# नासिक के अंबड में भूजल में घुला जानलेवा हेक्सावैलेंट क्रोमियम, गोदावरी के घाटों तक जहर फैलने का अंदेशा

> नासिक के अंबड में भूजल नमूनों की जांच में हेक्सावैलेंट क्रोमियम तय सीमा से 1,000 गुना अधिक मिला है, जिसके स्थानीय नालों से होकर गोदावरी नदी के कुंभ मेला घाटों तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/nashik-ke-ambad-men-bhujala-men-ghula-janaleva-heksavailenta-kromiyama-godavari-ke-ghaton-taka-jahara-phailane-ka-andesha-46467 · **Language:** Hindi
**Tags:** नासिक, अंबड, गोदावरी नदी, कुंभ मेला, भूजल प्रदूषण, हेक्सावैलेंट क्रोमियम

महाराष्ट्र के नासिक शहर में भूजल प्रदूषण को लेकर एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने जनस्वास्थ्य के साथ-साथ आगामी कुंभ मेले की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नासिक के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र अंबड में भूजल की प्रयोगशाला जांच कराई गई, जिसमें कैंसर कारक जहरीले तत्व हेक्सावैलेंट क्रोमियम की मौजूदगी चौंकाने वाले स्तर पर पाई गई है। साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल के अनुसार, पानी के इन नमूनों में इस घातक रसायन की सघनता भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा की तुलना में 1,000 गुना से भी अधिक दर्ज की गई है। इस खुलासे के बाद पर्यावरणविदों और आम नागरिकों के बीच हड़कंप मच गया है, क्योंकि यही भूजल स्थानीय नालों के जरिए गोदावरी नदी में मिलने का अंदेशा जताया जा रहा है।

चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि गोदावरी नदी का जो हिस्सा संभावित रूप से प्रभावित बताया जा रहा है, वहां वे घाट भी स्थित हैं जहां कुंभ मेले के दौरान देश और दुनिया भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए जुटेंगे। यदि समय रहते इस जल प्रदूषण की रोकथाम नहीं की गई, तो यह स्थिति एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

## जांच के आंकड़े और सुरक्षित मानकों का उल्लंघन
साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल द्वारा 8 अक्टूबर को जारी किए गए आधिकारिक बयान में प्रयोगशाला परीक्षण के विस्तृत आंकड़े साझा किए गए। इन जांच परिणामों के अनुसार, अंबड क्षेत्र से लिए गए पानी के नमूनों में कुल क्रोमियम की सघनता 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। सबसे ज्यादा भयावह बात यह है कि कुल क्रोमियम में से अकेले हेक्सावैलेंट क्रोमियम का स्तर 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो कि लगभग पूरे क्रोमियम अंश का मुख्य घटक है।

भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इंसानों के पीने के पानी में क्रोमियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा महज 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर तय की गई है। इस आधिकारिक पैमाने की तुलना में अंबड के भूजल में पाया गया 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर का स्तर अनुमेय सीमा से 1,000 गुना से भी ज्यादा बैठता है। पानी में इतनी भारी मात्रा में औद्योगिक रसायन की उपस्थिति पानी की गुणवत्ता और मानवीय उपयोग की सुरक्षा को लेकर बेहद संगीन स्थिति पैदा करती है। हालांकि, इन दावों की निष्पक्ष पुष्टि के लिए अब संबंधित सरकारी एजेंसियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्वतंत्र नमूनों की जांच और व्यापक निगरानी की दरकार है।

## हेक्सावैलेंट क्रोमियम का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
हेक्सावैलेंट क्रोमियम दरअसल धातु क्रोमियम का सबसे विषैला रासायनिक स्वरूप माना जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे एक खतरनाक कार्सिनोजेन के रूप में पहचाना जाता है, जिसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से मानव शरीर में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के पनपने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। कैंसर के अतिरिक्त, यह रसायन मानव त्वचा के सीधे संपर्क में आते ही गंभीर जलन, चकत्ते, असहनीय खुजली और त्वचा संबंधी एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा करने लगता है।

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल ने अपने बयान में दावा किया है कि अंबड और आसपास के इलाकों में रहने वाले कई स्थानीय नागरिक पहले से ही त्वचा संबंधी तकलीफों और अन्य अज्ञात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि, इन बीमारियों और भूजल में घुले रसायन के बीच सीधा कारण और प्रभाव स्थापित करने के लिए अभी सघन चिकित्सीय जांच और विस्तृत वैज्ञानिक महामारी विज्ञान अध्ययनों की आवश्यकता है। औद्योगिक बस्तियों में भूजल ही दैनिक उपयोग और घरेलू कामकाज का प्राथमिक जरिया होता है, लिहाजा अगर लोग अनजाने में इस दूषित पानी का इस्तेमाल कपड़े धोने, नहाने या खाना पकाने में कर रहे हैं, तो उनकी जान पर निरंतर खतरा मंडरा रहा है।

## गोदावरी के पवित्र घाटों तक रिसाव की आशंका
इस पूरे मामले का दूसरा और सबसे संवेदनशील पहलू पर्यावरण और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। संगठन ने भारी आशंका जताई है कि अंबड के भूजल में घुला यह अत्यधिक दूषित पानी इलाके के स्थानीय प्राकृतिक नालों और नालियों के माध्यम से बहकर सीधे गोदावरी नदी के प्रवाह में मिल रहा है। यदि सरकारी जांच में इस बात की पुष्टि हो जाती है, तो यह संकट केवल नासिक के एक खास इलाके के भूजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूची गोदावरी नदी की जल प्रणाली और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी विषाक्त कर देगा।

हालांकि, वर्तमान समय में इस बात के विस्तृत और आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि नदी में प्रदूषण किस सीमा तक फैला है, पानी का बहाव कितना दूषित हुआ है और नदी के अलग-अलग घाटों पर जल की गुणवत्ता किस स्थिति में है। इसलिए वैज्ञानिक और प्रशासनिक तौर पर यह दावा करना अभी जल्दबाजी होगी कि गोदावरी के सभी घाट अथवा कुंभ मेले के सभी स्नान स्थल इस प्रदूषण की जद में आ चुके हैं।

## लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जवाबदेही के सवाल
नासिक में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेले के दौरान देश के कोने-कोने से लाखों साधु-संत और आम श्रद्धालु गोदावरी के तटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचेंगे। ऐसे में यदि औद्योगिक कचरे से उपजा यह जहर गोदावरी के उन मुख्य घाटों तक पहुंच जाता है जहां स्नान होना है, तो लाखों लोगों की त्वचा और संपूर्ण स्वास्थ्य पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है।

वर्तमान में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भूजल में इतने विषैले रसायन के घुलने का मूल स्रोत क्या है और किस औद्योगिक इकाई से यह रिसाव हो रहा है। प्रशासन को तत्काल इस बात की जांच करनी होगी कि क्या यह गंदा पानी वाकई नालों से होता हुआ गोदावरी तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही अंबड के स्थानीय निवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। कुंभ मेले के आयोजन से पहले सभी प्रभावित क्षेत्रों में भूजल की दोबारा जांच कराना, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर ताला लगाना और जांच के नतीजों को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
अंबड और नासिक के निवासियों के लिए यह रिपोर्ट भूजल के तत्काल इस्तेमाल पर रोक लगाने और वैकल्पिक सुरक्षित पानी तलाशने की गंभीर चेतावनी है।

- **नासिक में:** अंबड और नजदीकी बस्तियों के लोगों को स्थानीय बोरवेल या हैंडपंप का पानी सीधे पीने और नहाने से तुरंत बचना चाहिए। यदि किसी को त्वचा पर जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- **महाराष्ट्र में:** औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले नागरिक अपने बोरवेल के पानी की गुणवत्ता पर नजर रखें और प्रशासन से नियमित जल जांच की मांग करें। गोदावरी नदी के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले परिवारों को नदी के गैर-उपचारित पानी के इस्तेमाल में अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी।
- **भारत में:** आगामी कुंभ मेले में नासिक आने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए स्नान घाटों की जल स्वच्छता से जुड़ी आधिकारिक प्रशासनिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी होगा। देश भर के पर्यावरण और स्वास्थ्य जागरूक लोग औद्योगिक कचरे से नदियों के दूषित होने पर सख्त निगरानी तंत्र की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।
- **आम नागरिकों के लिए:** किसी भी असामान्य गंध, रंग या स्वाद वाले भूजल का उपयोग बिना मानक प्रयोगशाला परीक्षण के कभी न करें। भूजल प्रदूषण अक्सर सीधे आंखों से नहीं दिखता, इसलिए बीआईएस मानकों पर खरा उतरने वाला सुरक्षित जल ही इस्तेमाल करें।

## ऐसा क्यों हुआ
नासिक के अंबड क्षेत्र में भूजल का यह भीषण प्रदूषण औद्योगिक कचरे के अनियंत्रित रिसाव और जलस्रोतों की निगरानी में लापरवाही के कारण सामने आया है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** अंबड इलाके में भूजल के नमूनों की जांच के दौरान हेक्सावैलेंट क्रोमियम का स्तर 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो बीआईएस की 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना अधिक है। इस अत्यधिक जहरीले औद्योगिक रसायन के भूजल में मिलने से पूरा जलस्तर दूषित हो गया।
- **संभावित परिस्थितियां:** अंबड एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है जहां विभिन्न कारखानों और विनिर्माण इकाइयों का संचालन होता है। संभावना है कि औद्योगिक अपशिष्ट या बिना उपचारित रासायनिक कचरे के जमीन में रिसने से यह जहरीला तत्व जलस्रोतों में घुल गया।
- **गोदावरी तक फैलाव का जरिया:** अंबड के दूषित भूजल और रासायनिक अपशिष्ट के स्थानीय प्राकृतिक नालों के जरिए बहकर गोदावरी नदी के मुख्य प्रवाह तक पहुंचने का अंदेशा जताया गया है। जांच में इस प्रवाह की पुष्टि होना बाकी है कि रसायन नदी के किन-किन घाटों तक पहुंचा है।
- **आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा:** हालांकि साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल ने अपने परीक्षण आंकड़े 8 अक्टूबर को जारी किए हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र जांच और प्रदूषण के वास्तविक उद्गम स्थल की आधिकारिक पहचान की जानी अभी बाकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. नासिक के अंबड इलाके में पानी की जांच में क्या पाया गया?
अंबड में भूजल परीक्षण के दौरान कैंसर कारक हेक्सावैलेंट क्रोमियम का स्तर 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक है।

### 2. पीने के पानी में क्रोमियम की स्वीकार्य सीमा क्या है?
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुसार पीने के पानी में क्रोमियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर निर्धारित है।

### 3. हेक्सावैलेंट क्रोमियम स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है?
यह क्रोमियम का एक अत्यंत जहरीला रूप है, जिसके लंबे संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ता है और त्वचा पर गंभीर जलन, एलर्जी और चकत्ते हो सकते हैं।

### 4. इस प्रदूषण से गोदावरी नदी और कुंभ मेले पर क्या असर पड़ सकता है?
आशंका है कि दूषित पानी नालों के रास्ते गोदावरी नदी तक पहुंच रहा है, जिससे कुंभ मेले में स्नान के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

### 5. यह रिपोर्ट किस संस्था द्वारा जारी की गई है?
यह रिपोर्ट साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल द्वारा 8 अक्टूबर को जारी बयान में सामने रखी गई है।

### 6. क्या सरकारी एजेंसियों ने इस प्रदूषण की पुष्टि कर दी है?
सरकारी एजेंसियों की स्वतंत्र जांच और जलस्रोतों की विस्तृत निगरानी अभी बाकी है, जिससे प्रदूषण के स्रोत और प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि होगी।

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