सूखे से बेहाल महाराष्ट्र में किसानों का दर्द देख भावुक हुए देवेंद्र फडणवीस, खेत में रोते अन्नदाता को गले लगाकर दिया मदद का भरोसा महाराष्ट्र के 18 जिलों में सूखे से फसलें तबाह हो चुकी हैं। लातूर में निरीक्षण के दौरान जब एक किसान रो पड़ा, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उसे गले लगाकर ढांढस बंधाया। महाराष्ट्र के 18 जिले इस समय भयंकर सूखे के संकट से जूझ रहे हैं, जहां सामान्य की तुलना में 20 प्रतिशत तक कम बरसात दर्ज की गई है। अमरावती, सोलापुर, अहिल्यानगर, अकोला, बुलढाणा और लातूर जैसे जिलों की स्थिति और भी गंभीर है, जहां वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 50% नीचे चला गया है। मराठवाड़ा, विदर्भ और नॉर्थ महाराष्ट्र के ग्रामीण अंचलों में पानी की भारी किल्लत पैदा हो चुकी है। खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं, सिंचाई के साधन ठप हैं और मवेशियों के लिए चारे का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लातूर के खेतों में हालात देखने पहुंचे मुख्यमंत्री संकट की इस घड़ी में महाराष्ट्र प्रशासन ने अगस्त के आखिरी सप्ताह से ही फसल नुकसान का व्यापक सर्वे शुरू कर रखा है ताकि पीड़ितों तक सहायता पहुंचाई जा सके। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं जमीनी हकीकत परखने मैदान में उतरे। उन्होंने लातूर के कई गांवों का सघन दौरा किया। वहां उन्होंने सोयाबीन की खराब हो चुकी फसलों का मुआयना किया और सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। किसान की आंखों से छलके आंसू, सरकार ने बढ़ाया हाथ जाउ गांव में निरीक्षण के दौरान एक भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया। जब देवेंद्र फडणवीस सोयाबीन के खेत में एक काश्तकार से बातचीत कर रहे थे और नुकसान का ब्योरा मांग रहे थे, तभी अपनी बर्बाद मेहनत देखकर वह किसान खुद को रोक नहीं सका। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह फफक कर रो पड़ा। यह देखकर मुख्यमंत्री ने तुरंत आगे बढ़कर किसान को गले लगा लिया। उन्होंने किसान को सांत्वना देते हुए कहा कि चिंता मत करो, सरकार किसानों की हर संभव मदद करेगी। इसी घटना को उन्होंने X पर साझा भी किया। बुलढाणा में मक्का बर्बाद, केंद्र से सहायता की तैयारी संकट से निपटने के लिए राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी सक्रिय हैं। इसी कड़ी में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बुलढाणा का दौरा कर जमीनी स्थिति की समीक्षा की। बुलढाणा में भी बेहद कम बारिश के चलते मक्के की पूरी खेती चौपट हो चुकी है। शिंदे ने स्पष्ट किया कि कई क्षेत्रों में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जिसके चलते महाराष्ट्र सरकार अब केंद्र सरकार से भी विशेष आर्थिक और राहत सहायता की मांग करेगी ताकि संकटग्रस्त किसानों को जल्द राहत दी जा सके। विधानसभा के विशेष सत्र की उठी मांग दूसरी तरफ, विपक्ष सरकार के मौजूदा कदमों को नाकाफी बता रहा है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टिवार ने चेतावनी दी है कि मौजूदा समय में मौसम थोड़ा संभला हुआ दिख सकता है, लेकिन जैसे जैसे गर्मी बढ़ेगी, जल संकट और सूखा बेहद विकराल रूप धारण कर लेगा। उन्होंने मांग रखी कि प्रशासन को तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए, जिसमें सभी दलों और जनप्रतिनिधियों की राय लेकर सूखे से पार पाने के लिए एक ठोस व दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए। इसका आप पर असर महाराष्ट्र में सूखे और फसल खराबे से लाखों ग्रामीण परिवारों और उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: सोयाबीन और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट से देश भर में कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे खाद्य तेलों, पशु आहार और संबंधित अनाजों के बाजार भाव पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। • महाराष्ट्र में: 18 सूखाग्रस्त जिलों के किसानों को तुरंत मुआवजा सर्वे और राहत पैकेज की सख्त दरकार होगी। पेयजल की कमी और चारे के संकट को देखते हुए ग्रामीण आबादी को आने वाले महीनों में जल वितरण और चारा शिविरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। • फसल राहत सहायता: राज्य सरकार द्वारा अगस्त के अंतिम सप्ताह से शुरू किए गए सर्वे के आधार पर नुकसान की भरपाई की योजना बन रही है। किसानों को अपने स्थानीय राजस्व कार्यालय और कृषि अधिकारियों से संपर्क में रहकर आकलन दर्ज कराना होगा। • राजनीतिक और प्रशासनिक कदम: राज्य प्रशासन केंद्र से वित्तीय पैकेज की मांग कर रहा है, जबकि विधानसभा सत्र बुलाने की मांग से नीतिगत फैसलों में तेजी आने की संभावना है। आने वाले दिनों में सूखे से जुड़े सरकारी अनुदान और ऋण राहत की घोषणाएं हो सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ महाराष्ट्र में सूखे की यह नौबत मानसून की विफलता और कई प्रमुख कृषि जिलों में लंबे समय तक बारिश न होने के कारण पैदा हुई है। • मानसूनी बारिश में भारी कमी: राज्य के 18 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। अमरावती, सोलापुर, अहिल्यानगर, अकोला, बुलढाणा और लातूर में यह गिरावट 50% के करीब पहुंच गई, जिससे मिट्टी की नमी खत्म हो गई। • फसल चक्र पर सीधा आघात: बारिश की कमी से सोयाबीन और मक्का जैसी संवेदनशील फसलें सिंचाई के अभाव में पकने से पहले ही सूख गईं। इसके चलते पैदावार पूरी तरह तबाह हो गई और पशुओं के चारे का संकट गहरा गया। • सहायता और नीतिगत प्रतिक्रिया: नुकसान का दायरा मराठवाड़ा, विदर्भ और नॉर्थ महाराष्ट्र तक फैलने के कारण राज्य सरकार ने अगस्त अंत से सर्वे शुरू किया। हालात गंभीर होने पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने स्वयं ग्राउंड पर जाकर नुकसान का जायजा लिया और केंद्र से मदद मांगने का निर्णय किया। सवाल-जवाब 1. महाराष्ट्र के कितने जिले सूखे की चपेट में हैं? महाराष्ट्र के 18 जिले इस समय सूखे की चपेट में हैं, जहां वर्षा सामान्य से 20 प्रतिशत तक कम रही है। 2. किन जिलों में 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है? अमरावती, सोलापुर, अहिल्यानगर, अकोला, बुलढाणा और लातूर में सामान्य से लगभग 50% कम बारिश हुई है। 3. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किस जिले का दौरा किया? मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लातूर जिले के जाउ गांव सहित अन्य क्षेत्रों में जाकर सोयाबीन की फसलों के नुकसान का जायजा लिया। 4. बुलढाणा में कौन सी फसल चौपट हुई है? बुलढाणा में कम बारिश की वजह से मक्के की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, जिसका जायजा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने लिया। 5. विपक्ष की मुख्य मांग क्या है? कांग्रेस नेता विजय वडेट्टिवार ने सरकार से सूखे की स्थिति पर रणनीति बनाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। https://trendkia.com/maharashtra/sukhe-se-behala-maharashtra-men-kisanon-ka-darda-dekha-bhavuka-hue-devendra-fadnavis-kheta-men-rote-annadata-ko-gale-lagakara-diya-37359 TrendKia — Har trend, sabse pehle.