# नई पीढ़ी को सिखाएं सही-गलत का भेद, नागपुर कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत

> मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि आज देश की आजादी के समय से भी ज्यादा मेहनत की आवश्यकता है। उन्होंने नई पीढ़ी को सही और गलत का अंतर समझाने पर जोर दिया।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/nai-pirhi-ko-sikhaen-sahi-galata-ka-bheda-nagapura-karyakrama-men-bole-mohan-bhagat-49650 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोहन भागवत, आरएसएस, नागपुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, डॉ केशव बलिराम हेडगेवार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान देश की वर्तमान स्थिति और युवा पीढ़ी के संस्कारों को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने जितनी मेहनत की थी, आज उससे भी अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है ताकि समाज को सही दिशा दी जा सके।

 

## युवाओं को सही-गलत का ज्ञान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में नई पीढ़ी को उचित और अनुचित का भेद स्पष्ट रूप से समझाने की जरूरत है। बदलते दौर में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं में सही संस्कारों का रोपण बेहद आवश्यक है।

 

## ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 27 सितंबर 1925 को की गई थी। स्थापना के बाद से ही यह संगठन लगातार राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। वर्तमान समय में देश भर में संघ की करीब 40 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो युवाओं को अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती हैं।

 

## वैश्विक स्तर पर उपस्थिति

भारतीय संस्कृति और विचारों का प्रसार करने वाली इन शाखाओं का दायरा अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के 39 देशों में फैल चुकी हैं। विदेशों में भी इसके माध्यम से भारतीय मूल के लोग और अन्य नागरिक जुड़ रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह बयान समाज में वैचारिक और नैतिक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिसका सीधा प्रभाव युवाओं के पालन-पोषण और पारिवारिक संस्कारों पर पड़ सकता है।

- **भारत में:** देश भर के सांस्कृतिक और वैचारिक संगठनों की कार्यशैली में इसका असर देखा जा सकता है। यह बयान युवाओं के बीच नैतिक शिक्षा और अनुशासन को बढ़ावा देने का काम करता है।

- **नागपुर में:** स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच वैचारिक स्पष्टता बढ़ेगी। इससे स्थानीय शिक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नैतिक मूल्यों पर अधिक जोर दिया जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बयान वर्तमान सामाजिक परिदृश्य और युवा पीढ़ी में तेजी से बदलते नैतिक मूल्यों की पृष्ठभूमि में आया है। समाज में अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को बनाए रखने के लिए इस तरह के वैचारिक उद्बोधन दिए जाते हैं।

- **वैचारिक पृष्ठभूमि:** देश की स्वतंत्रता के बाद से ही संघ द्वारा समाज को संगठित करने और नैतिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी कड़ी में वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक परिश्रम की आवश्यकता बताई गई है।

- **संस्कार और शिक्षा:** आधुनिक युग में तकनीकी विकास के साथ युवाओं में बढ़ रहे भटकाव को रोकने के लिए सही और गलत की पहचान कराना आवश्यक माना गया है।

- **संगठन का विस्तार:** वर्ष 1925 में स्थापित यह संगठन आज देश-विदेश में अपनी शाखाओं के माध्यम से अपने विचारों का प्रसार कर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोहन भागवत ने नागपुर में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने जितनी मेहनत की थी, आज समाज को उससे भी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।

### 2. आरएसएस की स्थापना कब और किसने की थी?
आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

### 3. पूरे देश में संघ की कितनी शाखाएं हैं?
पूरे देश में आरएसएस की करीब 40 हजार से ज्यादा शाखाएं चलती हैं।

### 4. संघ की शाखाएं कितने देशों में फैली हैं?
संघ की शाखाएं वर्तमान में 39 देशों में मौजूद हैं।

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