# महाराष्ट्र में जमीन और मकान रजिस्ट्री के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य, 63 दस्तावेजों पर नया नियम लागू

> महाराष्ट्र सरकार ने बेनामी संपत्ति सौदों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए 1 अक्टूबर से 63 प्रकार के संपत्ति पंजीकरण दस्तावेजों में आधार प्रमाणीकरण जरूरी कर दिया है.

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/maharashtra-men-jamina-aura-makana-rajistri-ke-lie-aadhaar-satyapana-anivarya-63-dastavejon-para-naya-niyama-lagu-41379 · **Language:** Hindi
**Tags:** महाराष्ट्र, आधार कार्ड, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, राजस्व विभाग, चंद्रशेखर बावनकुले, देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में जमीन और मकानों के सौदों में होने वाली धोखाधड़ी और बेनामी लेनदेन पर लगाम लगाने के मकसद से प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के निबंधन के लिए आधार सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी तरह अनिवार्य बना दिया है। यह सख्त व्यवस्था 1 अक्टूबर से राज्य के तमाम निबंधन कार्यालयों में प्रभावी हो गई है। राजस्व विभाग के स्पष्टीकरण के अनुसार, इस नए नियम के दायरे में कुल 63 प्रकार के निबंधन दस्तावेजों को शामिल किया गया है, जिसके बाद बिना पहचान की डिजिटल पुष्टि के कोई भी संपत्ति दस्तावेज दर्ज नहीं कराया जा सकेगा।

## फर्जीवाड़े और बेनामी लेनदेन पर नकेल कसने की तैयारी
जमीन-जायदाद के कारोबार में अक्सर जाली कागजात, गलत पहचान और फर्जी गवाहों के सहारे दूसरों की संपत्ति बेचने या हड़पने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी तरह के अनैतिक हथकंडों और बिचौलियों के दखल को समाप्त करने के लिए यह व्यवस्था लाई गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद राजस्व विभाग ने यह कदम उठाया है, जिससे अचल संपत्ति के हर सौदे में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी तौर पर लागू करने के लिए सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में विधिवत अधिसूचना भी प्रकाशित कर दी है।

## 63 श्रेणियों के कानूनी दस्तावेजों पर लागू हुआ आदेश
नए प्रावधानों के तहत संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण विलेखों को आधार प्रमाणीकरण की परिधि में बांध दिया गया है। मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यवस्थाएं अब अनिवार्य हो चुकी हैं

- **क्रय और विक्रय विलेख:** किसी भी जमीन, मकान, दुकान या फ्लैट की सीधी खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों में खरीदार और विक्रेता दोनों की पहचान सत्यापित की जाएगी।
- **बंधक और वित्तीय दस्तावेज:** बैंकों अथवा वित्तीय संस्थानों के पास संपत्ति गिरवी रखकर कर्ज लेने के लिए तैयार होने वाले मॉर्गेज डीड पर भी यही प्रक्रिया लागू होगी।
- **पारिवारिक बंटवारा और विभाजन:** संयुक्त अथवा पैतृक संपत्ति के विभाजन पत्र यानी पार्टीशन डीड के निबंधन के समय भी सभी पक्षों का आधार सत्यापन जरूरी होगा।
- **उप-पंजीयक कार्यालयों में सख्ती:** राज्यभर के सभी सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक आधार आधारित बायोमेट्रिक या प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक पंजीकरण की फाइल आगे न बढ़ाई जाए।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस नई नीति की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि निबंधन और मुद्रांक विभाग सीधे राजस्व महकमे के अधीन कार्य करता है। उन्होंने कहा, “अब फर्जी गवाहों और फर्जी पक्षों से जुड़ी धोखाधड़ी खत्म हो जाएगी।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से रजिस्ट्री प्रक्रिया में मानवीय दखल घटेगा, पूरी कार्यप्रणाली अधिक सुगम बनेगी और आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा होगी।

## जिनके पास आधार नहीं है उनके लिए वैकल्पिक प्रावधान
सरकार ने उन नागरिकों के लिए भी स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए हैं जिनके पास फिलहाल आधार संख्या उपलब्ध नहीं है, ताकि वे अपने वैध अधिकारों से वंचित न रहें। ऐसे मामलों में व्यक्ति को आधार नामांकन केंद्र में आवेदन करने की रसीद या साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा अधिकृत अन्य वैकल्पिक पहचान पत्र भी जमा करने होंगे।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई पक्ष आधार के बिना वैकल्पिक दस्तावेज पेश करता है, तो उसे उस सौदे से जुड़े दूसरे व्यक्ति के साथ अपने कानूनी या व्यक्तिगत रिश्ते का ठोस प्रमाण भी उपलब्ध कराना होगा। संबंधित अधिकारियों द्वारा सभी दस्तावेजों और पहचान के ब्यौरे की पूरी जांच और पुष्टि होने के बाद ही संपत्ति का पंजीकरण अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा।

## नाबालिगों और विशेष श्रेणी के लाभार्थियों के लिए छूट के नियम
अधिसूचना में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और कुछ विशिष्ट श्रेणियों के लिए विशेष राहत का प्रावधान किया गया है। नाबालिगों के नाम पर संपत्ति पंजीकृत होने की स्थिति में, उनके माता-पिता अथवा कानूनी अभिभावक की आधिकारिक सहमति से आधार नामांकन का आवेदन कराया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी पात्र बच्चे अथवा हितग्राही को सिर्फ इस आधार पर संपत्ति पंजीकरण के कानूनी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसके पास आधार संख्या मौजूद नहीं है। राजस्व विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल पहचान सत्यापन को पुख्ता करना है ताकि किसी अन्य व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी न की जा सके।

## इसका आप पर असर
महाराष्ट्र में जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने, बेचने या पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा करने वाले हर नागरिक को अब रजिस्ट्री के लिए आधार प्रमाणीकरण पूरा करना होगा।

- **महाराष्ट्र में:** राज्य के किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में अब संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए आधार विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज कराना होगा। बिना आधार या नामांकन प्रमाण के क्रय-विक्रय, मॉर्गेज या बंटवारे के दस्तावेज 1 अक्टूबर के बाद पंजीकृत नहीं किए जाएंगे।
- **खरीदारों और विक्रेताओं के लिए:** फर्जी पहचान वाले बिचौलियों और जाली गवाहों के जरिए होने वाले जमीन घोटालों पर पूरी तरह रोक लगेगी। असली मालिक और खरीदार दोनों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे क्योंकि सौदे में शामिल सभी पक्षों का रिकॉर्ड सरकारी तंत्र से सत्यापित होगा।
- **आधार न होने की स्थिति में:** जिन लोगों के पास आधार संख्या नहीं है, उन्हें आवेदन पर्ची और अन्य सरकारी पहचान पत्र के साथ लेन-देन में शामिल पक्ष से रिश्ते का प्रमाण देना होगा। इन दस्तावेजों की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति की संपत्ति का निबंधन स्वीकार होगा।
- **नाबालिगों और आश्रितों के लिए:** 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नाम पर संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति मान्य होगी। किसी भी बच्चे को केवल आधार कार्ड न होने के आधार पर संपत्ति के कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
जमीन और अचल संपत्तियों के सौदों में लंबे समय से बेनामी लेन-देन, फर्जी गवाहों और गलत पहचान पत्र बनाकर दूसरों की जमीन हड़पने के मामले सामने आ रहे थे। इसी फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने और पूरी निबंधन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।

- **पहचान की जालसाजी रोकना:** जमीन माफिया और अनैतिक दलाल जाली पहचान और फर्जी गवाहों के दम पर असली मालिकों की जानकारी के बिना संपत्तियां बेच देते थे। आधार से बायोमेट्रिक और डिजिटल पुष्टि अनिवार्य होने से किसी अन्य व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग पूरी तरह रुक जाएगा।
- **बेनामी संपत्तियों पर प्रहार:** अघोषित आय और बेनामी नामों के जरिए की जाने वाली संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाना इस निर्णय की प्रमुख वजह है। सभी 63 प्रकार के विलेखों को आधार से जोड़ने से असली स्वामित्व और वित्तीय प्रवाह का स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध रहेगा।
- **प्रशासनिक प्रक्रिया में मानवीय दखल घटाना:** मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व विभाग ने रजिस्ट्री दफ्तरों में कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत की गुंजाइश को खत्म करने के लिए डिजिटल सत्यापन अनिवार्य किया है। आधिकारिक राजपत्र में जारी अधिसूचना के जरिए पूरी प्रणाली को तकनीकी रूप से सक्षम और जवाबदेह बनाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. महाराष्ट्र में संपत्ति पंजीकरण के लिए आधार कब से अनिवार्य किया गया है?
महाराष्ट्र में अचल संपत्ति के दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए आधार प्रमाणीकरण की व्यवस्था 1 अक्टूबर से प्रभावी की गई है।

### 2. यह नया नियम कुल कितने प्रकार के संपत्ति दस्तावेजों पर लागू होगा?
राजस्व विभाग के अनुसार, नया नियम खरीद, बिक्री, गिरवी रखने और बंटवारे समेत कुल 63 प्रकार के रजिस्ट्री दस्तावेजों पर लागू होगा।

### 3. यदि किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड नहीं है तो वह रजिस्ट्री कैसे करा सकता है?
उसे आधार नामांकन के आवेदन का प्रमाण और सरकार द्वारा जारी अन्य पहचान पत्र जमा करने होंगे, साथ ही सौदे में शामिल पक्ष से संबंध का सबूत देना होगा।

### 4. क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं?
हां, 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के मामले में माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति से आधार नामांकन का आवेदन कराया जाएगा।

### 5. क्या आधार नंबर न होने पर किसी बच्चे को रजिस्ट्री के लाभ से वंचित किया जा सकता है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल आधार संख्या न होने के आधार पर किसी भी बच्चे या पात्र लाभार्थी को संपत्ति पंजीकरण से वंचित नहीं किया जाएगा।

### 6. इस नए नियम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पहचान की पुष्टि को मजबूत करना, दूसरों के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकना और बेनामी सौदों पर पूरी तरह नकेल कसना है।

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