मुंबई एयरपोर्ट के पास मस्जिद को लेकर गरमाई सियासत, किरीट सोमैया के धरने से बढ़ा विवाद मुंबई में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास बनी एक मस्जिद को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इसे अवैध बताते हुए गेट पर धरना दिया, जिस पर एआईएमआईएम और मस्जिद पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक स्थित एक धार्मिक स्थल को लेकर माहौल काफी गरमा गया है। गुरुवार को इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया अपने समर्थकों के साथ इस मस्जिद के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने इस निर्माण को पूरी तरह से अवैध करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए। अवैध कब्जे और कार्रवाई की चेतावनी किरीट सोमैया ने दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले इस जगह पर किसी भी तरह के निर्माण का कोई नामोनिशान तक नहीं था। अचानक कुछ लोगों ने यहां आकर करीब 5000 वर्ग फुट की बेशकीमती जमीन पर कब्जा जमा लिया और टिन शेड खड़ा करके मस्जिद बना डाली। इसके बाद वहां पानी और बिजली के अस्थायी कनेक्शन भी ले लिए गए। बीजेपी नेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस अवैध निर्माण को समय रहते नहीं हटाया गया तो यह कब्जा हमेशा के लिए पक्का हो जाएगा। उन्होंने इस मामले की औपचारिक शिकायत मुंबई पुलिस, एमएमआरडीए और बीएमसी से कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर जल्द बुलडोजर नहीं चलाया गया और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे खुद इस ढांचे को गिराने के लिए मैदान में उतर आएंगे। राजनीतिक दलों की आमने-सामने की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले के तूल पकड़ते ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी मैदान में कूद पड़ी। पार्टी के नेता वारिस पठान ने किरीट सोमैया के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा नेता सरकार पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। वारिस पठान का कहना है कि किरीट सोमैया अदालत के किसी भी फैसले का इंतजार किए बिना खुलेआम हथौड़ा लेकर मस्जिद गिराने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा बोलने वाले नेता के खिलाफ प्रशासन और सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। मस्जिद प्रबंधन और ट्रस्टियों का पक्ष दूसरी तरफ मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि यह निर्माण पूरी तरह से वैध अनुमति के साथ किया गया है। उनका कहना है कि उस समय के जीवीके और एयरपोर्ट से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी और संज्ञान में ही इस प्रार्थना स्थल के लिए अनुमति दी गई थी। मस्जिद पक्ष की ओर से साल 2015 के एक पत्र का हवाला भी दिया जा रहा है। उनका दावा है कि इस पत्र में मोहम्मद सरवर नामक व्यक्ति से जुड़े प्रार्थना स्थल की व्यवस्था का स्पष्ट जिक्र किया गया है। हालांकि, मस्जिद से जुड़े किसी भी ट्रस्टी ने अभी तक मीडिया के सामने आकर कैमरे पर बयान नहीं दिया है। उनका कहना है कि वे एयरपोर्ट प्रशासन, जीवीके, एमएमआरडीए और बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और मामला अदालत में लंबित रहने के कारण संबंधित प्राधिकरणों से उनकी बातचीत जारी है। राज्य सरकार का रुख और अन्य घटनाएं इस पूरे विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट किया है कि राज्य में जहां कहीं भी अवैध निर्माण पाए जाएंगे, उन पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य में कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़ी अन्य घटनाओं की बात करें तो हाल ही में मालेगांव में गुलाल उड़ाने को लेकर एक शोभायात्रा पर पथराव की घटना सामने आई थी। इस उपद्रव के बाद गुस्साए लोगों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद वहां भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। इसके अलावा जलगांव में भी दशहरे की रात मामूली विवाद के चलते एक कर्मचारी की हत्या की सनसनीखेज वारदात हो चुकी है। इसका आप पर असर मुंबई एयरपोर्ट के पास अवैध निर्माण और राजनीतिक विरोध के इस मामले का स्थानीय स्तर पर सीधा असर शहर की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाइयों पर पड़ सकता है। • मुंबई में: स्थानीय निवासियों और यात्रियों को एयरपोर्ट मार्ग के आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण संभावित ट्रैफिक जाम और सुरक्षा कड़ी होने से आवाजाही में रुकावट का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से अवैध निर्माणों पर संभावित बुलडोजर कार्रवाई से इलाके में तनाव की स्थिति बन सकती है। • भारत में: इस तरह के विवादित मामलों से धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर देश के अन्य महानगरों में भी प्रशासनिक सतर्कता बढ़ सकती है। राज्य सरकारों द्वारा अवैध निर्माण विरोधी अभियानों को तेज किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा विवाद भूमि उपयोग, अनधिकृत निर्माण के आरोपों और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण खड़ा हुआ है। इस मामले के पीछे प्रशासनिक अनुमतियों की कमी और विभिन्न पक्षों के विरोधी दावे मुख्य वजह रहे हैं। • भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप: बीजेपी नेता किरीट सोमैया का दावा है कि 2014 के बाद बिना किसी कानूनी मंजूरी के लगभग 5000 वर्ग फीट जमीन पर अस्थायी टिन शेड और ढांचा खड़ा किया गया। • अधिकारियों और अदालतों में पेंडिंग मामला: मस्जिद पक्ष का तर्क है कि यह निर्माण पूर्व अधिकारियों की जानकारी में हुआ था और जीवीके, एमएमआरडीए तथा बॉम्बे हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया अभी लंबित है। • राजनीतिक ध्रुवीकरण: चुनावों और वोट बैंक की राजनीति के चलते धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर विपक्षी और सत्ताधारी दल तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, जिससे यह मामला तूल पकड़ गया। सवाल-जवाब 1. मुंबई में यह विवाद किस जगह से जुड़ा है? यह विवाद मुंबई के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास बनी एक मस्जिद से जुड़ा है। 2. किरीट सोमैया ने इस मस्जिद को लेकर क्या आरोप लगाया है? बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया है कि यह मस्जिद अवैध है और 2014 के बाद 5000 वर्ग फीट जमीन पर कब्जा करके बनाई गई है। 3. वारिस पठान ने किरीट सोमैया के विरोध पर क्या प्रतिक्रिया दी? एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने किरीट सोमैया पर गुंडागर्दी करने और अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद सरकार पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। 4. मस्जिद पक्ष का इस निर्माण को लेकर क्या दावा है? मस्जिद से जुड़े लोगों का दावा है कि यह निर्माण तत्कालीन जीवीके और एयरपोर्ट अधिकारियों की जानकारी में अनुमति के साथ किया गया है और बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित है। 5. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने क्या बयान दिया है? मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि महाराष्ट्र में जहां-जहां अवैध निर्माण होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। https://trendkia.com/maharashtra/mumbai-airport-ke-paas-masjid-ko-lekar-gramai-siyasat-kirit-somaiya-50676 TrendKia — Har trend, sabse pehle.