नीट आंदोलन में राकेश टिकैत और मनोज जरांगे की एंट्री, जंतर-मंतर से सरकार को दी बड़े अंजाम भुगतने की चेतावनी 20 जुलाई को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नीट विरोध प्रदर्शन ने एक बड़ा रूप ले लिया है। अब इस आंदोलन में दिग्गज किसान नेता राकेश टिकैत और मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे भी शामिल हो गए हैं, जिन्होंने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को सख्त परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। राष्ट्रीय राजधानी में नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बड़ा रूप ले चुका है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से शुरू किया गया यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे में बदल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा और छात्र जवाबदेही की मांग को लेकर दिल्ली के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल पर जमा हो रहे हैं। यहां हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे, लेकिन बीती 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद पूरी स्थिति अचानक बदल गई। पुलिस की इस कार्रवाई ने छात्रों के गुस्से को और भड़का दिया है, जिसके बाद कई बड़े राजनेताओं और दिग्गज आंदोलनकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन जताना शुरू कर दिया है। बड़े आंदोलनकारियों ने संभाला मोर्चा छात्रों के इस धरने को अब दो ऐसे बड़े चेहरों का साथ मिल गया है, जो सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और मराठा आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष करने वाले प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने खुलकर छात्रों का पक्ष लिया है। इन दोनों नेताओं की जंतर-मंतर पर मौजूदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों का ही मौजूदा सत्ता पक्ष से सीधे टकराव का इतिहास रहा है। राकेश टिकैत 2020-21 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ चले लंबे किसान आंदोलन के मुख्य सूत्रधार थे। वहीं, मनोज जरांगे पाटिल ने सितंबर 2023 में महाराष्ट्र की तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार के खिलाफ मराठा कोटे के लिए एक बड़ा और असरदार मोर्चा खोला था। अब इन दोनों नेताओं के उतरने से यह साफ हो गया है कि छात्रों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी ज्यादा तेज हो सकता है। ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ तैयार हैं किसान बुधवार को करीब 500 किसानों के एक बड़े जत्थे के साथ जंतर-मंतर पहुंचे राकेश टिकैत ने अपने इरादे पूरी तरह स्पष्ट कर दिए। उन्होंने धरने पर बैठे युवाओं को भरोसा दिलाया कि देश भर का किसान इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है। टिकैत ने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो किसानों की ट्रैक्टर ट्रॉली भी छात्रों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी हैं। किसान नेता ने इस लड़ाई को महज एक परीक्षा का विवाद न मानते हुए इसे एक वैचारिक संघर्ष करार दिया और कहा कि वैचारिक क्रांति दुनिया की सबसे बड़ी क्रांति होती है। टिकैत ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए उनसे कहा, भूख हड़ताल बिल्कुल न करें, क्योंकि यहां का राजा तानाशाह है। अपना शरीर गलाने के बजाय, टिकैत ने छात्रों को सलाह दी कि वे प्रदर्शन स्थल पर भंडारे खोलें और लंगर चलाएं ताकि आंदोलन को लंबे समय तक शांतिपूर्ण ढंग से चलाया जा सके। 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी आदेश पर तो आंदोलनकारियों को पुलिस की लाठियां खानी ही पड़ती हैं, लेकिन जिन युवाओं ने ये चोटें सही हैं, वे इस उत्पीड़न को जीवन भर नहीं भूलेंगे। टिकैत ने भविष्यवाणी की कि इसी कड़े संघर्ष की भट्टी से कल के बड़े नेता और अच्छे अधिकारी निकलकर सामने आएंगे। उनका मानना है कि लाठी खाने वाले ये छात्र अपने-अपने गांव जाकर इस आंदोलन की चिंगारी को और तेज करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि छात्रों के हक में जिला स्तर पर पहले ही प्रदर्शन शुरू किए जा चुके हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग दिल्ली के इस प्रदर्शन में एक नया क्षेत्रीय दबाव जोड़ते हुए, मनोज जरांगे पाटिल भी बुधवार को महाराष्ट्र के जालना से सीधा जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर पूरा जोर दिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग का पुरजोर समर्थन किया। मनोज जरांगे ने मौके पर मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपना सौ फीसदी समर्थन देते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना हर एक नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए लाठीचार्ज को पूरी तरह से अमानवीय कृत्य बताया। मनोज जरांगे ने जंतर-मंतर से कहा, इतनी क्रूर सरकार हम पहली बार देख रहे हैं, आखिर आम जनता कब तक ये सब सहती रहेगी। मराठा नेता ने प्रशासन से सीधी अपील करते हुए कहा कि छात्रों को बिना किसी डर या पुलिसिया कार्रवाई के लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन करने दिया जाए। उन्होंने सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अगर युवाओं की आवाज को इसी तरह कुचलने की कोशिश की गई, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे। जरांगे के मुताबिक, अगर प्रशासन ने हालात को सही ढंग से नहीं संभाला, तो दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को भी इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ेगा। इन दिग्गज नेताओं के जंतर-मंतर पहुंचने से यह स्पष्ट हो गया है कि नीट का मुद्दा अब केवल शिक्षा विभाग की परेशानी नहीं है, बल्कि यह सरकार के खिलाफ एक बड़े मोर्चे का रूप लेता जा रहा है। इसका आप पर असर • भारत में: यह आंदोलन अब केवल छात्रों का नहीं रहा, बल्कि किसानों और अन्य संगठनों के जुड़ने से आने वाले दिनों में देश भर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और ट्रैफिक/व्यवस्था संबंधी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। • दिल्ली में: जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों के आवागमन और रास्तों पर सीधा असर पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों हो रहा है? कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और छात्र नीट परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 2. 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था? 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद यह आंदोलन और भी ज्यादा उग्र हो गया। 3. राकेश टिकैत ने छात्रों को क्या सलाह दी? राकेश टिकैत ने युवाओं को भूख हड़ताल न करने की सलाह दी और इसके बजाय शांतिपूर्ण ढंग से भंडारे और लंगर चलाने को कहा। 4. मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग क्या है? मनोज जरांगे पाटिल ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। https://trendkia.com/maharashtra/neet-andolana-men-rakesh-tikait-aura-manoj-jarange-ki-entri-jantar-mantar-se-sarakara-ko-di-bare-anjama-bhugatane-ki-chetavani-10098 TrendKia — Har trend, sabse pehle.