मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हर दिन गुजरते हैं डेढ़ लाख वाहन, दो दशक से ज्यादा पुराना है यह सुपर-फास्ट मार्ग नवीं मुंबई से पुणे को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो दशक से अधिक पहले हुआ था और आज इस पर क्षमता से कई गुना अधिक वाहन फर्राटा भरते हैं। नवीं मुंबई के कालमबोली क्षेत्र से पुणे के किवाले तक फैला यह एक्सप्रेसवे करीब 94.6 किलोमीटर लंबा है, जिसे साल 2002 में वाहनों के आवागमन के लिए खोला गया था। मूल योजना के अनुसार इस आधुनिक सड़क को आगामी तीन दशकों तक ट्रैफिक का दबाव संभालने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन मौजूदा समय में इस पर वाहनों की इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि इसे दस लेन तक विस्तारित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। वर्तमान में यह हाई-स्पीड मार्ग छह लेन का बना हुआ है, जिस पर यातायात का दबाव बढ़ने की वजह से कई बार भीषण जाम की स्थिति बन जाती है और सफर करने वाले लोगों को दो-दो घंटे तक जाम में फंसना पड़ जाता है। खासकर लोनावला और खंडाला जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के समीप अमूमन ऐसा भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है। क्षमता से कई गुना अधिक वाहनों का संचालन शुरुआती दौर में इस मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को रोजाना लगभग चालीस से पैंतालीस हजार वाहनों का आवागमन संभालने के लिए तैयार किया गया था, परंतु वर्तमान हालात यह हैं कि इस रूट से प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। यदि छुट्टियों या सप्ताहांत यानी वीकेंड की बात करें तो इस मार्ग पर तीन लाख से भी ज्यादा गाड़ियां एक साथ सड़क पर उतर आती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह दावा रहा है कि इतना भारी ट्रैफिक झेलने के बावजूद इस पूरी सड़क पर एक भी गड्ढा देखने को नहीं मिलता है। इस परियोजना को पूरा करने के वक्त करीब 1,630 करोड़ रुपये की लागत आई थी, जिसका निर्माण महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा कराया गया था। टोल दरें और गति सीमा के कड़े नियम इस व्यस्त एक्सप्रेसवे पर कुल दो मुख्य टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं और सड़क के दोनों किनारों पर तीन-तीन लेन बनाई गई हैं। इस रास्ते के माध्यम से दोनों प्रमुख महानगरों के बीच की दूरी तय करने में केवल दो घंटे का समय लगता है। इस पर सफर करने वाली कारों के लिए 250 रुपये का टोल शुल्क देना पड़ता है, जबकि मल्टी एक्सेल ट्रेलर्स के लिए यही टोल दर बढ़कर 1,750 रुपये हो जाती है। इस मार्ग पर कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, जो कि पहाड़ी या घाट वाले हिस्सों में घटकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। इसी प्रकार भारी वाहनों के लिए सामान्य क्षेत्र में स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसे घाट सेक्शन में घटाकर 40 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया जाता है. देश का सबसे महंगा और भारी कमाई वाला टोल मार्ग यदि टोल संग्रहण के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह भारत का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे साबित होता है, जहां यात्रा करने पर प्रति किलोमीटर 3.80 रुपये की दर से शुल्क वसूला जाता है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि इस ई-वे से प्रतिदिन लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का टोल राजस्व प्राप्त होता है, जबकि पूरे महीने का कुल टोल कलेक्शन 167 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाता है। परिणामस्वरूप आज इस मार्ग से सालाना दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का टोल वसूला जाता है, जिसका मतलब यह है कि इस सड़क को बनाने में जितना कुल खर्च आया था, उससे कहीं अधिक राशि हर वर्ष केवल टोल के रूप में वसूल ली जाती है। आगामी विस्तार योजनाएं और निर्माण की चुनौतियां मुंबई-पुणे ई-वे पर बढ़ते हुए ट्रैफिक के दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इसे वर्ष 2030 तक दस लेन का बनाने की मुकम्मल तैयारी चल रही है। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने इस मार्ग को चौड़ा करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है और इसका निर्माण कार्य भी धरातल पर शुरू कर दिया गया है। इस योजना के तहत एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ दो-दो नई लेन और जोड़ी जाएंगी। निर्माण एजेंसी का यह भी कहना है कि इस चौड़ीकरण परियोजना के दौरान सबसे बड़ी बाधा काम चलते वक्त रास्ते को सुचारू रूप से खुला रखना है, क्योंकि यह देश की अत्यंत व्यस्त सड़कों में शुमार है और इस पर ट्रैफिक पूरी तरह रोककर काम करना कतई संभव नहीं है। ऊपर से ऊंचे पुल, अंडरपास और बरसात के मौसम में पहाड़ों से चट्टानों के खिसकने की घटनाएं इस सफर को और अधिक जोखिम भरा बना देती हैं। घाट क्षेत्र की आधुनिक सुरंगें और सफर की आसानी इस हाई-स्पीड मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए लगभग चार आधुनिक सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल लंबाई छह किलोमीटर के दायरे में आती है। ये सभी टनल पश्चिमी घाट के दुर्गम इलाकों में बनाई गई हैं, जिनमें सबसे प्रमुख और बड़ी सुरंग भाटन टनल है। इसके अतिरिक्त कामशेट टनल, मादप टनल और अदोशी टनल भी इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। पश्चिमी घाट की इन गुफाओं नुमा सुरंगों के माध्यम से इस मोटर मार्ग पर सफर करना बेहद आसान हो जाता है, क्योंकि सामान्य तौर पर पहाड़ी रास्तों से गुजरना चालकों के लिए काफी खतरनाक साबित होता है, लेकिन इन सुरक्षित सुरंगों के बन जाने के बाद से यह कठिन सफर भी काफी सहज हो गया है। मिसिंग लिंक परियोजना और समय की भारी बचत मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे यातायात के दबाव को कम करने के लिए एक और नया मिसिंग लिंक तैयार किया गया है। इस नए रास्ते को मई, 2026 में शुरू किया गया है। लगभग 13.3 किलोमीटर लंबे इस बाईपास का निर्माण मुख्य तौर पर खंडाला घाट खंड पर भारी वाहनों के ट्रैफिक को विभाजित कर उसे सुगम बनाने के लिए किया गया है। इस विशेष खंड पर दो बड़ी सुरंगों का निर्माण हुआ है, जिसमें से छोटी टनल की लंबाई 1.6 किलोमीटर है जबकि बड़ी वाली टनल 8.9 किलोमीटर लंबी बनाई गई है। यह विशाल टनल लोनावला झील के ठीक नीचे से होकर गुजरती है, जिससे मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग छह किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रियों के कीमती समय में से 25 मिनट की सीधी बचत होगी। इसका आप पर असर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों और मालवाहक चालकों के लिए इस मार्ग का विस्तार और सुरक्षा इंतजाम सीधे तौर पर सफर को सुगम बनाएंगे। • भारत में: देश के सबसे व्यस्त और महंगे औद्योगिक गलियारों में शुमार इस मार्ग पर यातायात सुधरने से दो महानगरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सड़क के चौड़े होने से लंबी दूरी के ट्रकों और कम्यूटर कारों का समय बचेगा। • महाराष्ट्र में: मुंबई और पुणे के बीच रोजाना यात्रा करने वाले हजारों नौकरीपेशा लोगों और पर्यटकों को मिसिंग लिंक और नई लेन बनने से भयंकर जाम से राहत मिलेगी। सफर का समय घटने से ईंधन की खपत कम होगी और यात्रा अधिक सुरक्षित होगी। ऐसा क्यों हुआ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव इसकी मूल डिजाइन क्षमता से कई गुना अधिक बढ़ जाने के कारण बुनियादी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता पड़ी है। • अत्यधिक ट्रैफिक वृद्धि: इस मार्ग को मूल रूप से प्रतिदिन चालीस हजार वाहनों के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में डेढ़ लाख से अधिक गाड़ियां दौड़ने के कारण जाम की समस्या गंभीर हो गई है। • भौगोलिक बाधाएं: पश्चिमी घाट के पहाड़ी इलाकों और सर्पीले रास्तों के कारण लोनावला और खंडाला जैसे सेक्शनों में गाड़ियां धीमी हो जाती हैं, जिससे ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। • औद्योगिक विकास: मुंबई और पुणे के बीच बढ़ते आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों के कारण पिछले दो दशकों में व्यक्तिगत कारों और कमर्शियल वाहनों की आवाजाही में भारी उछाल आया है। सवाल-जवाब 1. मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है? इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 94.6 किलोमीटर है जो कालमबोली से किवाले तक फैली है। 2. इस एक्सप्रेसवे को कब शुरू किया गया था? इस मार्ग को वर्ष 2002 में यातायात के लिए खोला गया था। 3. रोजाना इस रास्ते से कितने वाहन गुजरते हैं? इस रास्ते पर रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं, जबकि वीकेंड पर यह आंकड़ा 3 लाख से ऊपर चला जाता है। 4. इस एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए कितना टोल लगता है? इस पर कारों के लिए 250 रुपये का टोल शुल्क वसूला जाता है। 5. इस मार्ग को कितने लेन का बनाने की तैयारी है? बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इस एक्सप्रेसवे को वर्ष 2030 तक 10 लेन का बनाने की तैयारी चल रही है। 6. मिसिंग लिंक परियोजना से कितनी दूरी कम होगी? मिसिंग लिंक के शुरू होने से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी। https://trendkia.com/maharashtra/mumbai-pune-expressway-handles-1-5-lakh-vehicles-daily-remains-completely-pothole-free-after-two-decades-33304 TrendKia — Har trend, sabse pehle.