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  "title": "महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्यता और संघ प्रमुख के न्यू यॉर्क दौरे पर संजय राउत ने केंद्र को घेरा",
  "summary": "शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और मुंबई में ऑटो चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता पर अपनी बात रखी। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने चालकों के प्रशिक्षण और मराठी स्वाभिमान का समर्थन किया।",
  "content": "शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से लेकर महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता तक के मुद्दों पर तीखे बयान दिए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने देश में अभिव्यक्ति की आजादी, उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान दिए जा रहे फैसलों और राज्यों में स्थानीय भाषा के प्रयोग पर विस्तार से अपनी बात रखी। इसके साथ ही सत्तारूढ़ शिवसेना की नेता शाइना एनसी और भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने भी मराठी भाषा विवाद और चालकों के प्रशिक्षण को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।\n\nसंघ प्रमुख का न्यू यॉर्क दौरा और लोकतंत्र पर सवाल\nराउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की आगामी अमेरिका यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वे न्यू यॉर्क जा रहे हैं क्योंकि उन्हें अमेरिका से आमंत्रण मिला है। उन्होंने अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक मजबूत लोकतंत्र है जहाँ बोलने की आजादी को पूरी मान्यता दी जाती है। इसके विपरीत, भारत की स्थिति पर सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा कि यहाँ बोलने की स्वतंत्रता को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा है।\n\nदेश की आंतरिक स्थिति का हवाला देते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने कहा कि युवाओं पर पैलेट गन चलाए जाने जैसे मामले आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक सच्चे लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात खुलकर रखने की पूरी आजादी होनी चाहिए।\n\nउत्तर प्रदेश चुनाव, ऑटो चालक और भाषा का नियम\nपरिवहन नीतियों और क्षेत्रीय राजनीति पर बोलते हुए संजय राउत ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठने वाले अमित शाह ही परिवहन मंत्री की पार्टी के प्रमुख हैं। राउत का आरोप है कि उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा एक बार में तीन महीने की डेडलाइन दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर कामकाज के लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान बेहद जरूरी है।\n\nभाषा के व्यावहारिक इस्तेमाल पर समझाते हुए राउत ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में ऑटो-रिक्शा चलाने वाले व्यक्ति को हिंदी भाषा आनी ही चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वहाँ कोई चालक कन्नड़ या पंजाबी में बात करेगा तो आम यात्रियों का काम कैसे चलेगा। इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति बंगाल में ऑटो चला रहा है तो उसे बंगाली भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।\n\nमहाराष्ट्र परिवहन नीति और दिल्ली का संदेश\nसंजय राउत ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाषा के मुद्दे पर बार-बार अपने कदमों से पीछे हट रहे हैं। उनका दावा है कि जब भी दिल्ली से कोई संदेश आता है, राज्य के परिवहन मंत्री तुरंत फैसले से पीछे हट जाते हैं। राउत ने यह भी साफ किया कि यह मामला दो राज्यों के बीच का विवाद नहीं है और न ही इसे केवल भाषा के टकराव के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि यह नीतियों को लागू करने की दृढ़ता से जुड़ा है।\n\nमराठी स्वाभिमान और 1.5 लाख चालकों का प्रशिक्षण\nदूसरी ओर, भाषा के मुद्दे पर सत्तारूढ़ शिवसेना की नेता शाइना एनसी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मराठी स्वाभिमान, मराठी गौरव और मराठी भाषा के साथ किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। शाइना एनसी के मुताबिक, यात्रियों को सेवाएं देने वाले हर सर्विस प्रोवाइडर को उनसे मराठी में संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।\n\nचालकों को भाषा सिखाने की पहल का ब्योरा देते हुए शाइना एनसी ने बताया कि सम्मानित नेता एकनाथ शिंदे और शिवसेना ने 1.5 लाख टैक्सी चालकों के लिए एक महीने की मुफ्त मराठी कक्षाएं आयोजित की थीं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले चालकों को आधिकारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए हैं, ताकि वे आसानी से संवाद कर सकें।\n\nभाजपा का रुख और ऑटो चालकों की मेहनत\nविवाद के बीच भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने ऑटो-रिक्शा चालकों के पक्ष में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मुंबई की सड़कों पर कड़ी मेहनत और पसीना बहाकर रोजी-रोटी कमाने वाले चालक शहर के नागरिकों की निरंतर सेवा करते हैं। उपाध्याय ने बताया कि जब राज्य सरकार ने कामकाज के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया था, तो इन चालकों ने खुद मराठी सीखी और परीक्षा पास की।\n\nभाजपा विधायक ने आगे कहा कि प्रशिक्षण और परीक्षा पास करने के बाद अब ये ऑटो-रिक्शा चालक बिना किसी डर या हिचकिचाहट के यात्रियों के साथ सही ढंग से बातचीत कर रहे हैं और मुंबई की सड़कों पर निर्भीक होकर अपनी गाड़ियां चला रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले और भाषा नियमों का असर मुंबई और महाराष्ट्र भर के यात्रियों तथा सार्वजनिक परिवहन चालकों पर सीधा पड़ेगा।\n\n• भारत में: राज्यों में स्थानीय भाषाओं के अनिवार्य नियमों से अंतरराज्यीय प्रवासियों के लिए रोजगार संबंधी शर्तें प्रभावित हो सकती हैं। चालकों को स्थानीय भाषा सीखने के बाद ही परमिट प्राप्त करने में आसानी होगी।\n• मुंबई और महाराष्ट्र में: ऑटो और टैक्सी चालकों को यात्रियों के साथ मराठी में बातचीत करना अनिवार्य होगा। नि:शुल्क कक्षाओं और प्रमाणन के कारण चालक बिना किसी हिचकिचाहट के बेहतर सेवाएं दे सकेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संजय राउत ने मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर क्या कहा?\nसंजय राउत ने कहा कि अमेरिका एक मजबूत लोकतंत्र है जहाँ बोलने की आजादी है, जबकि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर टकराव देखा जा रहा है।\n\n2. महाराष्ट्र में ऑटो चालकों के लिए क्या नियम बनाया गया था?\nमहाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना अनिवार्य किया था।\n\n3. शिवसेना ने चालकों के लिए क्या व्यवस्था की थी?\nएकनाथ शिंदे और शिवसेना ने 1.5 लाख टैक्सी चालकों के लिए एक महीने की मुफ्त मराठी कक्षाएं चलाईं और प्रमाण पत्र दिए।\n\n4. भाजपा विधायक संजय उपाध्याय का इस विवाद पर क्या कहना है?\nसंजय उपाध्याय ने कहा कि चालकों ने मेहनत करके मराठी सीखी, परीक्षा पास की और अब वे बिना डर के मुंबई में गाड़ियां चला रहे हैं।",
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  "category": "महाराष्ट्र",
  "publishedAt": "2026-08-27",
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