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  "type": "article",
  "title": "मुंबई के पास हरियाली काटकर बन रहा विशाल डाटा सेंटर, बालकनी से वीरान जमीन देख भड़के लोग",
  "summary": "मुंबई से सटे इलाके में आवासीय इमारतों के ठीक सामने डाटा सेंटर बनाने के लिए पेड़ों की कटाई पर स्थानीय निवासियों ने भारी नाराजगी जताई है। बड़े पैमाने पर बिजली और पानी की खपत को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ रही है।",
  "content": "महानगरों में जब कोई परिवार लाखों रुपये खर्च करके फ्लैट खरीदता है, तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद प्राकृतिक वातावरण और शांत माहौल की होती है। मुंबई के पास थाणे में रहने वाले 46 वर्षीय तुषार शेट्टी ने भी यही सोचकर बहुमंजिला इमारत के 21वें फ्लोर पर एक घर खरीदा था। उनके फ्लैट की खिड़कियों और बालकनी से चारों तरफ दूर तक फैली प्राकृतिक हरियाली दिखाई देती थी। लेकिन महज 5 महीने के भीतर यह खूबसूरत नजारा पूरी तरह बदल चुका है। अब उनकी बालकनी के सामने हरियाली की जगह लाल मिट्टी की वीरान और बंजर जमीन नजर आ रही है। ई-कॉमर्स और क्लाउड क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमेज़न ने अपने नए डाटा सेंटर परिसर के निर्माण के लिए इस पूरे हिस्से के पेड़-पौधों को साफ कर दिया है। अपनी व्यथा जाहिर करते हुए तुषार शेट्टी ने कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता कि यहां ऐसा निर्माण कार्य होने वाला है, तो वे इस जगह पर मकान खरीदने का फैसला कतई नहीं करते।\n\nघरों के ठीक सामने विशालकाय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी\nभारत इस समय दुनिया भर के डिजिटल और एआई नेटवर्क का एक मजबूत ढांचा बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश को दुनिया का प्रमुख डाटा हब बनाने की महत्वाकांक्षा के तहत कई वैश्विक दिग्गज कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। इसी कड़ी में अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियां देश में अरबों डॉलर झोंक रही हैं। अमेज़न अकेले इस परियोजना के तहत 21 अरब डॉलर यानी करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये खर्च कर साल 2030 तक आधुनिक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। यह मुंबई के पास भारत के सबसे बड़े डाटा सेंटर पार्कों में से एक बनने जा रहा है। कंपनी का यह विशालकाय प्रोजेक्ट लोगों की रिहायशी इमारतों से महज कुछ मीटर की दूरी पर तैयार किया जा रहा है।\n\n \n\nस्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का कड़ा विरोध\nरिहायशी बस्तियों के ठीक बगल में इस तरह के भारी-भरकम प्रोजेक्ट के आने से स्थानीय निवासियों में रोष फैल गया है। निर्माण स्थल के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं और लोग मांग कर रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट को आवासीय इलाके से दूर शिफ्ट किया जाए। इस लड़ाई में अब विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता भी स्थानीय नागरिकों के साथ शामिल हो गए हैं। लोगों का कहना है कि वे शुद्ध हवा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए शहर की भीड़भाड़ से दूर आए थे, लेकिन अब भारी मशीनों और निर्माण के कारण उनका सुकून छिन चुका है।\n\nपानी और बिजली संकट को लेकर बढ़ती गहरी चिंताएं\nडाटा सेंटर आधुनिक डिजिटल दुनिया की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए अथाह मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। भारत में दुनिया की कुल आबादी का करीब 18 फीसदी हिस्सा रहता है, जबकि देश के पास पीने योग्य साफ जल का महज 4 फीसदी भंडार ही उपलब्ध है। ऐसे में घनी आबादी वाले शहरों के नजदीक भारी जल खपत वाली परियोजनाओं की स्थापना गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी के अनुमान के मुताबिक, अगले एक दशक में करीब 60 से 80 फीसदी डाटा सेंटर पानी की भारी किल्लत से जूझने लगेंगे। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में डाटा सेंटरों ने लगभग 150 अरब लीटर पानी की खपत की थी, जिसके साल 2030 तक बढ़कर दोगुना हो जाने का अनुमान है।\n\nशोर और बुनियादी सुविधाओं पर असर को लेकर तकरार\nपरियोजना के आसपास रहने वाले नागरिकों का आरोप है कि डाटा सेंटर के आने से इलाके में तेज आवाज और शोरगुल बढ़ेगा, साथ ही भविष्य में बिजली और पेयजल आपूर्ति पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी और स्थानीय नगर निकाय ने इन सभी शिकायतों और आशंकाओं को खारिज किया है। उनका दावा है कि इस डाटा सेंटर के संचालन से आम लोगों की रोजमर्रा की सुविधाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद, जिस तरह से पर्यावरण और प्राकृतिक संपदा को हटाकर बड़े पैमाने पर कंक्रीट के ढांचे खड़े किए जा रहे हैं, उसने पर्यावरणविदों और आम नागरिकों दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।\n\nइसका आप पर असर\nआवासीय इलाकों के नजदीक विशाल डाटा सेंटर बनने से आसपास के घरों की शांति, पर्यावरण और बुनियादी संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: देश में तेजी से बन रहे डाटा सेंटरों की वजह से पीने के पानी और बिजली की मांग में भारी उछाल आने का अनुमान है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली-पानी के वितरण और शहरी जल संरक्षण की नीतियों पर पड़ सकता है।\n• मुंबई और थाणे में: रिहायशी इमारतों के ठीक पास भारी निर्माण होने से स्थानीय निवासियों को हरियाली की कमी और मशीनों के शोर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि आप भी नए उपनगरों में घर खरीद रहे हैं, तो आसपास प्रस्तावित औद्योगिक या आईटी जोनिंग की पहले से जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।\n• पर्यावरण और जल संसाधन: साल 2030 तक डाटा सेंटरों की पानी की खपत दोगुनी होने का अनुमान लगाया गया है। आने वाले समय में जल संकट वाले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को गिरते भूजल स्तर की चुनौती झेलनी पड़ सकती है।\n• संपत्ति और निवेश: प्राकृतिक नजारों के नाम पर खरीदे गए फ्लैटों के सामने अचानक औद्योगिक ढांचा बनने से मकानों के आवासीय आकर्षण पर असर पड़ता है। संपत्ति खरीदारों को बिल्डर के दावों के साथ-साथ क्षेत्र के मास्टर प्लान की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवैश्विक टेक कंपनियां भारत में डिजिटल और एआई क्रांति का आधार तैयार करने के लिए भारी निवेश कर रही हैं, जिसके कारण रिहायशी इलाकों के नजदीक डाटा सेंटर पार्क बनाए जा रहे हैं।\n\n• एआई और डाटा हब बनने की महत्वाकांक्षा: भारत सरकार देश को वैश्विक डाटा का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है, जिसके चलते अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।\n• अमेज़न का 21 अरब डॉलर का निवेश: कंपनी साल 2030 तक भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसमें मुंबई का यह विशाल पार्क प्रमुख हिस्सा है।\n• शहरी विस्तार और भूमि चयन: कनेक्टिविटी और नेटवर्क सुविधाओं के कारण डाटा सेंटर बड़े शहरों के आसपास बनाए जा रहे हैं, जहां रिहायशी कॉलोनियां पहले से बसी हुई हैं।\n• अत्यधिक संसाधन खपत का इतिहास: वर्ष 2025 में दुनिया भर के डाटा सेंटरों ने 150 अरब लीटर पानी का उपयोग किया था, और बढ़ती एआई गतिविधियों के चलते आने वाले वर्षों में संसाधनों की मांग और तेज होने की संभावना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुंबई के पास किस कंपनी का डाटा सेंटर बनाया जा रहा है?\nई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न मुंबई के पास अपना सबसे बड़ा डाटा सेंटर पार्क स्थापित कर रहा है।\n\n2. स्थानीय फ्लैट मालिक तुषार शेट्टी ने क्या शिकायत दर्ज की है?\nउन्होंने बताया कि महज 5 महीने पहले 21वें फ्लोर पर ग्रीन व्यू के लिए घर खरीदा था, लेकिन अब हरियाली काटकर वहां पूरी तरह लाल मिट्टी की वीरान जमीन बना दी गई है।\n\n3. इस प्रोजेक्ट पर अमेज़न कितना निवेश कर रहा है?\nअमेज़न साल 2030 तक इस एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर 21 अरब डॉलर यानी करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।\n\n4. स्थानीय लोग और विपक्षी दल इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?\nरिहायशी इमारतों से कुछ ही मीटर की दूरी पर पेड़ों की कटाई, तेज आवाज और बिजली-पानी की संभावित किल्लत को लेकर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।\n\n5. डाटा सेंटरों की जल खपत को लेकर क्या आंकड़े सामने आए हैं?\nसाल 2025 में डाटा सेंटरों ने 150 अरब लीटर पानी का उपयोग किया था, जिसके 2030 तक दोगुना होने का अनुमान है। एसएंडपी के अनुसार अगले एक दशक में 60 से 80 फीसदी डाटा सेंटर पानी की कमी से जूझ सकते हैं।\n\n6. कंपनी और स्थानीय प्रशासन का इस विवाद पर क्या रुख है?\nकंपनी और स्थानीय निकाय ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि इस डाटा सेंटर से स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।",
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  "category": "महाराष्ट्र",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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