महाराष्ट्र भर में सार्वजनिक जगहों और सड़कों पर पटाखे चलाने पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट ने ध्वनि और वायु प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे महाराष्ट्र में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने पर पाबंदी लगा दी है। अदालत ने डीजे, लाउडस्पीकर और लेजर लाइट के नियमन के लिए प्रशासन को एक हफ्ते में नियम बनाने को कहा है। महाराष्ट्र में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पूरे राज्य में आम सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे चलाने पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि पटाखों के उत्पादन अथवा बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन इन्हें केवल निर्धारित और सुरक्षित स्थलों पर ही फोड़ा जाना चाहिए। इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन कराने का दायित्व सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को सौंपा गया है। डीजे, लेजर लाइट और तेज आवाज वाले उपकरणों पर नियम जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने गुरुवार को हुई सुनवाई में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े अन्य माध्यमों पर भी सख्त टिप्पणी की। पीठ ने आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले डीजे सिस्टम, लाउडस्पीकर, डॉल्बी साउंड सिस्टम और तेज लेजर लाइट के उपयोग पर पाबंदियां लागू करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वह सात दिनों के भीतर इस संबंध में स्पष्ट नियमावली तैयार करे और जमीनी स्तर पर उसका कड़ाई से अमल सुनिश्चित करे। रोजी-रोटी की सुरक्षा और हरित पटाखों को बढ़ावा अदालत ने सुनवाई के दौरान पटाखा निर्माण और व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाने की वजह भी साझा की। पीठ का मानना था कि पटाखा उद्योग से बड़ी संख्या में कमजोर और गरीब परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए इस धंधे को सीधे बंद नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय केवल सार्वजनिक रास्तों पर मनमाने ढंग से आतिशबाजी रोकने का निर्णय लिया गया है। पीठ ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने तथा हरित पटाखों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए सघन जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। अदालत ने इस अभियान को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए मशहूर हस्तियों की सहायता लेने का सुझाव भी दिया है। भविष्य के त्योहारों पर भी प्रभावी रहेंगे निर्देश बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ किया कि ये बंदिशें और दिशा-निर्देश केवल इस वर्ष की दिवाली तक सीमित नहीं रहेंगे। अदालत चाहती है कि आने वाले वर्षों और अन्य त्योहारों के दौरान भी इन नियमों का सतत और प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहे। इस संबंध में अदालत की विस्तृत आदेश प्रति सार्वजनिक होने के बाद लागू होने वाले सभी नियमों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों की पूरी रूपरेखा स्पष्ट हो सकेगी। देशभर में पटाखों पर पूर्व सुनवाई का संदर्भ इससे पूर्व देश की शीर्ष अदालत में भी पटाखों पर पाबंदी के मुद्दे पर अहम सुनवाई हो चुकी है। उस दौरान यह बात सामने आई थी कि समूचे देश में पटाखों पर एकतरफा पूर्ण प्रतिबंध लगाने से कई लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, इसलिए संपूर्ण रोक लगाने का पक्ष नहीं लिया गया था। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया था कि दिन-रात चौबीसों घंटे पटाखे चलाने की छूट नहीं मिल सकती, क्योंकि इससे समाज के बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसका आप पर असर बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद महाराष्ट्र के निवासियों को इस त्योहारी सीजन में सार्वजनिक सड़कों के बजाय प्रशासन द्वारा चिह्नित स्थानों पर ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी। • महाराष्ट्र में: आम रास्तों, चौराहों और खुले सार्वजनिक मैदानों पर पटाखे फोड़ने पर रोक रहेगी। नागरिकों को केवल स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किए गए सुरक्षित स्थलों का ही उपयोग करना होगा। • उत्पादकों और व्यापारियों के लिए: पटाखों के निर्माण और नियमित बिक्री पर अदालत ने कोई रोक नहीं लगाई है। पटाखा कारोबारियों की आजीविका अप्रभावित रहेगी, हालांकि उन्हें हरित उत्पादों के प्रचार में सहयोग करना होगा। • इवेंट और साउंड संचालकों के लिए: डीजे, लाउडस्पीकर, डॉल्बी सिस्टम और लेजर लाइट के लिए प्रशासन एक सप्ताह में नए नियम बनाएगा। आयोजकों को तय डेसिबल सीमा और समय सीमा का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। • बुजुर्गों और मरीजों के लिए: सड़कों पर आतिशबाजी और अनियंत्रित लाउडस्पीकरों पर बंदिश से आवासीय इलाकों में शोर कम होगा। इससे श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों और वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कदम त्योहारों के दौरान वायु गुणवत्ता में होने वाली भारी गिरावट और ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। • सीधा कारण: त्योहारी सीजन के दौरान भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पटाखे चलाने से आम जनता की सुरक्षा और पर्यावरण दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। अदालत ने जनस्वास्थ्य की रक्षा के उद्देश्य से यह पाबंदी लगाई है। • आजीविका से समझौता न करने की नीति: पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय केवल फोड़ने के स्थान सीमित किए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि पटाखा निर्माण से जुड़े गरीब श्रमिकों और खुदरा दुकानदारों की रोजी-रोटी न छिने। • तेज आवाज वाले उपकरणों का उपद्रव: त्योहारों में तेज आवाज वाले डॉल्बी साउंड सिस्टम, डीजे और अनियंत्रित लेजर बीम का अत्यधिक इस्तेमाल आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनता रहा है। इसी के चलते अदालत ने इन पर भी एक हफ्ते में नियमावली लाने का आदेश दिया। सवाल-जवाब 1. क्या बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई है? नहीं, अदालत ने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। केवल सार्वजनिक सड़कों और आम जगहों पर इन्हें फोड़ने पर रोक लगाई गई है। 2. अदालत ने डीजे और लाउडस्पीकर को लेकर क्या निर्देश दिए हैं? अदालत ने प्रशासन को डीजे, डॉल्बी साउंड सिस्टम, लाउडस्पीकर और लेजर लाइट के उपयोग पर एक सप्ताह के भीतर नियम तैयार कर सख्ती से लागू करने को कहा है। 3. पटाखे फोड़ने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी? प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि पटाखे केवल निर्धारित और उपयुक्त स्थानों पर ही फोड़े जाएं। 4. क्या यह प्रतिबंध केवल इसी साल की दिवाली के लिए है? नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन दिशा-निर्देशों का क्रियान्वयन केवल इस साल तक सीमित न रहकर भविष्य के त्योहारों पर भी जारी रहना चाहिए। https://trendkia.com/maharashtra/maharashtra-bhara-men-sarvajanika-jagahon-aura-sarakon-para-patakhe-chalane-para-roka-bombay-high-court-ka-adesha-47805 TrendKia — Har trend, sabse pehle.