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  "type": "article",
  "title": "भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने के काम की समीक्षा, असम राइफल्स के आला अफसरों संग मणिपुर के मुख्यमंत्री की अहम बैठक",
  "summary": "मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीमांत सुरक्षा और बाड़ निर्माण कार्य की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की।",
  "content": "मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और भारत-म्यांमार सीमा पर चल रहे बाड़ लगाने के काम की समीक्षा की। मंतरीपुखरी स्थित सचिवालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में असम राइफल्स के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया और सीमावर्ती इलाकों की स्थिति पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।\n\nसचिवालय में सुरक्षा परिदृश्य पर गहरा मंथन\nइस महत्वपूर्ण बैठक में असम राइफल्स साउथ के महानिरीक्षक मेजर जनरल गौरव शर्मा (एससी, एसएम) और 28 सेक्टर असम राइफल्स के उप महानिरीक्षक ब्रिगेडियर प्रणव प्रसून शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस मुलाकात के विवरण साझा किए। उन्होंने X पर लिखा कि असम राइफल्स के अधिकारियों ने उनसे सचिवालय में मुलाकात की और इस दौरान सामान्य सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।\n\n \n\nसीमांत जिलों में सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी\nयह बैठक ऐसे समय में हुई है जब म्यांमार से सटे मणिपुर के सीमावर्ती जिलों में लगातार सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे कामजोंग, चंदेल और तेंगनौपाल जैसे सीमांत इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा बल सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त कर रहे हैं और नए अग्रिम परिचालन ठिकानों की स्थापना के जरिए अपनी जमीनी मौजूदगी को लगातार मजबूत बना रहे हैं।\n\nतस्करी और अनियंत्रित आवाजाही पर नकेल की तैयारी\nपूर्वोत्तर सीमा के इन संवेदनशील हिस्सों में सीमा पार से लोगों की अनधिकृत आवाजाही के साथ हथियारों और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी की गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। सुरक्षा के लिहाज से इन गतिविधियों पर रोक लगाना बेहद जरूरी माना जा रहा है। पिछले महीने मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने विधानसभा को जानकारी दी थी कि भारत-म्यांमार सीमा के कुल 398 किलोमीटर में से लगभग 55 किलोमीटर हिस्से पर फेंसिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है।\n\nसाल 2028 तक पूरी सीमा को घेरने का लक्ष्य\nगृह मंत्री के अनुसार राज्य सरकार का लक्ष्य पूरे 398 किलोमीटर के सीमांत हिस्से पर 2028 तक बाड़ लगाने का काम पूरा करना है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि राज्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से सीमा पर बाड़ लगाना अपरिहार्य हो चुका है, जिसके चलते शेष बचे हिस्सों पर निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है ताकि सीमावर्ती रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nभारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने और निगरानी बढ़ाने से सीमा पार घुसपैठ और तस्करी पर कड़ा अंकुश लगेगा।\n\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय सीमा सील होने से देश के भीतर अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ेगा। इससे पूर्वोत्तर सहित पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।\n• मणिपुर में: कामजोंग, चंदेल और तेंगनौपाल जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा बेहतर होगी। अनधिकृत आवाजाही रुकने से सीमांत इलाकों में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी।\n• समयसीमा का असर: साल 2028 तक पूरी 398 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। निर्धारित समय में काम पूरा होने पर सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और प्रशासनिक नियंत्रण काफी आसान हो जाएगा।\n• सुरक्षा ढांचे में बदलाव: नए अग्रिम परिचालन ठिकानों की स्थापना से सुरक्षा बलों की पहुंच दूरदराज के इलाकों तक बढ़ेगी। स्थानीय आबादी को आपात स्थिति में त्वरित सुरक्षा सहायता मिल सकेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमणिपुर सरकार और असम राइफल्स के बीच यह उच्चस्तरीय वार्ता सीमावर्ती जिलों में लगातार बनी सुरक्षा चिंताओं और तस्करी के बढ़ते खतरों के कारण आयोजित की गई।\n\n• तस्करी और घुसपैठ की समस्या: भारत-म्यांमार सीमा के खुले और दुर्गम हिस्सों का फायदा उठाकर अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही थी। इसके अलावा सीमा पार से अनियंत्रित आवाजाही ने स्थानीय सुरक्षा बलों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी थीं।\n• सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता: कामजोंग, चंदेल और तेंगनौपाल जिलों की सीमाएं सीधे म्यांमार से लगती हैं, जहां निगरानी बनाए रखना कठिन साबित हो रहा था। इन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए नए अग्रिम ठिकाने बनाना और बाड़ लगाना अनिवार्य हो गया।\n• फेंसिंग कार्य की धीमी प्रगति: कुल 398 किलोमीटर लंबी सीमा में से अब तक केवल 55 किलोमीटर हिस्से पर ही बाड़ लगाई जा सकी है। निर्माण कार्य की धीमी गति को देखते हुए शेष हिस्से को 2028 तक पूरा करने के लिए समन्वय बैठक आवश्यक थी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मणिपुर के मुख्यमंत्री ने किन अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा की?\nमुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने असम राइफल्स साउथ के महानिरीक्षक मेजर जनरल गौरव शर्मा और 28 सेक्टर के उप महानिरीक्षक ब्रिगेडियर प्रणव प्रसून के साथ बैठक की।\n\n2. बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था?\nइस बैठक में राज्य की समग्र सुरक्षा स्थिति और भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने के काम की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।\n\n3. मणिपुर के कौन से जिले म्यांमार सीमा से जुड़े हैं?\nमणिपुर के कामजोंग, चंदेल और तेंगनौपाल जिले म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं।\n\n4. भारत-म्यांमार सीमा पर अब तक कितनी फेंसिंग का कार्य पूरा हुआ है?\nकुल 398 किलोमीटर लंबी सीमा में से अब तक लगभग 55 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है।\n\n5. पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का काम कब तक पूरा करने का लक्ष्य है?\nमणिपुर सरकार ने पूरे 398 किलोमीटर सीमांत हिस्से पर वर्ष 2028 तक बाड़ लगाने का कार्य संपन्न करने का लक्ष्य रखा है।",
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  "category": "मणिपुर",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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    "युमनाम खेमचंद सिंह",
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