों में पीड़ितों और गवाहों के वैधानिक सुरक्षा अधिकारों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। यह मामला दर्शाता है कि संवेदनशील मुकदमों में जांच के दौरान परिजनों को कानूनी सुरक्षा की मांग करने का पूरा संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। • मुंबई में: पवई पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच पर निष्पक्ष जांच पूरी करने के साथ-साथ परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने का प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है। अदालती कार्यवाही और पूछताछ के दौरान वाकोडे परिवार को स्थानीय पुलिस द्वारा आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रदान किया जा सकता है। • संस्थान परिसर में: उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच निगरानी बढ़ सकती है। कैंपस प्रशासन को आंतरिक जांच और पुलिस एजेंसियों के साथ समन्वय को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा। • आम नागरिकों के लिए: किसी भी गंभीर आपराधिक जांच में यदि परिवार पर दबाव या मीडिया लीक्स का खतरा हो, तो वे संबंधित पुलिस प्रमुखों से औपचारिक सुरक्षा की मांग कर सकते हैं। इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता और विशेष अधिनियमों के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत के बाद परिवार द्वारा पुलिस सुरक्षा मांगे जाने की मुख्य वजह मीडिया लीक्स और आरोपियों की गिरफ्तारी न होना है। • सीसीटीवी फुटेज का प्रसारण: 23 सितंबर को कई टेलीविजन समाचार चैनलों पर छात्र की परीक्षा से जुड़ा आंतरिक सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक रूप से प्रसारित किया गया था। इस फुटेज के सामने आने के बाद परिवार ने अपनी पहचान और सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई। • नामजद आरोपियों की गैर-गिरफ्तारी: एफआईआर में संस्थान के निदेशक और अन्य वरिष्ठ कर्मियों के नाम दर्ज होने के बावजूद पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। परिजनों का मानना है कि आरोपियों के खुले घूमने से उन पर गवाही वापस लेने या समझौता करने का दबाव बनाया जा सकता है। • जांच में सुरक्षा का वैधानिक अधिकार: विशेष कानून की धारा 15A स्पष्ट रूप से गवाहों और पीड़ितों को प्रशासनिक संरक्षण प्रदान करने की गारंटी देती है। इसी कानूनी अधिकार का उपयोग करते हुए अधिवक्ता ने औपचारिक पत्र के माध्यम से सुरक्षा की मांग उठाई है। सवाल-जवाब 1. साहिल वाकोडे कौन थे और उनकी मौत कब हुई थी? साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे में द्वितीय वर्ष के छात्र थे, जिनकी 18 सितंबर, 2026 को हॉस्टल में मौत हो गई थी। 2. साहिल के माता-पिता ने पुलिस सुरक्षा की मांग क्यों की है? 23 सितंबर को टीवी चैनलों पर परीक्षा का सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने के बाद परिवार ने दबाव और धमकियों का डर जताते हुए सुरक्षा मांगी है। 3. इस मामले में कौन-कौन सी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है? पवई पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 999/2026 दर्ज की गई है, जिसमें आईपीसी की धारा 108 और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं 3(1)(r) और 3(1)(s) शामिल हैं। 4. शिकायत में किन प्रमुख व्यक्तियों के नाम शामिल हैं? शिकायत में आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर श्रीरेश बी., केदार और प्रोफेसर सूर्यनारायण डोला समेत कुछ अन्य लोगों के नाम हैं। 5. मामले की जांच वर्तमान में कौन सी एजेंसी कर रही है? इस प्रकरण की जांच मुंबई अपराध शाखा की डिटेक्शन यूनिट-1 द्वारा की जा रही है। 6. वकील ने सुरक्षा के लिए किस कानूनी प्रावधान का हवाला दिया है? अधिवक्ता ने एससी/एसटी अत्याचार रोकथाम अधिनियम की धारा 15A का हवाला दिया है, जो पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा को राज्य की जिम्मेदारी मानती है। https://trendkia.com/maharashtra/iit-bombay-chhatra-sahil-wakode-ki-mauta-mamale-men-mata-pita-ne-mangi-pulisa-suraksha-kamishnara-ko-bheja-patra-40409 TrendKia — Har trend, sabse pehle.