# महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय और शरद पवार गुट से विलय पर सुनेत्रा पवार खेमे में खींचतान तेज

> सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शरद पवार गुट के साथ संभावित विलय और महाराष्ट्र में वित्त विभाग की वापसी को लेकर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/maharashtra-sarakara-men-vitta-mntralaya-aura-sharad-pawar-guta-se-vilaya-para-sunetra-pawar-kheme-men-khinchatana-teja-55455 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुनेत्रा पवार, शरद पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, अमित शाह, महाराष्ट्र राजनीति, अजीत पवार, वित्त मंत्रालय

महाराष्ट्र की सत्ताधारी राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर दो अहम मुद्दों को लेकर अंदरूनी हलचल काफी तेज हो गई है। पार्टी की कोर टीम के स्तर पर एक तरफ जहां शरद पवार गुट के साथ दोबारा हाथ मिलाने अथवा संभावित विलय के नफा-नुकसान का आकलन किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य कैबिनेट में बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले वित्त मंत्रालय को अपने पाले में वापस लाने के लिए जोर-आजमाइश चल रही है। इन दोनों मसलों पर पार्टी की आंतरिक बैठकों में नेताओं के अलग-अलग रुख के चलते अब तक कोई साझा सहमति नहीं बन सकी है।

## शरद पवार खेमे के साथ विलय पर कोर टीम में दो फाड़
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित हुई एक अहम बैठक में सुनेत्रा पवार गुट की कोर टीम के वरिष्ठ नेताओं से दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के एकीकरण के विषय पर सीधे तौर पर सलाह ली गई। इस परिचर्चा के दौरान पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दो स्पष्ट विचारधाराओं में बंटा हुआ दिखाई दिया। कुछ प्रभावशाली नेताओं का मानना था कि दोनों धड़ों का एक मंच पर वापस आना राजनीतिक भविष्य और चुनावी मजबूती के लिहाज से बेहद मुफीद साबित होगा। उनका तर्क था कि बिखराव को खत्म करके एक संयुक्त ताकत के रूप में उभरना ही पार्टी के जनाधार को सुरक्षित रख सकता है।

दूसरी ओर, कोर टीम के कई अन्य नेताओं ने इस विलय प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट असहमति दर्ज कराई। विरोध करने वाले नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी सूरत में शरद पवार खेमे के साथ दोबारा एक होने के पक्ष में नहीं हैं। वरिष्ठ नेताओं के बीच विचारों में इस तीखे विरोधाभास के कारण तुरंत विलय करने के किसी भी कदम पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई। इस खींचतान के बाद बैठक में यह रास्ता निकाला गया कि यदि तत्काल विलय पर एक राय नहीं है, तो आने वाले समय की राजनीतिक परिस्थितियों और नए घटनाक्रमों को परखने के बाद ही इस दिशा में कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

## पुराने प्रयासों की पृष्ठभूमि और अनसुलझे सवाल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों को एक साथ लाने की कवायद कोई बिल्कुल नई बात नहीं है। इससे पहले जब पार्टी की कमान अजीत पवार के हाथों में थी, तब भी दोनों खेमों को मिलाने के लिए गंभीर स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी थी और उस दौर में इस समझौते के अंतिम चरण तक पहुंच जाने की बातें भी सामने आई थीं। हालांकि, अजीत पवार के निधन के बाद उपजी नई राजनीतिक परिस्थितियों ने इस समीकरण को काफी पेचीदा बना दिया है। कोर टीम की हालिया बैठक में उभरी असहमतियों ने यह साफ कर दिया है कि अतीत की तरह ही भविष्य में भी विलय का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं होगा, भले ही आगे चलकर राजनीतिक दबाव के तहत इस विकल्प पर पुनर्विचार की गुंजाइश खुली रखी गई हो।

## अमित शाह से 6 दिग्गज नेताओं की मुलाकात और वित्त विभाग की दावेदारी
विलय पर जारी आंतरिक मंथन के समानांतर महाराष्ट्र की सत्ता साझेदारी को लेकर भी एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में सुनेत्रा पवार गुट के 6 सबसे वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से औपचारिक मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, दिलीप वाल्से पाटील, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ शामिल रहे। हालांकि इस उच्चस्तरीय बैठक से पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार की गैरमौजूदगी ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया।

इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा महाराष्ट्र सरकार में वित्त विभाग की जिम्मेदारी को दोबारा हासिल करना रहा। पूर्व में यह महत्वपूर्ण मंत्रालय अजीत पवार के पास था और वे ही राज्य के वित्त मंत्री के रूप में कामकाज संभाल रहे थे। अजीत पवार के असामयिक निधन के पश्चात महाराष्ट्र के कैबिनेट फेरबदल में इस प्रमुख महकमे को भारतीय जनता पार्टी ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। अब सुनेत्रा पवार की पार्टी के इन 6 दिग्गज नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष अपनी मांग रखते हुए तर्क दिया है कि गठबंधन की पूर्व व्यवस्था के आधार पर वित्त विभाग वापस उनकी पार्टी के पास ही होना चाहिए।

## इसका आप पर असर
महाराष्ट्र सरकार में वित्त विभाग के आवंटन और गठबंधन के आंतरिक समीकरण सीधे तौर पर राज्य के बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को प्रभावित करते हैं।

- **महाराष्ट्र में:** वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी किस दल के पास रहती है, इससे राज्य की विकास योजनाओं और बजट आवंटन की रफ्तार तय होती है। गठबंधन में मंत्रालयों के बंटवारे पर स्पष्टता आने से नीतिगत फैसलों में आने वाला गतिरोध समाप्त होगा।
- **भारत में:** देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में शुमार महाराष्ट्र में गठबंधन की स्थिरता राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर असर डालती है। केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय समन्वय और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुगमता बनी रहेगी।
- **राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए:** दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के विलय अथवा अलगाव से क्षेत्रीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के समीकरण तय होंगे। जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अपनी भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने का स्पष्ट संकेत मिलेगा।
- **आम जनता के लिए:** कैबिनेट के विभागों पर जल्द फैसला होने से जनहित की रुकी हुई फाइलों और विकास कार्यों को तेजी मिल सकेगी। शासन व्यवस्था में स्थिरता आने से जनकल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं समय पर धरातल पर उतर सकेंगी।

## ऐसा क्यों हुआ
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर यह खींचतान अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुए राजनीतिक स्थान, मंत्रालयों के पुनर्गठन और पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने को लेकर पैदा हुई है।

- **वित्त विभाग का बदलाव:** अजीत पवार के निधन से पहले वित्त मंत्रालय उनके पास था, जिसे बाद में भारतीय जनता पार्टी ने अपने नियंत्रण में रख लिया। उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता अब गठबंधन की मूल व्यवस्था की बहाली चाहते हैं।
- **विलय पर रणनीतिक मतभेद:** कोर टीम के एक वर्ग का मानना है कि शरद पवार के साथ आने से चुनावी लाभ मिलेगा, जबकि दूसरा धड़ा अपनी अलग पहचान खोने के डर से विरोध में है। मतों के इस टकराव के चलते बैठक में कोई आम सहमति नहीं बन पाई।
- **अजीत पवार के समय की पुरानी वार्ता:** दोनों धड़ों के एकीकरण की बातचीत पहले भी उन्नत चरण में पहुंच चुकी थी, जिससे नई परिस्थितियों में इस मुद्दे पर पुनर्विचार की गुंजाइश बनी रही। हालांकि ठोस निर्णय को फिलहाल भविष्य के घटनाक्रमों पर छोड़ दिया गया है।
- **केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग:** राज्य स्तर पर गतिरोध सुलझाने के लिए 6 वरिष्ठ नेता गृहमंत्री से मिलने पहुंचे, जो यह दिखाता है कि सत्ता साझेदारी के मसले पर अंतिम फैसला केंद्र के परामर्श से ही संभव होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सुनेत्रा पवार की पार्टी के 6 वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह से मुलाकात क्यों की?
नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर महाराष्ट्र सरकार में वित्त विभाग वापस अपनी पार्टी को देने की मांग उठाई।

### 2. अमित शाह से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, दिलीप वाल्से पाटील, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ शामिल थे।

### 3. महाराष्ट्र का वित्त विभाग पहले किसके पास था?
महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय पहले अजीत पवार के पास था, जिसे उनके निधन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने पास रख लिया।

### 4. शरद पवार गुट के साथ विलय पर कोर टीम की बैठक में क्या फैसला हुआ?
विलय पर नेताओं के बीच तीखे मतभेद रहे और कोई सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद निर्णय को भविष्य की परिस्थितियों पर टाल दिया गया।

### 5. क्या दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के विलय की चर्चा पहले भी हुई थी?
हां, अजीत पवार के समय भी दोनों धड़ों के एकीकरण पर बातचीत हुई थी और तब इसके अंतिम चरण तक पहुंचने के दावे किए गए थे।

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