प्रतिबंधित थाई मांगुर पर महाराष्ट्र प्रशासन का प्रहार, नागपुर में 164 टन जहरीली मछली नष्ट महाराष्ट्र के नागपुर में मत्स्य पालन विभाग ने अवैध थाई मांगुर पालन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाते हुए 164 टन प्रतिबंधित मछली जब्त कर गड्ढों में दफना दी है। महाराष्ट्र के नागपुर जिले में अवैध मत्स्य पालन के कारोबार पर शिकंजा कसते हुए मत्स्य पालन विभाग ने एक बहुत बड़े अभियान को अंजाम दिया है। लंबे समय से चल रही इस कार्रवाई के तहत प्रशासन ने 164 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली को जब्त कर पूरी सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नष्ट कर दिया है। पर्यावरण संतुलन और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाने वाली इस आक्रामक मछली प्रजाति के खिलाफ विभाग पिछले कई हफ्तों से रणनीति बना रहा था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान 75 टन मछली को केवल दो दिनों के भीतर ही नष्ट कर दिया गया, जिससे अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। गूगल मैप्स और डमी कस्टमर से कसा गया शिकंजा नागपुर के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से थाई मांगुर का पालन किए जाने की गुप्त सूचनाएं विभाग को लगातार मिल रही थीं। इस अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक और ठोस रणनीतियों का सहारा लिया। दुर्गम और छिपे हुए स्थानों पर बने अवैध तालाबों की सटीक लोकेशन पता करने के लिए गूगल मैप्स की सहायता ली गई। मैपिंग के बाद मामले की पुष्टि करने और खरीद-बिक्री के सबूत जुटाने के लिए फर्जी ग्राहक यानी डमी कस्टमर बनाकर भेजे गए। जब अवैध बिक्री और स्टोरेज के पक्के सबूत मिल गए, तब संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की गई। तालाबों से मछलियों को बाहर निकालने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने 25 स्थानीय मछुआरों की विशेष टीम तैयार की। मछुआरों की मदद से इलाके के 27 से 30 तालाबों में जाल बिछाकर थाई मांगुर मछलियों को बाहर निकाला गया। इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने में प्रशासन को लगभग तीन महीने का समय लगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में प्रतिबंधित मछलियों के खिलाफ इस तरह के अभियान पहले भी चलाए जाते रहे हैं और आगे भी जारी रहेंगे। वैज्ञानिक तरीके से किया गया मछलियों का निस्तारण क्योंकि यह मछली इंसानी सेहत और भूजल दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है, इसलिए इसके निस्तारण में विशेष सावधानी बरती गई। मछलियों को खुले में छोड़ने के बजाय डिकंपोज करने की वैज्ञानिक विधि अपनाई गई। इसके लिए 6 से 8 फीट गहरे बड़े गड्ढे खोदे गए। जब्त की गई मछलियों को इन गड्ढों में डालने के बाद उनके ऊपर भारी मात्रा में नमक और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया, ताकि संक्रमण या दुर्गंध न फैले। इसके बाद गड्ढों को पूरी तरह मिट्टी से ढककर मछलियों को दफना दिया गया। पर्यावरण और इंसानी सेहत के लिए क्यों है यह गंभीर खतरा? थाई मांगुर मछली पारिस्थितिकी तंत्र और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत घातक मानी जाती है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और भारत सरकार ने इसके पालन, खरीद और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। मूल रूप से 1960 के दशक में थाईलैंड और बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंची यह प्रजाति स्वभाव से बेहद आक्रामक और मांसाहारी होती है। यह स्थानीय नदियों और तालाबों में मौजूद देसी मछलियों तथा अन्य जलीय जीवों को खाकर खत्म कर देती है, जिससे प्राकृतिक जलस्रोतों का जैव-विविधता संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अलावा, अवैध कारोबारी इन मछलियों को तेजी से बड़ा करने के लिए सड़ा हुआ मांस, कारखानों का कचरा और मृत पशुओं के अवशेष भोजन के रूप में देते हैं। गंदे पानी और घातक अवशेषों का सेवन करने के कारण इस मछली के शरीर में लेड, कैडमियम और आर्सेनिक जैसी विषैली भारी धातुएं अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दूषित मछली का सेवन करने से इंसानों में कैंसर, दिल की बीमारियां और कई अन्य गंभीर शारीरिक विकार पैदा होने का बड़ा खतरा रहता है। इसका आप पर असर पाठकों के लिए इसका क्या मतलब है: • भारत में: बाजार से मछली खरीदते समय सतर्क रहें क्योंकि थाई मांगुर जैसी प्रतिबंधित प्रजातियां सेहत के लिए कैंसर और दिल की बीमारियों जैसी जानलेवा समस्याएं पैदा कर सकती हैं। • नागपुर और महाराष्ट्र में: स्थानीय जलाशयों से अवैध मांगुर की सफाई से देसी मछलियों का संरक्षण होगा और लोगों को जहरीली मछली के सेवन से सुरक्षा मिलेगी। सवाल-जवाब 1. थाई मांगुर मछली पर क्यों बैन लगाया गया है? एनजीटी और भारत सरकार ने इसे बैन किया है क्योंकि यह आक्रामक मांसाहारी मछली देसी प्रजातियों को खत्म करती है और इसमें कैंसर का कारण बनने वाली भारी धातुएं जमा होती हैं। 2. नागपुर में कुल कितनी थाई मांगुर मछली जब्त की गई? मत्स्य पालन विभाग ने तीन महीने की कार्रवाई के दौरान कुल 164 टन थाई मांगुर मछली जब्त की, जिसमें से 75 टन मछली सिर्फ दो दिनों में नष्ट की गई। 3. अवैध मांगुर मछलियों को नष्ट करने के लिए क्या तरीका अपनाया गया? मछलियों को 6 से 8 फीट गहरे गड्ढों में डालकर उन पर नमक और ब्लीचिंग पाउडर छिड़का गया और फिर मिट्टी डालकर पूरी सावधानी से दफनाया गया। 4. प्रशासन को इन अवैध तालाबों का पता कैसे चला? फिशरीज डिपार्टमेंट ने गूगल मैप्स के जरिए दूर-दराज के क्षेत्रों में अवैध तालाबों की सटीक लोकेशन ट्रेस की और डमी कस्टमर भेजकर इस कारोबार की पुष्टि की। 5. थाई मांगुर मछली इंसानी शरीर के लिए क्यों हानिकारक है? इन्हें सड़ा मांस और कचरा खिलाया जाता है, जिससे इनके शरीर में लेड, कैडमियम और आर्सेनिक जैसी खतरनाक भारी धातुएं जमा हो जाती हैं, जो कैंसर और दिल की बीमारियां पैदा कर सकती हैं। 6. थाई मांगुर भारत में कब और कहां से आई थी? यह प्रजाति 1960 के दशक में थाईलैंड और बांग्लादेश के जरिए भारत में आई थी। https://trendkia.com/maharashtra/pratibndhita-thai-mangur-para-maharashtra-prashasana-ka-prahara-nagpur-men-164-tana-jaharili-machhali-nashta-22038 TrendKia — Har trend, sabse pehle.