# मुंबई में हास्य और व्यंग्य के मंच पर जुटे तीन दिग्गज, देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव और राज ठाकरे के सामने ली चुटकी

> दादर में पुस्तक विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए, जहां राजनीतिक तल्खी भुलाकर नेताओं ने एक-दूसरे पर हास्य बाण चलाए।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/munbai-men-hasya-aura-vyngya-ke-mncha-para-jute-tina-diggaja-devendra-fadnavis-ne-uddhav-aura-raj-thackeray-ke-samane-li-chutaki-53121 · **Language:** Hindi
**Tags:** देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, आशीष शेलार, महाराष्ट्र राजनीति, महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा, दादर सावरकर स्मारक, कार्टून कला

महाराष्ट्र की समकालीन राजनीति में जब भी तीखी बयानबाजी और तल्ख रिश्तों की बात होती है, तो उसमें देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का नाम अक्सर अलग-अलग ध्रुवों पर देखा जाता है। हालांकि, मुंबई के दादर स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक सभागृह में एक ऐसा अनोखा और खुशनुमा माहौल देखने को मिला, जिसने रोजमर्रा की सियासी खींचतान को कुछ घंटों के लिए पूरी तरह पीछे धकेल दिया। मौका था ‘महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा’ नामक पुस्तक के औपचारिक लोकार्पण का, जहां राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक ही मंच साझा किया। इस विशेष सांस्कृतिक आयोजन में राज्य के कला एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार भी उपस्थित रहे। मंच पर जमा हुए इन कद्दावर नेताओं ने अपनी पुरानी राजनीतिक कड़वाहट को भुलाकर खुले दिल से हंसी-मजाक किया और एक-दूसरे पर दिलचस्प चुटकियां लीं।

 

## मंच पर स्थान को लेकर मुख्यमंत्री का चुटीला अंदाज

सभागार में उस वक्त ठहाके गूंज उठे जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन की शुरुआत की। दरअसल, मंच की व्यवस्था ऐसी थी कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने बाईं तरफ रखे पोडियम से अपनी बात रखी थी, जबकि जब फडणवीस के बोलने की बारी आई तो वे दाईं ओर रखे माइक पर पहुंचे। माइक संभालते ही फडणवीस ने तुरंत इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि बाकी सब लोग लेफ्ट में चले गए, इसी वजह से वे खुद राइट में आ गए हैं। उनकी इस बात पर दर्शक दीर्घा में बैठे लोग और मंचस्थ नेता मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।

मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही आशीष शेलार द्वारा दिए गए उस बयान को भी आगे बढ़ाया, जिसमें शेलार ने कहा था कि राज ठाकरे जब भी फोन करते हैं तो फडणवीस चले आते हैं। इस पर फडणवीस ने उद्धव ठाकरे की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि साल 2019 से पहले उद्धव ठाकरे ने जब भी उन्हें फोन किया और जहां कहीं भी बुलाया, वे हमेशा वहां पहुंचे। लेकिन 2019 के घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे ने उन्हें कभी फोन ही नहीं किया। फडणवीस ने चुटकी लेते हुए यह भी जोड़ा कि कार्यक्रम में सबसे आखिर में बोलने का एक बड़ा फायदा यह होता है कि राज ठाकरे अब उनकी कही बातों का मंच से तुरंत जवाब नहीं दे पाएंगे।

 

## राजनीति और कला के बीच का फर्क

राज ठाकरे द्वारा भाषण के दौरान मुख्यमंत्री पद को लेकर की गई एक टिप्पणी का जवाब भी देवेंद्र फडणवीस ने बेहद सधे हुए और मजाकिया अंदाज में दिया। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि हर इंसान को अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और रुचि के क्षेत्र में सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि राज ठाकरे एक कुशल और सिद्धहस्त कार्टूनिस्ट हैं, लिहाजा उन्हें नियमित तौर पर कार्टून बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे एक बेहतरीन फोटोग्राफर हैं, इसलिए दोनों को अपने-अपने कलात्मक शौक पूरे करने चाहिए और उन्हें खुद आराम से राजनीति करने देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि महाराष्ट्र की एक गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपरा रही है, जहां राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कभी व्यक्तिगत कटुता में नहीं बदलती। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वैचारिक रूप से विरोधी दलों के नेता किसी साझा मंच पर साथ खड़े नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नेता एक साथ आयोजनों में भाग ले सकते हैं, मिल-बैठकर ठहाके लगा सकते हैं और चाय की चुस्कियां भी ले सकते हैं। फडणवीस ने इस कार्यक्रम में खुद को आमंत्रित करने के लिए राज ठाकरे का विशेष आभार व्यक्त किया और बताया कि राज ठाकरे ने ही आयोजकों को यह सुझाव दिया था कि इस पुस्तक का लोकार्पण मुख्यमंत्री के कर-कमलों से ही कराया जाना चाहिए।

 

## कार्टून में वजन और शारीरिक बनावट पर गुजारिश

व्यंग्यचित्रों और कार्टून कला की सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के तनाव भरे दौर में भी किसी अखबार या किताब में एक अच्छा कार्टून देखने पर मन खिल उठता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में राजनेता खुद इन व्यंग्यकारों के पसंदीदा पात्र बन चुके हैं। आमतौर पर हर इंसान की स्वाभाविक इच्छा होती है कि उसकी तस्वीरें सुंदर दिखें, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कई बार ऐसे कार्यक्रमों में जाना पड़ता है जहां खुद का ही कार्टून सामने लगा दिखाई देता है। व्यंग्यचित्र चाहे जैसा भी तराशा गया हो, उसे देखकर चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती है।

इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने राज ठाकरे के साथ हुई एक पुरानी बातचीत का मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि किसी पिछले कार्यक्रम में उन्होंने राज ठाकरे से व्यक्तिगत रूप से यह निवेदन किया था कि यदि वे कभी उनका व्यंग्यचित्र बनाएं, तो उनकी नाक और कान भले ही थोड़े बड़े बना दें, लेकिन कार्टून में उनका पेट बड़ा न दिखाएं। फडणवीस ने संतोष जताते हुए कहा कि राज ठाकरे ने उनकी इस गुजारिश का पूरा मान रखा और अब तक ऐसा कोई कार्टून नहीं बनाया जिसमें उनका पेट बहुत बड़ा दिखाया गया हो। हालांकि, उन्होंने शिकायत भरे लहजे में मुस्कुराते हुए कहा कि बाकी कार्टूनिस्ट उनकी यह बात नहीं मानते और उन्हें सिर्फ उनका बढ़ा हुआ पेट ही नजर आता है। मुख्यमंत्री ने साथ ही यह भी साझा किया कि उन्होंने हाल के समय में अपना वजन कुछ कम किया है, इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि अब शायद कुछ कार्टूनिस्ट इस पहलू पर उन्हें बख्श देंगे। ज्ञात हो कि पूर्व के दिनों में उद्धव ठाकरे कई बार फडणवीस के वजन को लेकर सार्वजनिक बयानों में तंज कस चुके हैं।

 

## राज ठाकरे ने ली मुख्यमंत्री की कुर्सी पर चुटकी

इससे पहले मंच पर अपने चिरपरिचित अंदाज में बोलते हुए राज ठाकरे ने भी माहौल को पूरी तरह हल्का बनाए रखा। उन्होंने आशीष शेलार की उस बात को उठाया जिसमें शेलार ने दावा किया था कि उनके एक बार कहने पर मुख्यमंत्री कार्यक्रम में चले आए। राज ठाकरे ने मुस्कुराते हुए कहा कि आशीष शेलार ने अभी सबको बताया कि उनके बुलावे पर मुख्यमंत्री आ गए और आगे भी वे मुख्यमंत्री को आमंत्रित करते रहेंगे। इस पर राज ठाकरे ने शेलार को सलाह दी कि वे बस इतना सुनिश्चित करें कि साल 2029 तक देवेंद्र फडणवीस को इसी पद पर बनाए रखा जाए।

राज ठाकरे ने अपने विद्यार्थी जीवन और चुनावी नियमों की विडंबना से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन वर्षों तक जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स में अध्ययन किया था, परंतु किन्हीं कारणों से बाद में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। औपचारिक रूप से स्नातक की डिग्री न होने के बावजूद वे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़ने के पात्र बन सकते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि एक दौर में प्रमोद नवलकर ने उन्हें स्नातक एमएलसी प्रत्याशी का नामांकन पत्र दिखाया था। उस फॉर्म के सबसे निचले हिस्से में लिखा हुआ था कि प्रत्याशी अपने हस्ताक्षर करे या अंगूठे का निशान लगाए। राज ठाकरे ने व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए कहा कि स्नातक सीट के उम्मीदवार के लिए स्वयं स्नातक होना आवश्यक नहीं समझा गया, जो अपने आप में एक बड़ा व्यंग्यचित्र है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि जब अंगूठा लगाने की छूट हो, तो ऐसे में देश की व्यवस्था पर सिर्फ 'मेरा भारत महान' ही कहा जा सकता है।

नेताओं के एक साथ जुटने को लेकर हो रही चर्चाओं पर राज ठाकरे ने साफ कहा कि रोज एक-दूसरे के खिलाफ बयान देने वाले और सियासी मैदान में भिड़ने वाले चेहरे जब एक मंच पर आते हैं, तो मीडिया के लिए यह दिनभर की ब्रेकिंग न्यूज बन जाती है। लेकिन जीवन में कई ऐसे मौके आते हैं जहां राजनीतिक मतभेदों को परे रखकर एक साथ बैठना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ये अवसर कभी कला के हो सकते हैं, कभी संगीत के और कभी दूसरों के विवाह समारोहों के हो सकते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि परस्पर विरोधी विचारों के बावजूद ऐसे आयोजनों में सौहार्द के साथ शामिल होना ही महाराष्ट्र की असली संस्कृति है।

 

## आशीष शेलार और उद्धव ठाकरे के बीच संवाद

कार्यक्रम में राज्य के मंत्री आशीष शेलार ने उद्धव ठाकरे की पुरानी कलात्मक प्रतिभा का एक रोचक संस्मरण साझा किया। शेलार ने बताया कि कुछ समय पहले जब वे पुणे में थे, तब एक कार्यक्रम के दौरान उनकी भेंट बाबासाहेब पुरंदरे के सुपुत्र से हुई थी। वहां प्रसाद पुरंदरे ने बातों ही बातों में उन्हें बताया कि उद्धव ठाकरे भी किसी जमाने में नियमित रूप से कार्टून बनाया करते थे।

शेलार ने कहा कि यह बात जानने के बाद जब वे मंच पर आए, तो उन्होंने उद्धव ठाकरे के कान के करीब जाकर इस बारे में पूछा। उन्होंने चुटकी ली कि करीब सात या आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उन्हें उद्धव ठाकरे के कान में कुछ कहने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ था। जब शेलार ने पूछा कि क्या वे सचमुच कार्टून बनाते थे, तो उद्धव ठाकरे ने इस बात को स्वीकार किया। इस पर शेलार ने पुस्तक के संकलनकर्ता प्रशांत कुलकर्णी की ओर मुखातिब होकर कहा कि इस किताब में अभी कुछ पन्ने अधूरे हैं। यदि वे उद्धव ठाकरे के संग्रह से उनके बनाए कार्टून और उनसे जुड़े संस्मरण जुटा सकें, तो इस ऐतिहासिक दस्तावेज को पूरी तरह संपूर्ण बनाया जा सकता है।

आशीष शेलार ने यह भी याद दिलाया कि पुस्तक विमोचन की योजना के दौरान प्रशांत कुलकर्णी जब राज ठाकरे से मिले थे, तब राज ठाकरे ने ही जोर देकर कहा था कि चूंकि किताब में महाराष्ट्र का चित्रण है, इसलिए इसका विमोचन राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों ही होना चाहिए। शेलार ने उद्धव ठाकरे की ओर देखते हुए कहा कि उन्हें भी यह समझ लेना चाहिए कि राज ठाकरे के बुलाने पर मुख्यमंत्री तुरंत आ जाते हैं। उन्होंने आशा जताई कि कला और संस्कृति के ऐसे मंचों के जरिए भविष्य में भी इन सभी नेताओं को एक साथ बैठने का अवसर मिलता रहेगा।

 

## उद्धव ठाकरे की हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया

सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भी इस हास्यपूर्ण वातावरण में अपनी बात रखी। उन्होंने राज ठाकरे और आशीष शेलार के बीच हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने दरअसल आशीष शेलार से कहा था कि वे अपनी तरफ से फुलटॉस गेंद छोड़ रहे हैं, लेकिन इसी बीच राज ठाकरे ने शॉट खेल दिया। उद्धव ठाकरे ने मुस्कुराते हुए बताया कि आशीष शेलार को किसी जरूरी काम से दिल्ली के लिए रवाना होना था, इसलिए शेलार चाहते थे कि कार्यक्रम थोड़ा जल्दी संपन्न हो जाए ताकि उनकी यात्रा में विलंब न हो।

इस पूरे आयोजन ने यह साबित किया कि चुनावी मुकाबला और राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, परंतु जब विषय महाराष्ट्र की व्यंग्य परंपरा, हास्य कला और सांस्कृतिक धरोहर का हो, तो राज्य के शीर्ष राजनेता एक ही मंच पर बैठकर न केवल मुस्कुरा सकते हैं बल्कि एक-दूसरे के साथ स्वस्थ विनोद भी कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
महाराष्ट्र के तीन धुर विरोधी नेताओं के एक मंच पर आने से राज्य के राजनीतिक विमर्श में व्यक्तिगत कटुता कम होने और स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद की उम्मीद जगी है।

- **महाराष्ट्र में:** चुनावी तनातनी के बीच प्रमुख दलों के शीर्ष नेताओं की यह सौहार्दपूर्ण मुलाकात कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक शिष्टाचार बनाए रखने का संदेश देती है। इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक टकराव और हिंसक बयानबाजी में नरमी आने की उम्मीद की जा सकती है।
- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर जहां दलीय दुश्मनी व्यक्तिगत नफरत में बदलती दिखती है, वहीं इस घटना ने दिखाया कि कला और साहित्य के मंच पर वैचारिक विरोधी भी साथ हंस सकते हैं। यह पूरे देश के राजनीतिक संवाद के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- **कलाकारों और व्यंग्यकारों के लिए:** सत्ता और विपक्ष के नेताओं का एक साथ कार्टून कला का उत्सव मनाना यह साबित करता है कि राजनीतिक व्यंग्य को स्वस्थ भाव से लिया जाना चाहिए। इससे समकालीन कलाकारों को निडरता और सम्मान के साथ अपनी कला अभिव्यक्त करने का बल मिलता है।
- **आम नागरिकों के लिए:** टीवी बहसों और सोशल मीडिया पर कड़वाहट देखने वाली जनता के लिए नेताओं का यह दोस्ताना अंदाज एक बड़ा मानसिक सुकून देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दलों के मतभेद सिर्फ नीतियों तक सीमित होने चाहिए, व्यक्तिगत संबंधों तक नहीं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह असामान्य राजनीतिक दृश्य दादर में मराठी व्यंग्यचित्रों के ऐतिहासिक संग्रह पर आधारित पुस्तक के विमोचन समारोह के कारण संभव हुआ, जहां आयोजकों ने सभी दलों के नेताओं को एक साथ आमंत्रित किया था।

- **सांस्कृतिक पुस्तक का विमोचन:** वरिष्ठ नेताओं के एकत्र होने का प्रत्यक्ष कारण ‘महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा’ पुस्तक का विमोचन था, जो महाराष्ट्र की समृद्ध राजनीतिक कार्टून परंपरा का दस्तावेजीकरण करती है। चूंकि विषय हास्य और कला से जुड़ा था, इसलिए नेताओं ने अपने तीखे राजनीतिक मतभेदों को किनारे रख दिया।
- **राज ठाकरे की विशेष पहल:** इस आयोजन की पृष्ठभूमि में राज ठाकरे का यह दृढ़ सुझाव था कि पुस्तक चूंकि पूरे राज्य के गौरव से जुड़ी है, इसलिए इसका विमोचन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा ही कराया जाना चाहिए। उनकी इस पहल ने मुख्यमंत्री और उद्धव ठाकरे को एक मंच पर लाने का रास्ता साफ किया।
- **महाराष्ट्र की सर्वदलीय संस्कृति:** राज्य में साहित्य, नाटक, संगीत और व्यक्तिगत प्रसंगों पर परस्पर विरोधी नेताओं का एक साथ आना एक पुरानी परंपरा रही है। बालासाहेब ठाकरे और शरद पवार के दौर से चली आ रही इस राजनीतिक संस्कृति के कारण कड़वे विरोध के बावजूद नेता ऐसे आयोजनों से दूरी नहीं बनाते।

## सवाल-जवाब

### 1. यह कार्यक्रम मुंबई में कहां और किस अवसर पर आयोजित हुआ था?
यह कार्यक्रम दादर स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक सभागृह में ‘महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा’ नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर आयोजित किया गया था।

### 2. मंच पर कौन-कौन से प्रमुख नेता एक साथ उपस्थित रहे?
इस मंच पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार मौजूद रहे।

### 3. देवेंद्र फडणवीस ने मंच पर अपने स्थान को लेकर क्या चुटकी ली?
फडणवीस ने कहा कि बाकी सब नेता मंच के लेफ्ट में चले गए थे, इसलिए वे दाईं ओर रखे माइक पर आकर राइट में आ गए हैं।

### 4. राज ठाकरे ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के नामांकन फॉर्म को लेकर क्या विसंगति बताई?
राज ठाकरे ने बताया कि स्नातक सीट के फॉर्म में उम्मीदवार को हस्ताक्षर या अंगूठा लगाने का विकल्प दिया गया था, जिससे साफ है कि उम्मीदवार का खुद स्नातक होना जरूरी नहीं माना गया।

### 5. फडणवीस ने कार्टून में अपने शरीर को लेकर राज ठाकरे से क्या अनुरोध किया था?
फडणवीस ने अनुरोध किया था कि उनका कार्टून बनाते समय भले ही नाक और कान बड़े बना दिए जाएं, लेकिन उनका पेट बड़ा न दिखाया जाए।

### 6. आशीष शेलार ने उद्धव ठाकरे के किस पुराने शौक का खुलासा किया?
आशीष शेलार ने साझा किया कि उद्धव ठाकरे भी पूर्व में नियमित रूप से कार्टून बनाया करते थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने मंच पर स्वीकार भी किया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._