# महाराष्ट्र में विपक्षी रणनीति पर तकरार, चुनाव बहिष्कार के सुझाव पर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने जताई असहमति

> मुंबई में विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर रद्द करने की मांग उठाई। इस बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे के चुनाव बहिष्कार के सुझाव को कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने गलत रणनीति बताकर खारिज कर दिया।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/maharashtra-men-vipakshi-rananiti-para-takarara-chunava-bahishkara-ke-sujhava-para-congress-neta-prithviraj-chavan-ne-jatai-asaham-42830 · **Language:** Hindi
**Tags:** राज ठाकरे, पृथ्वीराज चव्हाण, ज्ञानेश कुमार, महाराष्ट्र राजनीति, चुनाव आयोग, रमेश चेन्निथला

महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों की लामबंदी के बीच चुनावी रणनीति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मुंबई में आयोजित एक साझा कार्यक्रम के दौरान विपक्षी नेताओं ने राज्य में कराई गई एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत निरस्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जोरदार मांग उठाई। मंच से नेताओं ने ऐलान किया कि जब तक पद से इस्तीफा नहीं दिया जाता, तब तक यह विरोध प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। हालांकि, इसी सभा के दौरान जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करने का विचार रखा, तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने इस रुख को सिरे से नकारते हुए असहमति जता दी।

## चुनाव बहिष्कार की मांग और मतदाता सूची पर राज ठाकरे के आरोप
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि स्थिति पूरी तरह साफ करने के लिए चुनाव का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई सबके सामने लाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। राज ठाकरे ने दावा किया कि वे वर्ष 2017-18 से ही मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ी का मुद्दा लगातार उठाते आ रहे हैं। उनका तर्क था कि सामान्य परिस्थितियों में मतदाताओं की संख्या अचानक कम नहीं हो सकती और न ही भारतीय जनता पार्टी के मतों में इस प्रकार अस्वाभाविक उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि सत्ताधारी दल से उनकी कोई व्यक्तिगत अपेक्षा या केवल सत्ता में बैठने को लेकर रोष नहीं है, बल्कि रोष इस बात पर है कि शासन किस प्रकार और किस उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि देश के मतदाताओं को निष्पक्ष तरीके से यह तय करने का अधिकार मिलना चाहिए कि शासन की बागडोर किसे सौंपी जाए।

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## पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया गलत रणनीति, गिनाए 2024 के अनुभव
राज ठाकरे के चुनावी बहिष्कार वाले सुझाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने स्पष्ट किया कि वे इस विचार से कतई इत्तेफाक नहीं रखते। चव्हाण का कहना था कि चुनावों से पीछे हटना किसी भी सूरत में उचित राजनीतिक कदम नहीं हो सकता क्योंकि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार पाना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि बहिष्कार करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा बल्कि यह एक कमजोर रणनीति साबित होगी।

अपनी बात के समर्थन में पृथ्वीराज चव्हाण ने 2024 के अपने चुनाव का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उस चुनाव के दौरान उन्होंने स्वयं गड़बड़ियों का खुलकर विरोध किया था। चव्हाण के अनुसार, उनके क्षेत्र में फर्जी और डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज किए गए थे, जिन्होंने एक से अधिक बार मतदान किया। इसके अतिरिक्त, कई इलाकों में अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को अपने मताधिकार से वंचित किया गया, जबकि कई स्थानों पर गरीब तबके के लोगों को वोट डालने नहीं दिया गया। उन्होंने रेखांकित किया कि जिन लोगों ने कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था, उनके अधिकारों को कुचला गया। चव्हाण ने इसे केवल साधारण वोटों की हेराफेरी न मानते हुए सीधे तौर पर पूरे चुनाव की चोरी करार दिया।

## ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज, केरल में 2006 का मामला फिर खुला
दूसरी तरफ, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। एसआईआर को लेकर सामने आए नए घटनाक्रमों के बाद से ज्ञानेश कुमार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस सियासी गरमाहट के बीच केरल में ज्ञानेश कुमार से जुड़ा दो दशक पुराना प्रशासनिक मामला फिर से खोल दिया गया है। केरल की सरकार ने इस 20 साल पुराने प्रकरण में सतर्कता जांच यानी विजिलेंस जांच शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

यह मामला वर्ष 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के सचिव पद पर कार्यरत थे। उस समय एक मलेशियाई इंजीनियर की खुदकुशी का मामला सामने आया था, जिसके सुसाइड नोट में कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार के नाम का जिक्र होने की बात कही गई थी। केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच का जिम्मा विजिलेंस डायरेक्टर को सौंप दिया है। गृहमंत्री का कहना है कि बीस साल पहले इस प्रकरण की जांच व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से पूरी नहीं की गई थी, जिसके चलते इस पुरानी फाइल को दोबारा खोलकर जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

## इसका आप पर असर
विपक्षी दलों के बीच चुनावी रणनीति पर मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी आंदोलन से मतदाताओं और राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **भारत में:** मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस तेज होगी। इससे आम नागरिकों के बीच मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और चुनाव सुधारों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।
- **महाराष्ट्र में:** चुनाव बहिष्कार के प्रस्ताव को खारिज किए जाने से यह तय हो गया है कि आगामी चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल मैदान में उतरेंगे। राज्य के मतदाताओं को बहिष्कार के भ्रम से राहत मिलेगी और वे अपने मताधिकार का सामान्य रूप से इस्तेमाल कर सकेंगे।
- **मतदाता सूची सत्यापन:** नेताओं द्वारा डुप्लिकेट नामों और वोटरों के नाम कटने के आरोपों के बाद नागरिक अपनी मतदाता पर्ची और सूची में नाम की पहले से जांच करेंगे। इससे बूथ स्तर पर मतदाता जागरूकता और सतर्कता में बढ़ोतरी होगी।
- **प्रशासनिक असर:** केरल में दो दशक पुराने मामले की सतर्कता जांच शुरू होने से संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों की पूर्व जवाबदेही पर चर्चा बढ़ेगी। इससे उच्च प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता को लेकर कड़े नियम लागू करने की मांग उठ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
महाराष्ट्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर निरस्त करने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने मोर्चा खोला, जिसके दौरान चुनावी बहिष्कार को लेकर रणनीतिक असहमति पैदा हुई।

- **एसआईआर और मतदाता सूची पर विवाद:** विपक्षी नेताओं का आरोप है कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जिससे सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ मिला। इसी असंतोष के चलते मनसे और अन्य दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
- **रणनीतिक मतभेद:** मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनावी प्रक्रिया में खामियों के विरोध में सीधे चुनाव बहिष्कार की वकालत की, ताकि व्यवस्था पर दबाव बने। इसके विपरीत, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव लड़ने को ही एकमात्र सही रास्ता माना।
- **2006 का पुराना मामला:** केरल सरकार द्वारा 20 साल पुराने सुसाइड मामले की सतर्कता जांच के आदेश इसलिए दिए गए क्योंकि गृहमंत्री के अनुसार उस समय मामले की जांच ठीक से नहीं हुई थी। इस प्रशासनिक घटनाक्रम ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव को और गहरा कर दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. राज ठाकरे ने चुनाव को लेकर क्या मांग रखी थी?
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने की मांग रखी थी।

### 2. पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव बहिष्कार के सुझाव पर क्या रुख अपनाया?
पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव बहिष्कार के विचार से असहमति जताते हुए इसे गलत रणनीति बताया और कहा कि लोकतांत्रिक सरकार पाना नागरिकों का अधिकार है।

### 3. विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से क्या मांग कर रहे हैं?
विपक्षी नेता महाराष्ट्र में हुई एसआईआर को रद्द करने और ज्ञानेश कुमार के पद से तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

### 4. पृथ्वीराज चव्हाण ने 2024 के चुनाव को लेकर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चुनाव में डुप्लिकेट वोटर जोड़े गए, जिन्होंने कई बार मतदान किया, जबकि अल्पसंख्यक और गरीब मतदाताओं को वोट डालने से वंचित रखा गया।

### 5. केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किस मामले में जांच के आदेश दिए हैं?
केरल सरकार ने 2006 के एक मामले में सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं, जब ज्ञानेश कुमार पीडब्ल्यूडी सेक्रेटरी थे और एक मलेशियाई इंजीनियर ने आत्महत्या की थी।

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