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  "title": "महाराष्ट्र के धर्मांतरण कानून पर मौलाना मुश्ताक मलिक ने उठाए सवाल, शरीयत के विरासत नियमों से टकराव की दी चेतावनी",
  "summary": "तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण रोधी कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इसे शरीयत के विरासत नियमों के खिलाफ बताया है।",
  "content": "महाराष्ट्र में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए लाए जा रहे प्रस्तावित कानून के विभिन्न प्रावधानों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने इस प्रस्तावित विधेयक के कई बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए इसके संभावित दुरुपयोग की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह से किसी भी इंसान की निजी सोच, अंतरात्मा और व्यक्तिगत आस्था का विषय है, जिसमें किसी भी बाहरी ताकत का जबरन हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दो अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच होने वाले विवाह या धर्मांतरण को 'लव जिहाद' का रूप दिए जाने का भी पुरजोर विरोध किया है।\n\nविरासत के प्रावधानों और शरीयत कानून से टकराव\nमौलाना मुश्ताक मलिक का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारों वाले विभिन्न राज्यों में इस तरह के कानून अलग-अलग स्वरूपों में पेश किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन कानूनी प्रावधानों को रेखांकित किया जिनका सीधा संबंध धर्मांतरण के बाद उत्पन्न बच्चों की धार्मिक पहचान और दोनों पक्षों की जायदाद में उनके उत्तराधिकार से है। उनके अनुसार, यदि किसी मामले में जबरन धर्म परिवर्तन की बात साबित होती है और उस संबंध से कोई संतान उत्पन्न होती है, तो बच्चे की देखरेख और कस्टडी मां को सौंपे जाने के प्रावधान से किसी को आपत्ति नहीं है। हालांकि, यदि कानून के तहत ऐसे बच्चे को माता और पिता दोनों पक्षों की पैतृक संपत्ति का कानूनी उत्तराधिकारी बनाने की व्यवस्था की जाती है, तो यह सीधा शरीयत के विरासत संबंधी इस्लामी प्रावधानों से टकराएगा।\n\nकानूनी अस्पष्टता और दुरुपयोग की आशंका\nधार्मिक आस्था के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए मौलाना ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का धर्म उसके अपने विचारों और आंतरिक विश्वास से जुड़ा हुआ मामला है। दुनिया के किसी भी इंसान को दबाव या जबरदस्ती के जरिए किसी विशेष धार्मिक विचारधारा को स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि खुद इस्लाम धर्म में भी किसी व्यक्ति का जबरन धर्मांतरण कराने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित कानून में किसी प्रकार की अस्पष्टता या ढील छोड़ दी जाती है, तो उसका इस्तेमाल आम लोगों को प्रताड़ित करने और उन पर अनुचित दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत पसंद या धार्मिक निर्णय को केवल सामाजिक दबाव अथवा महज संदेह के आधार पर अपराध की श्रेणी में नहीं डाला जाना चाहिए।\n\nन्यायिक फैसले का संदर्भ और संवैधानिक अधिकार\nअपने तर्कों के समर्थन में मौलाना मलिक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दो वयस्क बहनों के धर्म परिवर्तन और अपनी पसंद से शादी करने से जुड़े एक मामले में अदालत ने बालिगों के फैसले लेने के संवैधानिक अधिकार और उनकी स्वायत्तता को सर्वोपरि माना था। उस मामले में याचिकाकर्ताओं को परेशान करने वाले पक्षों पर अदालत ने जुर्माना भी लगाया था। लव जिहाद की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मौलाना ने कहा कि प्रेम और जिहाद दो पूरी तरह से भिन्न अवधारणाएं हैं, और किसी भी अंतरधार्मिक विवाह को केवल धर्म के नजरिए से 'लव जिहाद' करार देना पूरी तरह अनुचित है। जब दो बालिग नागरिक अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करते हैं, तो इसे राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय उनके संवैधानिक अधिकारों के तहत देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण और अंतरधार्मिक विवाह जैसे अति संवेदनशील विषयों का राजनीतिकरण समाज के ताने-बाने के लिए नुकसानदेह है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: प्रस्तावित धर्मांतरण रोधी कानूनों के बीच नागरिक अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक स्वायत्तता पर राष्ट्रीय बहस तेज हो सकती है।\n\nमहाराष्ट्र में: राज्य में अंतरधार्मिक विवाहों, धर्मांतरण के नियमों और बच्चों के संपत्ति अधिकारों को लेकर नए कानूनी व सामाजिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मौलाना मुश्ताक मलिक ने महाराष्ट्र के प्रस्तावित कानून पर क्या आपत्ति जताई है?\nमौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि धर्मांतरण के बाद बच्चों की संपत्ति में उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान शरीयत के विरासत नियमों से टकरा सकते हैं और कानून की अस्पष्टता से इसका दुरुपयोग हो सकता है।\n\n2. शरीयत कानून और प्रस्तावित विधेयक में किस बात पर टकराव की बात कही गई है?\nमौलाना के अनुसार, जबरन धर्मांतरण के मामलों में बच्चे की कस्टडी मां को मिलने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन बच्चे को दोनों पक्षों की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनाने का प्रावधान शरीयत के नियमों के खिलाफ है।\n\n3. मौलाना ने 'लव जिहाद' शब्द पर क्या रुख अपनाया?\nमौलाना मलिक ने प्रेम और जिहाद को दो अलग अवधारणाएं बताते हुए कहा कि दो बालिगों के अपनी मर्जी से किए गए अंतरधार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' कहना अनुचित है।\n\n4. मौलाना मुश्ताक मलिक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के किस मामले का जिक्र किया?\nउन्होंने दो वयस्क बहनों के धर्म परिवर्तन और शादी से जुड़े मामले का जिक्र किया, जिसमें अदालत ने बालिगों के स्वतंत्रता के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए विरोधी पक्षों पर जुर्माना लगाया था।\n\n5. क्या इस्लाम में जबरन धर्मांतरण की अनुमति है?\nमौलाना मुश्ताक मलिक के अनुसार, इस्लाम धर्म में किसी भी व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं है और धर्म परिवर्तन व्यक्तिगत विश्वास का मामला है।",
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  "category": "महाराष्ट्र",
  "publishedAt": "2026-08-19",
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