मणिपुर के कामजोंग में नए सिरे से भड़की जातीय हिंसा, गोलीबारी में महिला की मौत के बाद धारा 163 लागू मणिपुर के कामजोंग जिले में कुकी और नगा समुदायों के बीच ताजा संघर्ष के दौरान गोली लगने से एक महिला की जान चली गई। तनाव बढ़ने के बाद प्रशासन ने चसाड क्षेत्र में निषेधाज्ञा जारी कर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। मणिपुर के कामजोंग जिले में शुक्रवार रात अचानक बिगड़े हालात के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। चसाड गांव में भड़की अशांति के दौरान चली गोली से पांच बच्चों की मां दोमखोनेई तौथांग की मौत हो गई। उनकी गर्दन के पास गोली लगी थी, जिसके तुरंत बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वह स्थानीय स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ चल रहे एक विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं, तभी यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। इस खूनी टकराव और घरों में आगजनी की खबरों के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है। गोलीबारी और आगजनी से दहला चसाड गांव क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों पर संदिग्ध कुकी सशस्त्र समूहों की तरफ से अचानक गोलियां चलाई गईं, जिसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभाला। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई यह भीषण गोलीबारी शुक्रवार देर रात से लेकर शनिवार सुबह तक रुक-रुक कर चलती रही। इस हिंसक टकराव में दोनों पक्षों के कई नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई है। इसके साथ ही उपद्रव के दौरान कम से कम चार घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, घायलों की कुल संख्या और संपत्ति के नुकसान का आधिकारिक आकलन प्रशासन की ओर से पूरा किया जाना बाकी है। तांगखुल नगा ग्रामीणों के मकानों को भी बनाया गया निशाना इस ताजा घटनाक्रम से ठीक पहले 9 और 10 अक्टूबर की दरमियानी रात को अज्ञात उपद्रवियों ने तांगखुल नगा समुदाय के ग्रामीणों के घरों में आग लगा दी थी। लगातार दो दिनों से बन रहे इस तनावपूर्ण माहौल ने कुकी और नगा समूहों के बीच की दूरियों को और गहरा कर दिया। महिला की मौत पर कुकी ह्यूमन राइट्स फोरम, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन और उखरुल की कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी ने कड़ा आक्रोश जताया है। इन संगठनों ने इस घटना की पुरजोर निंदा करते हुए जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। प्रशासन ने लागू की धारा 163, सख्त पहरा हालात को और ज्यादा बिगड़ने से रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने त्वरित कदम उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। यह निषेधाज्ञा चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में प्रभावी की गई है। इस आदेश के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जमा होने, किसी भी प्रकार के घातक हथियार या खतरनाक वस्तुएं लेकर चलने और इलाके में बिना अनुमति आवाजाही पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। किन्हें मिलेगी प्रतिबंधों से छूट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाबलों, ड्यूटी मजिस्ट्रेटों और बुनियादी जनसुविधाओं से जुड़े आवश्यक सेवा कर्मियों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। इसके अलावा, जिन नागरिकों के पास कामजोंग जिले के जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी विशेष अनुमति पत्र होगा, उन्हें भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। लगातार सामने आ रहे इन टकरावों ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में शांति बहाली की कोशिशों के सामने खड़ी नाजुक सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इसका आप पर असर कामजोंग जिले में धारा 163 लागू होने से स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के कामकाज, आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। • मणिपुर में: चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने और सामान्य आवाजाही पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। इस क्षेत्र में जाने या वहां से गुजरने के लिए स्थानीय नागरिकों को जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक से विशेष अनुमति लेनी होगी। • पूरे देश में: मणिपुर में जातीय तनाव की नई घटनाओं से संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा समीक्षा तेज हो सकती है। पूर्वोत्तर के सीमावर्ती इलाकों में यात्रा या आवश्यक माल ढुलाई की योजना बना रहे लोगों को स्थानीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों की जांच करनी होगी। • आवश्यक सेवाओं पर: ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इस पाबंदी से छूट दी गई है। आम नागरिकों को राशन और जरूरी सामान जुटाने के लिए स्थानीय प्रशासन के अगले निर्देशों की प्रतीक्षा करनी होगी। • सुरक्षा जांच के नियम: इलाके में हथियार या खतरनाक वस्तुएं ले जाने पर सख्त प्रतिबंध है और गश्त बढ़ा दी गई है। सुरक्षा जांच चौकियों पर कड़े प्रोटोकॉल के कारण स्थानीय लोगों को सामान्य आवागमन में अतिरिक्त समय लग सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम स्थानीय स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने के विरोध और उससे पहले हुए आपसी आगजनी के मामलों की वजह से भड़का। • ताजा विरोध प्रदर्शन: चसाड गांव के स्वयंसेवकों को पकड़े जाने और हिरासत में रखे जाने के खिलाफ स्थानीय महिलाएं विरोध दर्ज कराने एकत्र हुई थीं। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों पर कथित गोलीबारी हुई और दोनों पक्षों के बीच जवाबी फायरिंग शुरू हो गई। • पूर्व में हुई आगजनी: इस टकराव से ठीक पहले 9 और 10 अक्टूबर की रात को अज्ञात तत्वों ने तांगखुल नगा समुदाय के घरों को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना ने दोनों समुदायों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास और तनाव को भड़का दिया। • जातीय संवेदनशीलता: इलाके में कुकी और नगा समुदायों के बीच लंबे समय से जारी तनावपूर्ण समीकरणों ने छोटी घटनाओं को भी बड़े टकराव में बदलने की जमीन तैयार की। सवाल-जवाब 1. कामजोंग के चसाड गांव में किसकी मौत हुई? गोलीबारी में पांच बच्चों की मां दोमखोनेई तौथांग की गर्दन के पास गोली लगने से मौत हो गई। 2. प्रशासन ने इलाके में कौन सी कानूनी पाबंदी लागू की है? जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की है। 3. शुक्रवार रात हिंसा कैसे भड़की थी? गांव के स्वयंसेवकों की हिरासत के विरोध के बीच सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की गई, जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की। 4. क्या इस हिंसा में संपत्ति का भी नुकसान हुआ है? हां, टकराव के दौरान चार घरों को जलाए जाने की खबर है, जबकि इससे पहले 9-10 अक्टूबर की रात को तांगखुल नगा ग्रामीणों के मकानों में भी आग लगाई गई थी। 5. निषेधाज्ञा से किन लोगों को छूट प्रदान की गई है? ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों, मजिस्ट्रेटों, आवश्यक सेवा कर्मियों और प्रशासन से विशेष परमिट प्राप्त व्यक्तियों को छूट दी गई है। https://trendkia.com/manipur/kamjong-men-nae-sire-se-bharaki-jatiya-hinsa-golibari-men-mahila-ki-mauta-ke-bada-dhara-163-lagu-45954 TrendKia — Har trend, sabse pehle.