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  "type": "article",
  "title": "महाराष्ट्र में महायुति और राकांपा में खींचतान तेज, सुनेत्रा पवार ने देवगिरी में बुलाई विधायकों की अहम बैठक",
  "summary": "राकांपा में आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व को लेकर असंतोष के बीच उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विधायकों का मंथन बुलाया है। अमित शाह से पार्टी नेताओं की बातचीत के बाद महायुति समन्वय समिति की बैठक भी प्रस्तावित है।",
  "content": "महाराष्ट्र की सत्ताधारी राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास देवगिरी पर विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। लगभग चार महीने के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस बैठक का समय शाम सात बजे तय किया गया है। राजनीतिक हलकों में इस जमावड़े को लेकर खासी सरगर्मी है क्योंकि इसमें पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, कमान, वित्त मंत्रालय और अंदरूनी गुटबाजी से जुड़े संवेदनशील विषयों पर विधायकों का सीधा रुख जाना जाएगा।\n\nदेवगिरी में जुटेंगे विधायक, कई अहम मसलों पर मंथन\nचार महीने बाद बुलाई गई विधायकों की इस बैठक के पीछे कई गंभीर कारण गिनाए जा रहे हैं। शीर्ष नेतृत्व और कामकाज की शैली को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट काफी समय से चल रही थी, जो अब खुलकर चर्चाओं में आ चुकी है। देवगिरी में होने वाले इस विमर्श के दौरान विधायकों से वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी और भविष्य की संगठनात्मक दिशा पर राय ली जाएगी। बैठक के नतीजों से यह तय हो सकता है कि पार्टी की आगामी रणनीति क्या होगी और क्या सत्ता संतुलन को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।\n\nछगन भुजबल के आवास पर समानांतर बैठक के बाद पहुंची थी कोर कमेटी\nइस बैठक की जमीन सोमवार को ही तैयार होने लगी थी, जब घटनाक्रम तेजी से बदले। सोमवार शाम को पार्टी की कोर कमेटी का विमर्श होना था, लेकिन सुनेत्रा पवार द्वारा बुलाई गई इस औपचारिक चर्चा से पहले पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने छगन भुजबल के आवास पर एक अलग बैठक की। छगन भुजबल के घर पर रणनीति बनाने और आपसी बातचीत पूरी करने के बाद ही सभी नेता एकजुट होकर सुनेत्रा पवार के आवास पर पहुंचे। करीब दो घंटे तक खिंची कोर कमेटी की इस चर्चा में संगठन के मौजूदा हालात और मंगलवार को होने वाले विधायकों के सत्र की रूपरेखा पर बात हुई थी।\n\nदिल्ली में गृह मंत्री से हुई बातचीत\nमुंबई में इन बैठकों का सिलसिला शुरू होने से पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था। इन वरिष्ठ नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से सीधे मुलाकात की थी। करीब एक घंटे चली इस उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान पार्टी में जारी खींचतान और असंतोष के कारणों पर खुलकर चर्चा हुई। बताया गया कि इस संवाद के दौरान नियुक्तियों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ नेताओं ने अपनी आपत्तियां रखीं।\n\nनेतृत्व, नियुक्तियों और पारिवारिक वर्चस्व को लेकर उपजा असंतोष\nपार्टी की इस अंदरूनी खींचतान की जड़ें संगठनात्मक बदलावों से जुड़ी हैं। अजित पवार के निधन के बाद से ही संगठन में प्रभाव और वर्चस्व की होड़ शुरू हो गई थी। पार्टी के कई पुराने और वरिष्ठ नेता इस बात से असहज बताए जा रहे हैं कि सुनेत्रा पवार और उनके बेटों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल रही हैं। खासकर पार्थ पवार के कामकाज के तरीके और उनके बढ़ते प्रभाव को लेकर पुराना धड़ा अपनी नाराजगी जता चुका है। आरोप है कि संगठन में नए पद तय करते समय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों से जरूरी सलाह-मशविरा तक नहीं किया जा रहा है। हालांकि सार्वजनिक तौर पर नेता संयम बरत रहे हैं, लेकिन अंदरूनी तनाव अब सतह पर आ चुका है।\n\nमहायुति समन्वय समिति की बैठक पर टिकी निगाहें\nविधायकों के इस मंथन के तुरंत बाद मंगलवार को महायुति समन्वय समिति की भी एक बड़ी बैठक होने वाली है। इस समन्वय बैठक में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और अजित पवार गुट वाली राकांपा के प्रमुख चेहरे मौजूद रहेंगे। गठबंधन के इस मंच पर विधान परिषद चुनाव में मिली पराजय के कारणों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच हाल के दिनों में उपजी तल्खी पर भी बात हो सकती है। गठबंधन के शीर्ष स्तर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि राकांपा के भीतर की कमजोरी केवल एक दल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर पूरी महायुति सरकार के भविष्य पर पड़ेगा। मतभेद न सुलझने की स्थिति में गठबंधन को बड़े नुकसान की आशंका को देखते हुए केंद्र स्तर से भी इस पर नजर रखी जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nमहाराष्ट्र सरकार की प्रमुख सहयोगी पार्टी में मचे इस घमासान से राज्य के प्रशासनिक फैसलों और गठबंधन के स्थायित्व पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: केंद्र की राष्ट्रीय राजनीति और बड़े नीतिगत तालमेल के लिहाज से महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन में किसी भी अस्थिरता पर राष्ट्रीय दलों की पैनी नजर रहेगी। गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद बढ़ने से साझा रणनीतिक फैसलों और संसद से लेकर राज्य समन्वय तक असर दिख सकता है।\n• महाराष्ट्र में: वित्त मंत्रालय और प्रशासनिक कमान को लेकर जारी इस खींचतान के कारण राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं और नीतिगत मंजूरियों की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। यदि यह अंदरूनी गतिरोध लंबा खिंचता है तो राज्य सरकार के बजटीय आवंटन और मंत्रिमंडल के कामकाजी तालमेल में आम नागरिकों से जुड़े कार्यों में देरी देखने को मिल सकती है।\n• राकांपा कार्यकर्ताओं के लिए: संगठनात्मक नियुक्तियों और शीर्ष स्तर पर असंतोष से जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बन सकती है। पार्टी के पुराने नेताओं और नए नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन तय होने के बाद ही स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट होगी।\n• स्थानीय मतदाताओं के लिए: महायुति में शामिल दलों के बीच बढ़ते तनाव का असर आने वाले स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों के गठबंधन समीकरणों पर सीधे तौर पर दिखाई देगा। इस राजनीतिक अस्थिरता के आधार पर मतदाता राजनीतिक दलों के कामकाज और स्थिरता का आकलन करेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व के खाली स्थान को भरने और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर वरिष्ठ नेताओं और परिवार के बीच तनाव पैदा हुआ है।\n\n• सीधे तौर पर कारण: पार्टी में बड़े पदों और निर्णय लेने के अधिकारों का केंद्र सुनेत्रा पवार और उनके बेटों, विशेष रूप से पार्थ पवार तक सीमित होने से पार्टी के पुराने वरिष्ठ नेता असहज महसूस कर रहे हैं। नियुक्तियों के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे जैसे दिग्गजों की अनदेखी किए जाने की शिकायतों ने विवाद को हवा दी।\n• पारस्परिक अविश्वास का घटनाक्रम: कोर कमेटी की बैठक से पहले छगन भुजबल के घर वरिष्ठ नेताओं का अलग से एकजुट होना और उससे पहले दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से शिकायत करना यह दर्शाता है कि अविश्वास गहरा चुका है। विधान परिषद चुनावों में गठबंधन को मिली हार ने भी अंदरूनी असंतोष को सतह पर लाने में उत्प्रेरक का काम किया।\n• गठबंधन पर व्यापक प्रभाव: राकांपा के इस बिखराव और भाजपा-शिवसेना के बीच बढ़ते तनाव के कारण महायुति सरकार के अस्तित्व और छवि पर खतरे को भांपते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने दखल दिया है। आने वाले समय में वित्त मंत्रालय और सांगठनिक पदों पर शक्ति के बंटवारे के जरिए ही इस कलह को थामने की कोशिश की जाएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुनेत्रा पवार ने विधायकों की बैठक कहाँ और कब बुलाई है?\nसुनेत्रा पवार ने यह बैठक मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास देवगिरी में मंगलवार शाम सात बजे बुलाई है।\n\n2. यह विधायकों की बैठक कितने समय बाद आयोजित हो रही है?\nराकांपा विधायकों की यह बैठक लगभग चार महीने के अंतराल के बाद बुलाई गई है।\n\n3. राकांपा में आंतरिक विवाद की मुख्य वजह क्या है?\nअजित पवार के निधन के बाद नेतृत्व, वित्त मंत्रालय और सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार के कामकाज के तरीके व नियुक्तियों को लेकर पुराने वरिष्ठ नेताओं में असंतोष है।\n\n4. राकांपा कोर कमेटी की बैठक से पहले वरिष्ठ नेता कहाँ एकत्र हुए थे?\nसुनेत्रा पवार की बैठक में जाने से पहले वरिष्ठ नेताओं ने वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के घर पर अलग से एक बैठक की थी।\n\n5. राकांपा के किन वरिष्ठ नेताओं से नियुक्तियों में सलाह न लेने की बात कही गई है?\nपार्टी नियुक्तियों में कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे से सलाह न लिए जाने का मुद्दा उठा है।\n\n6. महायुति समन्वय समिति की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?\nइस बैठक में विधान परिषद चुनाव में मिली हार, राकांपा की कलह और भाजपा व शिवसेना के बीच आई खटास पर मंथन होगा।",
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