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  "type": "article",
  "title": "महापौर पद के फॉर्मूले पर बीजेपी और शिंदे सेना में तकरार, अमेय घोले के दावे को आशीष शेलार ने अनौपचारिक बताकर खारिज किया",
  "summary": "मुंबई महानगरपालिका में महापौर की कुर्सी को लेकर महायुति गठबंधन में खींचतान शुरू हो गई है। अमेय घोले के ढाई और सवा साल वाले पावर शेयरिंग फॉर्मूले के दावे को बीजेपी ने खारिज कर दिया है।",
  "content": "मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में महापौर की कुर्सी को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। शिवसेना के बीएमसी गुट के नेता अमेय घोले ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'वर्षा' में आयोजित महायुति की बैठक के दौरान महापौर पद के आवंटन के लिए एक विशेष समय सीमा का समझौता स्वीकार किया गया था। उनके अनुसार, गठबंधन सहयोगियों के बीच नागरिक निकाय का शीर्ष पद साझा करने की बात तय हुई थी, लेकिन बीजेपी ने इस तरह के किसी भी औपचारिक समझौते के अस्तित्व को सिरे से खारिज कर दिया है।\n\nढाई और सवा साल के पावर शेयरिंग फॉर्मूले पर शिवसेना का दावा\nअमेय घोले के बयान के अनुसार, 'वर्षा' में हुई बैठक में तय फॉर्मूले के तहत बीएमसी के पांच साल के कुल कार्यकाल में से शुरुआती ढाई साल महापौर पद बीजेपी के पास रहना था। इसके बाद अगले सवा साल (15 महीने) के लिए शिवसेना का महापौर नियुक्त किया जाना था और फिर अंतिम सवा साल के लिए कुर्सी पुनः बीजेपी के पास जानी थी। घोले ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम की विभिन्न वैधानिक और विशेष समितियों का प्रशासनिक बंटवारा भी इसी तय समय सीमा वाले फॉर्मूले के सिद्धांतों पर किया गया था। इस रणनीतिक व्यवस्था का हवाला देते हुए शिवसेना गुट ने अपने तय समय वाले हिस्से के लिए महापौर पद पर अपनी सशक्त दावेदारी पेश करने का मन बनाया है।\n\nबीजेपी ने खारिज किया दावा, आशीष शेलार बोले- अनौपचारिक बातचीत का कोई मूल्य नहीं\nदूसरी ओर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने अमेय घोले द्वारा किए गए दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। शेलार ने कहा कि किसी बैठक के दौरान हुई अनौपचारिक या अनधिकृत बातचीत का कोई विधिक या राजनीतिक महत्व नहीं होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि महापौर पद को लेकर महायुति के शीर्ष नेतृत्व के बीच कोई औपचारिक और बाध्यकारी सहमति बनी होती, तो उसकी सार्वजनिक घोषणा की जाती। शेलार ने तर्क दिया कि यदि सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे के बीच किसी लिखित या मौखिक प्रस्ताव पर सहमति बनी होगी, तो दोनों नेता स्वयं सामने आकर वास्तविकता जनता के समक्ष रखेंगे।\n\n'ऑपरेशन टाइगर' की रणनीति और बीएमसी में सीटों का वर्तमान समीकरण\nराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिंदे सेना बीएमसी के भीतर अपने संख्याबल को मजबूत करने के लिए 'ऑपरेशन टाइगर' नाम से एक विशेष रणनीति पर काम कर रही है। इस योजना के अंतर्गत शिंदे सेना का लक्ष्य पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली यूबीटी शिवसेना के करीब 45 पार्षदों को अपने पाले में लाना है। यदि यह दलबदल सफल होता है, तो नगर निगम में शिंदे सेना का आंकड़ा काफी बढ़ जाएगा, जिससे महापौर पद के लिए उनका दावा अत्यधिक मजबूत हो जाएगा। वर्तमान में बीएमसी के सदन की स्थिति पर नजर डालें तो बीजेपी 89 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। शिंदे सेना के पास अपने 29 पार्षद हैं, जो निर्दलीय समर्थकों को मिलाकर 33 तक पहुंचते हैं। वहीं यूबीटी शिवसेना के 65 पार्षद और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 3 पार्षद सदन में मौजूद हैं।\n\nबीएमसी में पूर्व में हुए प्रशासनिक और वित्तीय विवाद\nमहापौर पद को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक खींचतान ऐसे समय में हो रही है जब बीएमसी हाल के महीनों में कई प्रशासनिक विवादों का केंद्र रही है। इससे पहले महानगरपालिका द्वारा एक जनसंपर्क (पीआर) एजेंसी को 25 लाख रुपये का ठेका दिए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। उस समय विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ प्रशासन पर मुंबई के नागरिकों के करदाताओं के पैसों की खुलेआम बर्बादी करने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके अतिरिक्त, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और पदाधिकारियों के लिए नई इनोवा कारों की खरीद की प्रशासनिक योजना पर भी तीखा सियासी घमासान छिड़ चुका है, जिसमें विपक्ष ने बीएमसी के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए थे।\n\nइसका आप पर असर\nमुंबई महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध का सीधा असर शहर के नागरिक प्रशासन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की रफ्तार पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रशासनिक अनिश्चितता से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक निवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नगर निगम के नीतिगत फैसलों में देरी से केंद्र और राज्य की संयुक्त शहरी विकास योजनाएं धीमी पड़ सकती हैं।\n• मुंबई में: महापौर के चयन और समितियों के गठन में देरी से बीएमसी के बजटीय आवंटन और सड़क, पानी, सीवरेज जैसी स्थानीय विकास परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। नागरिकों को नागरिक शिकायतों के निवारण में प्रशासनिक ढिलाई और देरी का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बीएमसी में अमेय घोले ने महापौर पद के लिए क्या दावा किया है?\nअमेय घोले का दावा है कि महायुति की बैठक में ढाई साल बीजेपी, सवा साल शिवसेना और अंतिम सवा साल फिर बीजेपी का महापौर बनाने का फॉर्मूला तय हुआ था।\n\n2. बीजेपी की ओर से आशीष शेलार ने इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया दी?\nबीजेपी नेता आशीष शेलार ने दावे को खारिज करते हुए कहा कि अनौपचारिक चर्चाओं का कोई महत्व नहीं है और आधिकारिक सहमति होने पर घोषणा की जाती।\n\n3. बीएमसी में वर्तमान में प्रमुख राजनीतिक दलों की सीटों की संख्या कितनी है?\nबीएमसी में बीजेपी के 89, शिंदे सेना के 29 (समर्थन मिलाकर 33), यूबीटी शिवसेना के 65 और एनसीपी के 3 पार्षद हैं।\n\n4. शिंदे सेना द्वारा चर्चा में लाया गया 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है?\n'ऑपरेशन टाइगर' शिंदे सेना की एक कथित रणनीति है, जिसके तहत यूबीटी शिवसेना के लगभग 45 पार्षदों को अपने पाले में लाकर बीएमसी में अपनी संख्या बढ़ाने की योजना है।\n\n5. हाल ही में बीएमसी में किन वित्तीय मामलों को लेकर विवाद हुआ था?\nहाल के दिनों में बीएमसी में 25 लाख रुपये के पीआर एजेंसी कॉन्ट्रैक्ट और अधिकारियों के लिए नई इनोवा कारों की खरीद को लेकर विवाद हुआ था।",
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  "category": "महाराष्ट्र",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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