महाराष्ट्र सरकार ने FSSAI के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की याचिका महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI के नियमों को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे राज्य के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र पर असर पड़ने का दावा किया गया है। महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एजेंसी FSSAI के कुछ आदेशों और दिशा-निर्देशों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। राज्य प्रशासन का तर्क है कि इन केंद्रीय नियमों के कारण स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अधिकार कम हो रहे हैं, जिससे बाजार में निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारों पर असर सामान्य परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत राज्य के अधिकारियों के पास होटल, रेस्टोरेंट, खुदरा दुकानों और खाद्य विनिर्माण इकाइयों की जांच करने का अधिकार होता है। अधिकारियों को यह भी शक्ति प्राप्त है कि वे नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सीधे तौर पर कानूनी कार्रवाई कर सकें। हालांकि, राज्य सरकार का पक्ष है कि FSSAI के कुछ विशेष निर्णयों ने उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच के मोर्चे पर स्थानीय अमले की ताकत को सीमित कर दिया है जिन्हें केंद्रीय स्तर पर लाइसेंस मिला हुआ है। लाइसेंसिंग प्रक्रिया और ऑनलाइन पोर्टल डेटा पर आपत्ति इस कानूनी याचिका में केवल अधिकारों का दायरा ही नहीं, बल्कि लाइसेंसिंग व्यवस्था में किए गए हालिया संशोधनों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार की मुख्य आपत्तियों में एक यह भी शामिल है कि राज्य के अधिकारियों को डिजिटल पोर्टल पर दर्ज खाद्य कारोबारियों के डेटाबेस और रिकॉर्ड तक सुचारू रूप से पहुंच नहीं मिल पा रही है। प्रशासन का मानना है कि इस डेटा तक पूरी पहुंच न होने से खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता की निगरानी कमजोर हो रही है। अदालत से विवादित नियमों को खारिज करने की मांग अपनी इस याचिका के माध्यम से राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से आग्रह किया है कि उन सभी विवादित आदेशों और नियमों को पूरी तरह से रद्द किया जाए जो स्थानीय अधिकारियों के कामकाज में बाधा बनते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी मांग उठाई गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद खाद्य कारोबारियों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड राज्य के निरीक्षण अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें। राजनीतिक समीकरण और आगामी सुनवाई की तारीख यह पूरा कानूनी विवाद इस लिहाज से काफी दिलचस्प माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी समर्थित सरकार है और केंद्र की सत्ता में भी भाजपा नीत सरकार ही काबिज है। इसके बावजूद राज्य तंत्र ने केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर न्यायपालिका का अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है और इस पर अगली सुनवाई नवंबर 2026 में निर्धारित की गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की भूमिका ज्ञात हो कि FSSAI यानी Food Safety and Standards Authority of India एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्था है जो केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होती है। इस संगठन का मुख्य दायित्व देश भर में उपभोग की जाने वाली खाद्य सामग्रियों की सुरक्षा और गुणवत्ता के कड़े मानक तय करना है। यह प्राधिकरण खाद्य क्षेत्र से जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमानुसार लाइसेंस और पंजीकरण प्रदान करता है तथा मिलावट, अमानक सामग्री और गलत लेबलिंग जैसी गंभीर लापरवाहियों पर निरंतर नजर रखता है। इसका आप पर असर खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच चल रहे इस विवाद का असर सीधे तौर पर खाद्य कारोबारियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। • महाराष्ट्र में: स्थानीय अधिकारियों और केंद्रीय तंत्र के बीच अधिकार क्षेत्र स्पष्ट होने से राज्य के होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य निर्माताओं की जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। • भारत में: इस कानूनी मामले के फैसले से देश भर में केंद्रीय खाद्य लाइसेंस प्राप्त करने वाले व्यवसायों पर नजर रखने वाले विभागों के बीच अधिकारों का नया संतुलन तय होगा। • लाइसेंस धारकों के लिए: खाद्य कारोबार से जुड़े व्यापारियों को आने वाले समय में राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर अनुपालन से जुड़ी अलग प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। • डेटा पहुंच: अदालत के अंतिम आदेश से यह तय होगा कि राज्य के निरीक्षकों को ऑनलाइन पोर्टल पर मौजूद व्यवसायियों के रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच मिलती है या नहीं। • सुनवाई की स्थिति: इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2026 में होनी है, जिसके बाद ही खाद्य सुरक्षा निरीक्षण के नए नियमों पर स्थिति साफ होगी। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा कानूनी टकराव केंद्रीय नियामक के नए प्रावधानों और स्थानीय प्रशासनिक शक्तियों के बीच पैदा हुए गतिरोध के कारण सामने आया है। • अधिकारों का दायरा: FSSAI द्वारा बनाए गए कुछ नए नियमों और केंद्रीय लाइसेंसिंग प्रावधानों के कारण राज्य के खाद्य निरीक्षकों की कार्यकुशलता और जांच का दायरा सीमित हो गया था। • डिजिटल पहुंच का अभाव: ऑनलाइन पोर्टल पर मौजूद खाद्य कारोबारियों के विस्तृत रिकॉर्ड और डेटाबेस तक राज्य के अधिकारियों को सीधी अनुमति न मिलना इस विवाद की एक मुख्य वजह बनी। • प्रशासनिक असंतोष: स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों द्वारा अपने अधिकारों में कटौती महसूस किए जाने पर सरकार ने अदालत का रुख किया। सवाल-जवाब 1. महाराष्ट्र सरकार ने किसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है? महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एजेंसी FSSAI के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। 2. राज्य सरकार की मुख्य आपत्ति क्या है? राज्य सरकार का आरोप है कि FSSAI के कुछ आदेशों और नियमों से स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अधिकार सीमित हो रहे हैं। 3. FSSAI का पूरा नाम क्या है? FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India है। 4. इस मामले की अगली सुनवाई कब होनी है? इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2026 में तय की गई है। 5. FSSAI किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है? यह संस्था भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। https://trendkia.com/maharashtra/maharashtra-moves-bombay-high-court-against-fssai-over-food-safety-regulations-51859 TrendKia — Har trend, sabse pehle.