मणिपुर में शांति की ओर बड़ा कदम, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे केसीपी-ताइबंगानबा के 46 उग्रवादी मणिपुर की राजधानी इम्फाल में आयोजित एक घर वापसी समारोह के दौरान प्रतिबंधित केसीपी-ताइबंगानबा समूह के 46 सदस्यों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में एक अहम और सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है, जहां प्रतिबंधित केसीपी-ताइबंगानबा समूह के 46 सदस्यों ने अपने हथियार त्यागकर मुख्यधारा में वापसी कर ली है। इम्फाल स्थित प्रथम मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में एक विशेष घर वापसी समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें चार महिलाओं सहित इन सभी काडर ने आत्मसमर्पण किया। यह पूरा घटनाक्रम राज्य के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह द्वारा अवैध हथियारों को जमा करने के लिए दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम के ठीक कुछ दिनों बाद सामने आया है, जिसका उद्देश्य शांति प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करना था। समारोह और हथियारों का जखीरा प्रथम बटालियन मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में गृह विभाग की तरफ से सभी व्यवस्थाएं की गईं। इस दौरान आत्मसमर्पण करने वाले काडरों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद प्रशासन को सौंपे। पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने कुल 20 हथियार, 216 राउंड कारतूस और 3 विस्फोटक जमा किए गए। इस जखीरे में इंसास राइफल्स, एक एम22 राइफल, आरपीजी, 40 एमएम लॉन्चर, एसएलआर, रिवॉल्वर और विभिन्न 9 एमएम तथा.32 कैलिबर की पिस्तौलें शामिल थीं। इसके अलावा 51 एमएम मोर्टार राउंड, विभिन्न कैलिबर का अन्य गोला-बारूद, हैंड ग्रेनेड, डेटोनेटर और चार्जर के साथ बाओफेंग कम्यूनिकेशन सेट भी बरामद किए गए। मुख्यमंत्री का बयान और मुख्यधारा में स्वागत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि 3 मई 2023 को मणिपुर में भड़की हिंसा ने संभवतः कई युवाओं को हथियार उठाने और उग्रवादी संगठनों में शामिल होने के लिए मजबूर किया होगा। हिंसा और सशस्त्र संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रास्ते ने कभी राज्य में शांति लाने का काम नहीं किया है। उन्होंने सभी आत्मसमर्पण करने वाले सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः जोड़ने के लिए हरसंभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि, “शांति तभी कायम होगी जब लोग हथियार छोड़ देंगे।„ उन्होंने यह भी घोषणा की कि इन सभी काडरों का पुनर्वास संशोधित आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति, 2018 के तहत किया जाएगा। इस नीति के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति को 36 महीनों तक प्रति माह 6,000 रुपये तक का वजीद दिया जाएगा, साथ ही 4 लाख रुपये का सावधि जमा अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार उनके लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करेगी ताकि वे एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका कमा सकें। समझौता और शासन-प्रशासन की प्रतिक्रिया कार्यक्रम के दौरान इस आत्मसमर्पण को औपचारिक रूप देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस पर उग्रवादी समूह की ओर से केसीपी-ताइबंगानबा के चेयरमैन हाओबिजम दिलीप उर्फ ताइबबंगानबा ने हस्ताक्षर किए, जबकि राज्य सरकार की तरफ से गृह विभाग के संयुक्त सचिव एम वेटो सिंह ने दस्तखत किए। इस महत्वपूर्ण आयोजन में उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो, कला एवं संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री खुराइजाम लोकें सिंह, कई विधायक, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह और नागरिक प्रशासन के साथ-साथ मणिपुर पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने कहा कि इन सदस्यों द्वारा सशस्त्र गतिविधियों को छोड़ना उनके परिवारों, समुदायों और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनकी भूमिकाओं में वापसी का प्रतीक है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करती रहेगी और उन सभी लोगों का साथ देगी जो स्वेच्छा से हिंसा का त्याग कर कानूनी आत्मसमर्पण, सत्यापन और पुनर्वास प्रक्रिया के जरिए सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं। डीजीपी ने काडरों से अपने इस फैसले पर दृढ़ रहने की अपील करते हुए कहा कि इस घर वापसी की सफलता इस समारोह से ज्यादा उनके भविष्य के आचरण पर निर्भर करेगी। एनआरसी की मांग और लोकतांत्रिक विरोध पर जोर समारोह के दौरान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की मांग का समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने विरोध के तरीकों के रूप में बंद या हड़ताल के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने विभिन्न समूहों और व्यक्तियों से अपील की कि वे विरोध के लोकतांत्रिक तरीकों को अपनाएं, क्योंकि बार-बार होने वाले शटडाउन से छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ठीक लगभग एक महीने बाद आया है, जब इम्फाल के मंत्रीपुखरी गैरिसन में केसीपी-पीडब्ल्यूजी के 46 काडरों के लिए भी ऐसा ही एक घर वापसी समारोह आयोजित किया गया था। इस प्रकार की एक के बाद एक हो रही घटनाएं राज्य में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही हैं। इसका आप पर असर भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की ऐसी घटनाएं देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करती हैं और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मणिपुर में: स्थानीय निवासियों और युवाओं के लिए यह स्थिति अधिक सुरक्षित माहौल और सामान्य जनजीवन की बहाली की उम्मीद जगाती है, जिससे आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में सुधार होता है। सवाल-जवाब 1. कितने उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है? केसीपी-ताइबंगानबा समूह के 46 सदस्यों ने, जिनमें चार महिलाएं भी शामिल हैं, अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। 2. यह आत्मसमर्पण समारोह कहाँ आयोजित किया गया था? यह समारोह इम्फाल स्थित प्रथम मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया था। 3. आत्मसमर्पण करने वाले काडरों को क्या वित्तीय सहायता मिलेगी? संशोधित आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति 2018 के तहत प्रत्येक काडर को 36 महीनों तक 6,000 रुपये मासिक वजीफा और 4 लाख रुपये का सावधि जमा अनुदान मिलेगा। 4. इस समारोह में कौन-कौन से प्रमुख हथियार सौंपे गए? काडरों ने इंसास राइफल्स, एम22 राइफल, आरपीजी, एसएलआर, पिस्तौल, मोर्टार राउंड और हैंड ग्रेनेड सहित कई हथियार और विस्फोटक सौंपे। https://trendkia.com/manipur/46-kcp-taibanganba-cadres-lay-down-arms-and-join-mainstream-in-manipur-peace-push-17928 TrendKia — Har trend, sabse pehle.