एशियाई खेलों में ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर मणिपुर लौटीं मीराबाई चानू, इंफाल हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत जापान के आइची-नागोया में हुए 2026 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू जब इंफाल पहुंचीं, तो ढोल और पारंपरिक पेना की धुनों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया गया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर देश को रजत पदक दिलाने वाली ओलंपिक और विश्व चैंपियन भारोत्तोलक सैखोम मीराबाई चानू गुरुवार को मणिपुर वापस लौट आईं। इंफाल हवाई अड्डे पर कदम रखते ही उनके प्रशंसकों, परिजनों और खेल प्रेमियों ने उनका जोरदार और ऐतिहासिक स्वागत किया। प्रशंसकों का उत्साह देखते ही बन रहा था और पूरा माहौल जश्न के रंग में डूबा नजर आया। इंफाल एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब और पारंपरिक धुनें हवाई अड्डे पर मीराबाई चानू की अगवानी के लिए एक बहुत बड़ा हुजूम मौजूद था। स्वागत करने वालों में उनके माता-पिता और रिश्तेदारों के अलावा स्थानीय विधायक ख इबोम्चा सिंह, युवा मामले एवं खेल विभाग के अधिकारी, खेल जगत की कई हस्तियां और बड़ी तादाद में समर्थक शामिल रहे। इस विशेष मौके पर पारंपरिक कलाकारों ने ढोल और पेना जैसे वाद्ययंत्र बजाकर पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। स्थानीय संस्कृति की सुंदर छटा के बीच खेल प्रशंसकों ने नारे लगाकर अपनी इस स्टार एथलीट के प्रति गहरा प्यार और सम्मान व्यक्त किया। 28 वर्षों के लंबे सूखे को किया समाप्त मीराबाई चानू की यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में एक मील का पत्थर है। एशियाई खेलों के भारोत्तोलन स्पर्धा में भारत को पूरे 28 साल बाद कोई पदक हासिल हुआ है। इससे पहले वर्ष 1998 के एशियाई खेलों में कर्णम मल्लेश्वरी ने रजत पदक जीता था, जिसके बाद से भारतीय भारोत्तोलक इस मंच पर पोडियम तक नहीं पहुंच सके थे। इस रजत पदक के साथ ही मीराबाई चानू का पहला एशियाई खेल पदक भी पक्का हुआ। अब उनके पास ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल जैसे सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के पदकों का एक दुर्लभ और शानदार संग्रह पूरा हो चुका है। शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर और उपलब्धियां मणिपुर में जन्मी इस दिग्गज वेटलिफ्टर के नाम राष्ट्रमंडल खेलों में कुल चार पदक दर्ज हैं, जिनमें तीन स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों और हालिया एशियाई खेलों में लगातार दो रजत पदक अपने नाम करने के बाद वह पहली बार अपने गृह राज्य मणिपुर के दौरे पर आई हैं। अपने राज्यवासियों के बीच पहुंचकर मीराबाई काफी भावुक और खुश दिखाई दीं। समर्थकों और मां के प्रति जताया गहरा आभार हवाई अड्डे पर लोगों से बातचीत करते हुए चानू ने मणिपुर की जनता का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि उनके खेल सफर के हर मोड़ पर, चाहे सफलता का समय रहा हो या निराशा के दौर, राज्य के लोगों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां तोम्बी सैखोम को अपनी ताकत का मुख्य आधार बताया। चानू ने अपने कोचों, साथी खिलाड़ियों और तमाम प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन सभी के अटूट सहयोग के बिना इस नए मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था। उनकी मां तोम्बी सैखोम ने भी इस सफलता पर बात करते हुए कहा कि एशियाई खेलों का यह पदक पूरे परिवार और मणिपुर के तमाम लोगों के लिए बेहद भावुक और गर्व से भर देने वाला क्षण है। आगे की योजनाएं और लॉस एंजिलिस ओलंपिक का लक्ष्य मीराबाई चानू ने अपने भविष्य के कार्यक्रम को साझा करते हुए बताया कि वह लगभग एक सप्ताह तक मणिपुर में अपने परिवार और करीबियों के साथ समय बिताएंगी। इसके बाद वह आगे की तैयारियों के सिलसिले में दिल्ली रवाना होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जल्द ही 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के क्वालिफिकेशन मुकाबलों को ध्यान में रखते हुए अपना कड़ा अभ्यास सत्र फिर से शुरू करेंगी, ताकि देश के लिए एक बार फिर स्वर्णिम सफलता हासिल की जा सके। इसका आप पर असर मीराबाई चानू की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय भारोत्तोलन के बुनियादी ढांचे और युवा खिलाड़ियों के मनोबल पर सीधा प्रभाव डालेगी। • भारत में: 28 साल बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन पदक आने से राष्ट्रीय खेल संघों और खेल मंत्रालय द्वारा इस खेल के बुनियादी ढांचे और आगामी लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों के लिए अतिरिक्त बजट और कोचिंग सहायता मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। युवा एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोडियम तक पहुंचने के लिए बेहतर प्रोत्साहन और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी। • मणिपुर में: स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य खेल विभाग द्वारा नई प्रोत्साहन योजनाओं और बेहतर खेल अकादमियों की स्थापना को रफ्तार मिल सकती है। इंफाल और आसपास के जिलों में जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण ले रही युवा महिला भारोत्तोलकों को सीधे मार्गदर्शन और प्रेरणा मिलेगी। • खेल प्रेमियों के लिए: प्रशंसकों को अब आगामी ओलंपिक क्वालीफाइंग स्पर्धाओं में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल से और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदकों की उम्मीद बंधी है। आने वाले महीनों में दिल्ली और राष्ट्रीय शिविरों में होने वाली प्रतियोगिताओं की तारीखों और प्रसारण पर दर्शकों की नजरें रहेंगी। • आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी: 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के क्वालीफाइंग मानकों को देखते हुए देश के शीर्ष एथलीटों के प्रशिक्षण कैलेंडर में बदलाव होगा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खेल अकादमियों में नए सत्र के लिए चयन प्रक्रिया और सख्त होगी। ऐसा क्यों हुआ मीराबाई चानू का यह स्वागत और पदक इसलिए संभव हुआ क्योंकि उन्होंने जापान के आइची-नागोया में हुए एशियाई खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत के लगभग तीन दशक लंबे पदक सूखे को समाप्त किया। • सीधा कारण: 2026 एशियाई खेलों के दौरान शानदार भारोत्तोलन करते हुए चानू ने रजत पदक अपने नाम किया और पहली बार एशियाई खेलों के पोडियम पर जगह बनाई। इस जीत के बाद पहली बार अपने गृह राज्य लौटने पर हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत आयोजित किया गया। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत ने 1998 के बाद से एशियाई खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में कोई पदक नहीं जीता था, जब कर्णम मल्लेश्वरी ने रजत पदक हासिल किया था। इस 28 साल पुराने सूखे को समाप्त करने के कारण इस पदक को देश और राज्य के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। • पदक संग्रह की पूर्णता: चानू के पास पहले से ही ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक मौजूद थे, लेकिन एशियाई खेल का पदक उनके संग्रह से गायब था। इस रजत पदक ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के सभी शीर्ष बहु-खेल आयोजनों के पदकों का चक्र पूरा कर दिया। • आगामी योजनाएं: गृह राज्य में एक सप्ताह बिताने के बाद वह दिल्ली लौटेंगी और राष्ट्रीय शिविर में 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के क्वालीफाइंग आयोजनों की तैयारी शुरू करेंगी। सवाल-जवाब 1. मीराबाई चानू ने 2026 एशियाई खेलों में कौन सा पदक जीता? मीराबाई चानू ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई खेलों में भारोत्तोलन स्पर्धा का रजत पदक जीता। 2. एशियाई खेलों में भारत को भारोत्तोलन का पदक कितने साल बाद मिला है? भारत को एशियाई खेलों की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में पूरे 28 साल बाद कोई पदक प्राप्त हुआ है। 3. मीराबाई चानू से पहले एशियाई खेलों में भारोत्तोलन पदक किसने जीता था? चानू से पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने वर्ष 1998 के एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीता था। 4. इंफाल हवाई अड्डे पर मीराबाई चानू का स्वागत किन लोगों ने किया? उनके स्वागत के लिए उनके माता-पिता, रिश्तेदार, स्थानीय विधायक ख इबोम्चा सिंह, खेल विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे थे। 5. राष्ट्रमंडल खेलों में मीराबाई चानू के नाम कुल कितने पदक हैं? मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में कुल चार पदक जीते हैं, जिनमें तीन स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल है। 6. मीराबाई चानू मणिपुर में कितने दिन रुकेंगी और इसके बाद क्या करेंगी? वह लगभग एक सप्ताह मणिपुर में रहेंगी और फिर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी के लिए दिल्ली रवाना होंगी। प्रेरणा और सबक मीराबाई चानू की निरंतरता और लंबे संघर्ष के बाद हासिल की गई यह सफलता हर किसी को विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने का हौसला देती है। • धैर्य और निरंतरता: करियर में कई बार चोटों और असफलताओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 28 साल बाद भारत को इस मंच पर पदक दिलाया। निरंतर मेहनत किसी भी बड़े लक्ष्य को संभव बनाती है। • परिवार और मार्गदर्शकों का सम्मान: अपनी सफलता के शीर्ष पर पहुंचकर भी अपनी मां, कोचों और समर्थकों की भूमिका को खुले दिल से स्वीकार करना विनम्रता और कृतज्ञता की सीख देता है। • पूर्णता की खोज: ओलंपिक और विश्व स्तर पर सफल होने के बाद भी अपने बचे हुए लक्ष्यों, जैसे एशियाई खेलों के पदक को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखना चाहिए। • भविष्य की स्पष्ट योजना: एक बड़ी जीत के जश्न के बीच भी उन्होंने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के नए लक्ष्य तय कर लिए हैं, जो यह सिखाता है कि सफलता के बाद रुकना नहीं बल्कि नए मुकाम की तैयारी में जुटना जरूरी है। https://trendkia.com/manipur/eshiyai-khelon-men-aitihasika-rajata-padaka-jitakara-manipur-lautin-mirabai-chanu-imphal-havai-adde-para-bhavya-svagata-41286 TrendKia — Har trend, sabse pehle.