{
  "type": "article",
  "title": "कर्जमाफी और सूखे के मुआवजे को लेकर मुंबई कूच, वर्षा बंगले पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे किसान",
  "summary": "सूखा राहत, कृषि ऋण माफी और योजनाओं के बकाए को लेकर अकोले से मुंबई के लिए विशाल वाहन मार्च शुरू हुआ है, जिसमें हजारों किसान और ग्रामीण मजदूर शामिल हैं।",
  "content": "महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में गहराते संकट और अनसुलझी मांगों को लेकर हजारों आंदोलनकारी राजधानी मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं। अकोले से शुरू हुए इस विशाल वाहन मार्च में किसानों के साथ-साथ खेतिहर मजदूर और विभिन्न ग्रामीण योजनाओं से जुड़े कर्मी शामिल हैं, जिनका मकसद सीधे मुख्यमंत्री के आवास वर्षा बंगले तक अपनी बात पहुंचाना है। इस मुहिम में राज्य के 20 से ज्यादा जिलों से पहुंचे करीब 12,000 प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जो लगभग 1,000 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ निकले हैं।\n\nसड़क पर उतरा जनसैलाब, लाल झंडों के साथ मार्च का आगाज\nवाहनों का यह सफर शुरू होने से पूर्व अकोले नगर में लाल झंडे थामे कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। इस रैली का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विजू कृष्णन, राष्ट्रीय सहसचिव डॉ. अजित नवले तथा माकपा विधायक विनोद निकोले सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों ने किया। जैसे ही यह मार्च आगे बढ़ा, नासिक जिले से आई गाड़ियों का एक बड़ा जत्था घोटी में आकर इस मुख्य काफिले से जुड़ गया।\n\nसूखा राहत, बीमा भुगतान और कर्जमाफी पर तीखे सवाल\nप्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य के कुल 358 तालुकों में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है, मगर प्रशासन की तरफ से प्रति परिवार दी जाने वाली 5,000 रुपये की मदद बेहद कम है। आंदोलनकारियों ने फसल बर्बादी के एवज में सम्मानजनक मुआवजा देने तथा फसल बीमा मिलने में खड़ी हो रही अड़चनों को फौरन दूर करने पर जोर दिया है।\n\nइसके साथ ही, दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की सुविधा उन काश्तकारों को भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है जो लगातार और समय पर अपने बैंक लोन चुकता करते रहे हैं। प्रदर्शनकारी वन भूमि, देवस्थान ट्रस्ट, इनाम तथा चरागाह श्रेणी की जमीनों पर वर्षों से हल चला रहे किसानों के नाम पर आधिकारिक भूमि अधिकार दर्ज करने का मुद्दा भी उठा रहे हैं।\n\nयोजना कर्मियों का साथ और कल्याणकारी योजनाओं की बहाली की मांग\nयह आंदोलन केवल जोतदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पेसा कर्मी, भवन निर्माण मजदूर, पोषण आहार कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता तथा आंगनवाड़ी सहायिकाएं भी पूरी सक्रियता से शामिल हैं। संगठन का जोर ग्रामीण मजदूरों के लिए न्यायसंगत पारिश्रमिक, पुख्ता रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवच तैयार करने पर है।\n\nकाफिले में शामिल लोग नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के तहत रुकी हुई दो किश्तों का पैसा जल्द खातों में डालने की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ई-केवाईसी प्रक्रिया में आई रुकावटों की वजह से लाडकी बहिण योजना से बाहर हो चुकीं लगभग 81 लाख महिलाओं को पुनः शामिल करने, उनका अटका हुआ मानधन चुकाने और सत्यापन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने की आवाज उठाई गई है।\n\nसत्याग्रह के बाद नोटिस की कार्रवाई पर नाराजगी\nमुंबई कूच का यह निर्णय 21 से 26 अक्टूबर के बीच अकोले में चले महा-मुक्काम सत्याग्रह के बाद लिया गया। किसान सभा के पदाधिकारियों का आरोप है कि बातचीत का रास्ता निकालने के बदले प्रशासन ने पुलिस के जरिए नोटिस थमाए और उन्हें मुख्यमंत्री आवास तक जाने से रोकने के जतन किए। संगठन ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी पीड़ा सरकार के समक्ष रखना हर नागरिक का अधिकार है, जिसे कानूनी नोटिसों के दम पर दबाया नहीं जा सकता।\n\nइगतपुरी में रात्रि विश्राम के बाद कसारा घाट से आगे बढ़ेगा काफिला\nतय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार की रात यह विशाल काफिला इगतपुरी के निकट स्थित घाटणदेवी में विश्राम करेगा। मंगलवार सवेरे सभी आंदोलनकारी कसारा घाट के रास्ते होते हुए मुंबई की सीमा में प्रवेश करेंगे। आयोजकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे प्रतिनिधिमंडल से सीधी वार्ता करें और इन तमाम मांगों पर ठोस, लिखित आश्वासन दें, क्योंकि जब तक लिखित सहमति नहीं मिलती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस बड़े आंदोलन से महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ मुंबई और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।\n\n• भारत में: यह मार्च ग्रामीण भारत में कृषि ऋण माफी, उचित फसल बीमा और न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा की मांगों को राष्ट्रीय विमर्श में फिर से केंद्र में लाएगा। दूसरे राज्यों के किसान और मजदूर संगठन भी इस आंदोलन के नतीजों पर नजर रखेंगे।\n• महाराष्ट्र में: नासिक-मुंबई राजमार्ग और कसारा घाट से गुजरने वाले मुसाफिरों को भारी जाम और आवाजाही में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं लाडकी बहिण योजना और शेतकरी सम्मान निधि से जुड़े करोड़ों लाभार्थियों के लिए सरकारी फैसलों का रास्ता साफ हो सकता है।\n• ग्रामीण परिवारों पर: सूखे से जूझ रहे 305 तालुकों के किसानों को बढ़े हुए मुआवजे और रुकी हुई बीमा राशि का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद जगेगी। नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए भी वित्तीय राहत के रास्ते खुल सकते हैं।\n• योजना कर्मियों पर: आशा, आंगनवाड़ी और पोषण आहार कर्मचारियों के वेतनमान तथा लंबित भत्तों पर ठोस सरकारी नीति बनने की संभावना बढ़ेगी। इससे हजारों ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बड़ा आंदोलन राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे से बिगड़े हालात, फसल नुकसान की अपर्याप्त भरपाई और कल्याणकारी योजनाओं में आई तकनीकी रुकावटों के कारण भड़का है।\n\n• गंभीर सूखा और अपर्याप्त मदद: राज्य के 358 तालुकों में से 305 में सूखा घोषित होने के बाद दी गई 5,000 रुपये की परिवार सहायता को बेहद नाकाफी माना गया। फसल बर्बादी और बीमा क्लेम में आ रही तकनीकी दिक्कतों ने किसानों में असंतोष बढ़ा दिया।\n• योजनाओं से बेदखली और लंबित किश्तें: ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने से करीब 81 लाख महिलाएं लाडकी बहिण योजना के लाभ से वंचित हो गईं, जबकि नमो शेतकरी योजना की दो किश्तें भी अटकी रहीं। इन कल्याणकारी भुगतानों के रुकने से ग्रामीण परिवारों में नाराजगी फैली।\n• सत्याग्रह की अनदेखी और प्रशासनिक नोटिस: अकोले में 21 से 26 अक्टूबर तक चले शांतिपूर्ण सत्याग्रह के बावजूद प्रशासन ने समाधान तलाशने की जगह पुलिस नोटिस जारी किए। बातचीत की गुंजाइश न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने राजधानी कूच करने का फैसला किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह लॉन्ग मार्च कहां से शुरू हुआ और कहां तक जाएगा?\nयह वाहन मार्च अकोले से शुरू हुआ है और मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले तक जाएगा।\n\n2. इस मार्च में कितने लोग और वाहन शामिल हैं?\nप्रदर्शन में 20 से अधिक जिलों के 12,000 से ज्यादा किसान और ग्रामीण कर्मी लगभग 1,000 से अधिक वाहनों के साथ भाग ले रहे हैं।\n\n3. सूखा राहत को लेकर प्रदर्शनकारियों की मुख्य आपत्ति क्या है?\nराज्य के 305 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए घोषित 5,000 रुपये प्रति परिवार की सहायता को अपर्याप्त बताते हुए उचित फसल नुकसान मुआवजे की मांग की गई है।\n\n4. लाडकी बहिण योजना से जुड़ा क्या मुद्दा उठाया गया है?\nई-केवाईसी अड़चनों के कारण योजना से बाहर हुई 81 लाख महिलाओं को पुनः शामिल करने और उनका बकाया मानधन जारी करने की मांग की गई है।\n\n5. मार्च का अगला पड़ाव कहां तय किया गया है?\nसोमवार रात इगतपुरी के पास घाटणदेवी में पड़ाव डालने के बाद मंगलवार सुबह काफिला कसारा घाट से मुंबई की ओर बढ़ेगा।",
  "url": "https://trendkia.com/maharashtra/karjamaphi-aura-sukhe-ke-muavaje-ko-lekara-mumbai-kucha-varsha-bngale-para-cm-se-javaba-mangenge-kisana-51986",
  "category": "महाराष्ट्र",
  "publishedAt": "2026-10-26",
  "tags": [
    "किसान आंदोलन",
    "अखिल भारतीय किसान सभा",
    "महाराष्ट्र सूखा",
    "कर्जमाफी",
    "वर्षा बंगला",
    "लाडकी बहिण योजना"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}