टाइगर बाहर निकलते ही भाग खड़े होंगे विरोधी, उद्धव ठाकरे की खुली चुनौती शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर, वीएचपी की नई मांगों, राष्ट्रीय पुरस्कारों के गुजरात शिफ्ट होने और दिल्ली इमारत हादसे को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर विवाद पर पहली बार सार्वजनिक तौर पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि शेर पर ऑपरेशन करने की हिम्मत रखने वाला कोई अभी पैदा ही नहीं हुआ और जिस दिन टाइगर बाहर निकलेगा, विरोधी खुद ही मैदान छोड़कर भाग खड़े होंगे। इसी बातचीत में उद्धव ठाकरे ने वीएचपी की नई मांगों, राष्ट्रीय पुरस्कारों को गुजरात भेजे जाने, यूबीटी पार्षदों पर हो रही कार्रवाई और दिल्ली में इमारत गिरने की घटना को लेकर भी राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को आड़े हाथों लिया। वीएचपी की नई मांगों पर उद्धव ठाकरे का पलटवार नवरात्रि के गरबा आयोजनों में मुसलमानों की एंट्री रोकने और हिंदुओं से तिलक लगाकर आने की शर्त रखने वाली वीएचपी की मांग पर उद्धव ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी मांगें रखने वाले लोग असल में गोमूत्रधारी हिंदू हैं जो पहले कभी नजर नहीं आए, लेकिन अब नई-नई शर्तें थोपने में जुटे हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि इन लोगों के सामने आने से बहुत पहले से समाज त्योहार मनाता रहा है और आगे भी मनाता रहेगा। उनके मुताबिक, यही तरह-तरह की पाबंदियां लगाना इन लोगों का असली हिंदुत्व है, और वे इसी को हिंदुत्व मानने की गलती कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में दंगा भड़काने की आशंका उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि सरकार त्योहारों के मौके पर माहौल बिगाड़ने की साजिश रच सकती है। उन्होंने दावा किया कि गणपति उत्सव से पहले ही दो हादसे हो चुके हैं। उनका कहना था कि मुंबई जैसे बड़े शहर में बाहर से कोई व्यक्ति आकर गड़बड़ी करके निकल जाता है और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती। उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठा पाई। राष्ट्रीय पुरस्कार गुजरात शिफ्ट करने पर सवाल राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह को दिल्ली से हटाकर गुजरात में आयोजित किए जाने के फैसले पर भी उद्धव ठाकरे ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने पूछा कि क्या मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहर देश का हिस्सा नहीं हैं। उनका आरोप था कि गुजरात और बाकी देश के बीच जानबूझकर एक दीवार खड़ी की जा रही है और इस पूरे फैसले के पीछे शुद्ध राजनीति काम कर रही है। यूबीटी पार्षदों पर कार्रवाई और भेदभाव का आरोप उद्धव ठाकरे ने शिवसेना यूबीटी के पार्षदों को लेकर भी बड़ा आरोप लगाया। उनके मुताबिक, जाति प्रमाणपत्र का हवाला देकर यूबीटी पार्षदों के पद लगातार रद्द किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिंदे गुट के खिलाफ 16 लोगों ने याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं और उन याचिकाओं पर तेजी से सुनवाई और फैसले भी हो रहे हैं। इसके उलट, यूबीटी शिवसेना की तरफ से शिंदे गुट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं आ रहा। उद्धव ठाकरे ने इसे साफ भेदभाव बताते हुए सवाल किया कि आखिर यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। दिल्ली इमारत हादसे पर सरकार को घेरा दिल्ली में इमारत गिरने से हुई मौतों को लेकर उद्धव ठाकरे ने सीधे सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार तो पहले से चला ही आ रहा है, लेकिन अब जब वहां सरकार खुद बीजेपी की है, तो ऐसे हादसे रुकने चाहिए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जर्जर इमारतों का कोई इंस्पेक्शन कराया गया था, क्या ऐसी खतरनाक इमारतों की कोई अलग लिस्ट तैयार की गई थी और क्या समय रहते कोई एहतियाती कदम उठाए गए थे। उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए, वरना ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जाती रहेंगी। पहले भी लगा था बड़ा झटका गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे इससे पहले भी सुर्खियों में रहे थे, जब उन्हें एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा था। उस वक्त बागी सांसदों को शिंदे गुट में शामिल होने की मान्यता मिल गई थी, जिसने शिवसेना यूबीटी के भीतर हलचल मचा दी थी। इसका आप पर असर उद्धव ठाकरे के इन बयानों का असर त्योहारी सीजन की सुरक्षा और सरकारी कार्रवाई पर उठ रहे सवालों से सीधे जुड़ा है। • भारत में: दिल्ली में इमारत गिरने से हुई मौतों पर उठे सवाल जर्जर इमारतों के इंस्पेक्शन को लेकर देशभर में बहस तेज कर सकते हैं। अगर प्रशासन दबाव में आकर पुरानी और खतरनाक इमारतों की लिस्ट बनाकर सर्वे शुरू करता है, तो आम नागरिकों को समय रहते खतरे की जानकारी मिल सकेगी। • मुंबई-महाराष्ट्र में: त्योहारों के दौरान दंगे भड़काने की आशंका जताए जाने के बाद मुंबई पुलिस और प्रशासन की चौकसी बढ़ सकती है। गणपति और आने वाले त्योहारों में स्थानीय लोगों को बाहरी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग करने का आधार मिलता है। • राजनीतिक असर: यूबीटी पार्षदों के जाति प्रमाणपत्र मामलों पर भेदभाव के आरोप से जुड़ी अदालती प्रक्रिया पर नजर रखने वाले नागरिकों को अपने मामलों की सुनवाई में देरी पर सवाल उठाने का आधार मिलता है। • राष्ट्रीय पुरस्कार: पुरस्कार समारोह की जगह को लेकर उठे विवाद से आगे स्पष्टीकरण या बदलाव आ सकता है, जिस पर कलाकार और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग नजर रखेंगे। ऐसा क्यों हुआ उद्धव ठाकरे के ये तीखे बयान शिवसेना के विभाजन के बाद बने राजनीतिक माहौल से जुड़े हैं, जिसमें शिवसेना यूबीटी और शिंदे गुट के बीच लगातार खींचतान बनी हुई है। • पार्टी विभाजन का असर: शिवसेना यूबीटी के कई पार्षदों के खिलाफ जाति प्रमाणपत्र को आधार बनाकर कार्रवाई हो रही है, जबकि शिंदे गुट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर फैसले तेजी से आ रहे हैं। यही असमानता उद्धव ठाकरे के भेदभाव के आरोप की वजह बनी है। • त्योहारी सीजन में तनाव: नवरात्रि से पहले वीएचपी की नई मांगों और गणपति से पहले हुए दो हादसों ने माहौल को संवेदनशील बना दिया, जिसके चलते उद्धव ठाकरे ने सरकार पर दंगा भड़काने की साजिश का शक जताया। हालांकि इन हादसों के पीछे की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। • प्रशासनिक फैसला: राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह को दिल्ली से गुजरात शिफ्ट करने का फैसला सरकार का प्रशासनिक निर्णय है, जिसे उद्धव ठाकरे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। • भवन सुरक्षा में खामी: दिल्ली में इमारत गिरने की घटना के पीछे जर्जर ढांचे का समय पर निरीक्षण न होना एक बड़ी वजह मानी जा रही है, हालांकि हादसे का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। सवाल-जवाब 1. उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर पर क्या कहा? उन्होंने कहा कि शेर का ऑपरेशन करने वाला अभी कोई पैदा नहीं हुआ और टाइगर बाहर निकलते ही विरोधी भाग खड़े होंगे। 2. उद्धव ठाकरे ने वीएचपी की किस मांग पर सवाल उठाया? नवरात्रि गरबा में मुसलमानों की एंट्री पर पाबंदी और हिंदुओं से तिलक लगाकर आने की मांग पर उन्होंने वीएचपी को निशाना बनाया। 3. उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय पुरस्कारों को लेकर क्या आरोप लगाया? उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय पुरस्कार दिल्ली से गुजरात शिफ्ट करके गुजरात और बाकी देश के बीच दीवार खड़ी की जा रही है। 4. यूबीटी पार्षदों को लेकर उद्धव ठाकरे ने क्या दावा किया? उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र के नाम पर यूबीटी पार्षदों के पद रद्द किए जा रहे हैं जबकि शिंदे गुट के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला नहीं हो रहा। 5. दिल्ली इमारत हादसे पर उद्धव ठाकरे ने क्या कहा? उन्होंने पूछा कि जर्जर इमारतों का इंस्पेक्शन और लिस्ट क्यों नहीं बनाई गई और इस मामले में कार्रवाई की मांग की। 6. उद्धव ठाकरे से पहले क्या राजनीतिक झटका लगा था? इससे पहले बागी सांसदों को शिंदे गुट में जाने की मान्यता मिलने से उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा था। https://trendkia.com/maharashtra/taigara-bahara-nikalate-hi-bhaga-khare-honge-virodhi-uddhav-thackeray-ki-khuli-chunauti-29503 TrendKia — Har trend, sabse pehle.