# राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने वाले विपक्षी दल में शामिल नहीं होगी उद्धव ठाकरे की शिवसेना

> चुनाव सुधार और एसआईआर आंदोलन के तहत विपक्षी गठबंधन के नेता आज राष्ट्रपति से मिलेंगे, लेकिन अंतिम समय में मिले आमंत्रण के चलते उद्धव ठाकरे की पार्टी ने दूरी बना ली है।

**Type:** article · **Category:** महाराष्ट्र · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/maharashtra/president-murmu-se-milane-vale-vipakshi-dala-men-shamila-nahin-hogi-uddhav-thackeray-ki-shiv-sena-45428 · **Language:** Hindi
**Tags:** इंडिया गठबंधन, शिवसेना यूबीटी, उद्धव ठाकरे, राहुल गांधी, द्रौपदी मुर्मू, आशीष शेलार, ज्ञानेश कुमार

चुनावी व्यवस्था और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे विपक्ष के साझा अभियान के बीच अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी विगत तीन दिनों से दिल्ली की सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार की रात विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करने तय समय पर पहुंचेगा, मगर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने इस साझा बैठक से पूरी तरह अलग रहने का निर्णय लिया है।

## देर से आमंत्रण मिलने और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला
शिवसेना (यूबीटी) के इस कदम के पीछे अचानक मिला निमंत्रण मुख्य वजह बताया जा रहा है। पार्टी के अनुसार उन्हें बेहद अंतिम समय में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी दी गई, जिससे राजधानी पहुंचना व्यावहारिक नहीं रहा। इसके अलावा उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई में अपने सांसदों और क्षेत्रीय प्रभारियों के साथ पहले से तय संगठनात्मक बैठक कर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ नेता संजय राउत भी दो दिवसीय यात्रा के तहत पुणे में मौजूद हैं, जिसके कारण पार्टी का कोई भी सांसद दिल्ली की इस संयुक्त बैठक का हिस्सा नहीं बन सका।

## विपक्ष की एकजुटता पर सत्ता पक्ष के तीखे सवाल
उद्धव गुट के इस फैसले पर सत्तारूढ़ दल ने तीखा हमला बोला है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता आशीष शेलार ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शेलार के मुताबिक, असंतुष्ट और पराजित राजनेता केवल प्रधानमंत्री और सरकार के विरोध के नाम पर एकजुट होने का दिखावा कर रहे हैं, जिसमें उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी।

## गठबंधन के आंतरिक तालमेल पर सियासी बहस
आशीष शेलार ने विपक्षी दलों के पुराने अंतर्विरोधों की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि जब ममता बनर्जी अपनी बात रखती हैं तो कांग्रेस के लोग हंसी उड़ाते हैं, वहीं समाजवादी पार्टी कांग्रेस को उसकी राजनीतिक हैसियत याद दिलाने की बात करती है। अब महत्वपूर्ण मौके पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी दूरी बनाकर गठबंधन के आपसी तालमेल की कलई खोल दी है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एसआईआर के खिलाफ लड़ाई में विपक्षी एकता बिखरने लगी है या फिर यह केवल नेताओं की पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का नतीजा है।

## दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रखेगा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
तय कार्यक्रम के अनुसार विपक्षी गठबंधन के दस प्रमुख नेता रात आठ बजे राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति सचिवालय ने शुक्रवार सुबह ही इस भेंट के समय की पुष्टि की थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की औपचारिक मांग करना है। राष्ट्रपति से मिलने जा रहे इस दस सदस्यीय दल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं।

## इसका आप पर असर
इस सियासी घटनाक्रम से चुनावी राजनीति और विपक्षी एकजुटता पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** विपक्षी दलों के साझा अभियान में समन्वय की कमी उजागर होने से चुनावी सुधारों पर सरकार के खिलाफ बन रहा दबाव कमजोर हो सकता है। संसद और सार्वजनिक मंचों पर सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे और संयुक्त आंदोलनों की रणनीति पर इसका असर पड़ेगा।
- **महाराष्ट्र में:** महाविकास अघाड़ी के भीतर कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच बढ़ता अविश्वास राज्य की राजनीति में नई खींचतान पैदा कर सकता है। आगामी चुनावी रणनीतियों और कार्यकर्ताओं के जमीनी तालमेल को लेकर दोनों दलों के समर्थकों में असमंजस बढ़ेगा।
- **मतदाताओं के लिए:** चुनावी विश्वसनीयता और सीईसी के मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता का कमजोर होना आम जनता के सामने विकल्प की स्पष्टता को प्रभावित करता है। नागरिक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या गठबंधन वाकई एक साझा एजेंडे पर अडिग रह पाता है।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** चुनाव आयोग पर विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे इस्तीफे के दबाव में दरार दिखने से प्रशासनिक फैसलों पर तात्कालिक असर सीमित रह सकता है। आयोग के कामकाज और कार्यप्रणाली पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रक्रिया अपने तय नियमों से ही आगे बढ़ेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव अंतिम समय में मिले निमंत्रण और स्थानीय सांगठनिक प्राथमिकताओं के टकराव के कारण उत्पन्न हुआ।

- **तात्कालिक कारण:** शिवसेना (यूबीटी) को राष्ट्रपति से मुलाकात के कार्यक्रम की सूचना बहुत देर से दी गई, जिसके चलते सांसदों का दिल्ली पहुंचना संभव नहीं हो सका। अचानक लिए गए निर्णयों में क्षेत्रीय दलों को शामिल न करने की कार्यशैली से उद्धव गुट नाराज हुआ।
- **स्थानीय व्यस्तताएं:** उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई में पार्टी के सांसदों और पदाधिकारियों के साथ पूर्व नियोजित समीक्षा बैठक कर रहे थे। वहीं संजय राउत दो दिवसीय यात्रा पर पुणे में थे, जिससे दिल्ली के लिए कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था।
- **गठबंधन में पुराना अविश्वास:** कांग्रेस और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच निर्णय प्रक्रिया को लेकर पहले भी खींचतान देखी जाती रही है। ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के संदर्भ में उठे बयानों ने भी सहयोगियों के बीच आपसी संवाद की कमी को उजागर किया है।
- **आगे की दिशा:** अभी इस बात की औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह केवल समय की कमी थी या राजनीतिक दूरी की शुरुआत। आने वाले दिनों में गठबंधन समन्वय समिति की बैठकों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह गतिरोध कितना गहरा है।

## सवाल-जवाब

### 1. शिवसेना (यूबीटी) राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में क्यों शामिल नहीं हुई?
पार्टी का कहना है कि उन्हें अंतिम समय में निमंत्रण मिला और उनके शीर्ष नेता मुंबई तथा पुणे में पूर्व निर्धारित बैठकों में व्यस्त थे।

### 2. विपक्षी प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कब मिलेगा?
यह दस सदस्यीय विपक्षी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात 8 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करेगा।

### 3. विपक्षी दल राष्ट्रपति से मिलकर क्या मांग रखने जा रहे हैं?
विपक्षी नेता चुनाव प्रक्रिया और एसआईआर के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे।

### 4. इस दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हैं?
इस दल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं।

### 5. बीजेपी नेता आशीष शेलार ने इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आशीष शेलार ने कहा कि महाविकास अघाड़ी और विपक्षी गठबंधन में सब ठीक नहीं है तथा यह असफल नेताओं का समूह है।

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